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ममता की मजबूरी या बड़ा सियासी दांव? PM पद पर लिया बड़ा यू-टर्न,  बोलीं- कांग्रेस को मिल सकता है मौका, ‘मुझे कोई इगो नहीं’

इंडिया गठबंधन की बैठक में प्रधानमंत्री पद को लेकर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के एक बयान ने विपक्षी राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। लंबे समय से विपक्षी खेमे की प्रमुख नेताओं में गिनी जाने वाली ममता बनर्जी. . .

नई दिल्ली: इंडिया गठबंधन की बैठक में प्रधानमंत्री पद को लेकर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के एक बयान ने विपक्षी राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। लंबे समय से विपक्षी खेमे की प्रमुख नेताओं में गिनी जाने वाली ममता बनर्जी ने पहली बार अपेक्षाकृत साफ शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री पद कांग्रेस को मिल सकता है और इस मुद्दे पर उनका कोई ‘इगो’ नहीं है। ममता का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी एकता को मजबूत करने, बीजेपी के खिलाफ व्यापक मोर्चा तैयार करने और गैर-एनडीए दलों को एक मंच पर लाने की कोशिशों पर चर्चा हो रही है। ऐसे में उनके बयान को राजनीतिक रणनीति में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

PM पद पर ममता ने क्यों बदला रुख?

बैठक में जब विपक्षी गठबंधन के नेतृत्व और प्रधानमंत्री पद को लेकर चर्चा हुई, तो ममता बनर्जी ने कहा कि कांग्रेस प्रधानमंत्री पद हासिल कर सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर उन्हें कोई व्यक्तिगत ‘इगो’ नहीं है। हालांकि, ममता ने इसके साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी। उनका कहना था कि अंतिम फैसला सभी सहयोगी दलों की सर्वसम्मति से होना चाहिए। यानी, ममता ने प्रधानमंत्री पद पर अपनी किसी अनिवार्य दावेदारी का संकेत देने के बजाय कांग्रेस के लिए संभावित रास्ता खुला रखा।

क्या राजनीतिक मजबूरी में पीछे हटीं ममता?

ममता के इस रुख को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग व्याख्याएं हो सकती हैं। इसे सीधे तौर पर उनकी ‘मजबूरी’ कहना एक राजनीतिक निष्कर्ष होगा, लेकिन उनके बयान से इतना जरूर स्पष्ट होता है कि वह PM पद के सवाल पर कांग्रेस के साथ टकराव की स्थिति बनाने के बजाय सहमति की गुंजाइश छोड़ रही हैं। खास तौर पर तब, जब बैठक में विपक्षी एकता को व्यापक बनाने के लिए गैर-एनडीए दलों, सिविल सोसाइटी और बुद्धिजीवियों को भी साथ लाने की बात हुई। ऐसे में ममता का नरम रुख गठबंधन के भीतर सहमति बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।

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बाम दलों के प्रस्ताव पर भी ममता ने जताई सहमति

इंडिया गठबंधन की बैठक में सीपीआई(एम) नेता एमए बेबी ने बीजेपी विरोधी सभी दलों के साथ सिविल सोसाइटी और प्रमुख बुद्धिजीवियों को एक मंच पर लाने का प्रस्ताव रखा। ममता बनर्जी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि वह पहले से ही गैर-एनडीए विपक्षी नेताओं से संपर्क कर रही हैं। इसी क्रम में ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बातचीत का भी जिक्र सामने आया। इससे संकेत मिलता है कि विपक्षी दायरे को मौजूदा गठबंधन से आगे बढ़ाने की कोशिशों पर भी चर्चा हो रही है।

कांग्रेस को PM पद देने की बात पर खड़गे ने क्या कहा?

