नई दिल्ली। नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन के बाद बिहार और असम सरकार ने प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। दोनों राज्यों ने आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है।
26 जुलाई तक दर्ज सभी मामले होंगे निरस्त
बिहार सरकार के अनुसार, 26 जुलाई शाम छह बजे तक आंदोलन के सिलसिले में दर्ज सभी एफआईआर, परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ भविष्य में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सीजेपी की चेतावनी के बाद तेज हुई कार्रवाई
इस फैसले से पहले काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की थी। पार्टी ने चेतावनी दी थी कि यदि मंगलवार तक सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो वह दोबारा आंदोलन शुरू करेगी।
बिहार में 694 लोगों को लिया गया था हिरासत में
छात्र आंदोलन के दौरान बिहार के कई जिलों में कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई थी। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें 339 नाबालिग थे, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया, जबकि 355 लोगों को हिंसक घटनाओं में शामिल पाए जाने पर अदालत में पेश किया गया।
हिंसा में 91 पुलिसकर्मी हुए घायल
पुलिस के मुताबिक, आंदोलन के दौरान हुई झड़पों में 91 पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए। सारण जिले में दो प्रखंड विकास पदाधिकारी गंभीर रूप से जख्मी हुए, जबकि सिवान और सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक समेत कई अन्य अधिकारी भी घायल हुए थे।
असम सरकार ने भी रिहाई का आदेश जारी किया
असम के गृह एवं राजनीतिक विभाग ने भी आधिकारिक आदेश जारी कर आंदोलन से जुड़े 13 लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। राज्य सरकार ने उनके खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।
केंद्र से हुई थी तीसरे दौर की बातचीत
सीजेपी ने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले धरने के समापन से पहले केंद्र सरकार के साथ तीसरे दौर की वार्ता में यह सहमति बनी थी कि देशभर में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी। साथ ही भविष्य में आंदोलन से जुड़े लोगों पर नए मामले दर्ज नहीं किए जाएंगे।
लिखित समझौते की मांग
राज्यसभा सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि पार्टी ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को एक ड्राफ्ट समझौता सौंपा था। सरकार ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मंगलवार तक लिखित समझौता देने का भरोसा दिया था। रंका ने कहा कि यदि तय समय तक लिखित समझौता नहीं मिला और सभी गिरफ्तार लोगों की रिहाई नहीं हुई, तो पार्टी फिर से आंदोलन शुरू करेगी।
कानूनी सहायता के लिए सिब्बल का ऐलान
कपिल सिब्बल ने कहा कि जिन राज्यों में छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएंगे, वहां उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए उन्होंने अपनी ओर से एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की, ताकि प्रभावित छात्रों की कानूनी लड़ाई प्रभावी ढंग से लड़ी जा सके। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि दिल्ली पुलिस फेशियल रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों की पहचान कर सकती है। वहीं, सीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन को पहले से ही आशंका थी कि आंदोलन खत्म होने के बाद प्रदर्शनकारियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा सकता है।