ममता के बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता या प्रधानमंत्री पद के लिए लड़ाई नहीं कर रही है। खड़गे ने पार्टी की प्राथमिकता देश और लोकतंत्र की रक्षा को बताया। इससे बैठक में एक दिलचस्प स्थिति बनी—एक तरफ ममता ने कांग्रेस के प्रधानमंत्री पद पर दावे की संभावना को स्वीकार किया, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष ने खुद को प्रधानमंत्री पद की दौड़ से जोड़ने से परहेज किया।

राहुल गांधी ने केरल का उदाहरण देकर समझाया विपक्षी फॉर्मूला

बैठक में राहुल गांधी ने विपक्षी एकता को लेकर केरल का उदाहरण दिया। उन्होंने याद दिलाया कि केरल में कांग्रेस और वाम दल आमने-सामने चुनाव लड़ते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में एक साथ हैं। उनका संदेश था कि राज्य स्तर की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और राष्ट्रीय स्तर की रणनीति को अलग-अलग तरीके से देखा जाना चाहिए। यही फॉर्मूला INDIA गठबंधन के सामने बड़ी चुनौती भी है। अलग-अलग राज्यों में सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें साझा राजनीतिक मंच तैयार करना है।

बंगाल को लेकर ममता ने उठाया SIR का मुद्दा

बैठक में पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रक्रिया और SIR को लेकर भी ममता बनर्जी ने अपनी बात रखी। दक्षिण कोलकाता में आग की घटना में EVM के क्षतिग्रस्त होने का जिक्र करते हुए उन्होंने खुद को इस प्रक्रिया का ‘सबसे बड़ा पीड़ित’ बताया। ममता के इन दावों का बिहार के विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने समर्थन किया। वहीं, राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी दल इस स्थिति से प्रभावित जरूर हैं, लेकिन उनके अनुसार इसका सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है।

उद्धव ठाकरे ने तृणमूल को लेकर साधा निशाना

बैठक में शिवसेना के उद्धव गुट के नेता उद्धव ठाकरे ने तृणमूल कांग्रेस में कथित टूट की कोशिशों का मुद्दा उठाया। उन्होंने अपनी पार्टी में हुए विभाजन का उदाहरण देते हुए दावा किया कि जिस तरह उनकी पार्टी को तोड़ने की रणनीति अपनाई गई थी, वैसी ही कोशिश तृणमूल कांग्रेस के साथ भी की जा रही है। इस बयान ने बंगाल की राजनीति को लेकर बैठक में चर्चा को और महत्वपूर्ण बना दिया।

बंगाल की राजनीति पर उमर अब्दुल्ला ने भी रखा पक्ष

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर करीब चार मिनट तक अपनी बात रखी। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता हरेंद्र मलिक ने विपक्षी एकता को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन को प्रभावी बनाने में कांग्रेस को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी होगी।

ममता के बयान से क्या निकला सियासी संकेत?

बैठक में ममता बनर्जी का सबसे अहम संदेश प्रधानमंत्री पद को लेकर सामने आया। उन्होंने कांग्रेस को PM पद मिलने की संभावना को स्वीकार करते हुए अपने लिए कोई व्यक्तिगत आग्रह नहीं होने की बात कही। इससे कम से कम इतना संकेत जरूर मिलता है कि PM पद को लेकर ममता कांग्रेस के साथ सीधे टकराव की स्थिति में नहीं जाना चाहतीं। हालांकि, इसे उनकी स्थायी राजनीतिक स्थिति या अंतिम फैसला मानना जल्दबाजी होगी। खुद ममता ने भी कहा कि निर्णय सभी दलों की सर्वसम्मति से होना चाहिए। फिलहाल, उनके बयान ने INDIA गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चा को जरूर नई दिशा दे दी है। सवाल यही है कि क्या यह महज विपक्षी एकता के लिए ममता की रणनीतिक नरमी है या आने वाले समय में प्रधानमंत्री पद को लेकर वास्तव में कांग्रेस के लिए रास्ता तैयार हो रहा है?

एक नज़र में

बिंदुजानकारी
बैठकINDIA गठबंधन, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, नई दिल्ली
वाम प्रस्तावसभी भाजपा विरोधी दल, सिविल सोसाइटी, बुद्धिजीवी एकजुट हों (एम.ए. बेबी)
ममता का रुखप्रस्ताव का समर्थन, PM पद पर कांग्रेस के लिए “कोई ईगो नहीं”
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उद्धव ठाकरेतृणमूल में तोड़फोड़ की कोशिश का आरोप
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