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‘मैंने कभी अभिषेक की आलोचना नहीं की…’, अमिताभ बच्चन की इस सोच में छिपी है अच्छी परवरिश की सीख, हर माता-पिता जरूर समझें ये बात

बच्चों की परवरिश करना सिर्फ उन्हें अच्छी शिक्षा और बेहतर सुविधाएं देना नहीं है, बल्कि उनके मन में यह विश्वास पैदा करना भी है कि जिंदगी के हर उतार-चढ़ाव में उनके माता-पिता उनके साथ खड़े हैं। अक्सर बच्चे जब किसी. . .

मुंबई: बच्चों की परवरिश करना सिर्फ उन्हें अच्छी शिक्षा और बेहतर सुविधाएं देना नहीं है, बल्कि उनके मन में यह विश्वास पैदा करना भी है कि जिंदगी के हर उतार-चढ़ाव में उनके माता-पिता उनके साथ खड़े हैं। अक्सर बच्चे जब किसी काम में असफल होते हैं या उनसे कोई गलती हो जाती है, तो माता-पिता उन्हें समझाने के बजाय डांटने और उनकी आलोचना करने लगते हैं। कई बार दूसरों के सामने कही गई छोटी-सी नकारात्मक बात भी बच्चों के आत्मविश्वास को गहरी चोट पहुंचा सकती है। ऐसे में बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की अपने बेटे अभिषेक बच्चन को लेकर कही गई एक बात हर माता-पिता के लिए बड़ी सीख बन सकती है। उन्होंने बताया कि बेटे के फिल्मी करियर में उतार-चढ़ाव आने के बावजूद उन्होंने कभी उसकी आलोचना नहीं की। इसके बजाय हमेशा उसे प्रोत्साहित किया और यह भरोसा दिलाया कि एक फिल्म की असफलता से जिंदगी खत्म नहीं होती। अमिताभ की यह सोच बताती है कि बच्चों को हर समय उनकी गलतियों का एहसास कराने से ज्यादा जरूरी है, उन्हें यह महसूस कराना कि उनका परिवार हमेशा उनके साथ है।

KBC के मंच पर रणबीर कपूर के सामने अमिताभ ने खोला दिल का राज

दरअसल, रणबीर कपूर हाल ही में अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के सेट पर पहुंचे थे। इस दौरान दोनों के बीच परिवार, पिता-बेटे के रिश्ते और बच्चों की परवरिश को लेकर दिलचस्प बातचीत हुई। बातचीत के दौरान रणबीर ने अभिषेक बच्चन का जिक्र करते हुए कहा कि वह काफी हद तक उनके साथ बड़े हुए हैं। उन्होंने अमिताभ से पूछा कि जब अभिषेक कोई ऐसा काम करते थे जो उन्हें पसंद नहीं आता था, तो क्या वह सीधे उनसे अपनी नाराजगी जाहिर करते थे या फिर जया बच्चन के माध्यम से अपनी बात पहुंचाते थे। रणबीर ने यह भी बताया कि उनके पिता ऋषि कपूर कई बार अपनी बात उनकी मां के जरिए उन तक पहुंचाते थे। इस पर अमिताभ बच्चन ने अपने बेटे के साथ रिश्ते को लेकर एक दिलचस्प बात साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने अभिषेक की कभी आलोचना नहीं की। जब भी अभिषेक की कोई फिल्म नहीं चली, तो उन्होंने उसे निराश करने के बजाय आगे बढ़ने का हौसला दिया।

‘फिल्म नहीं चली तो कोई बात नहीं, आगे और मौके मिलेंगे’

अमिताभ बच्चन ने बताया कि उन्होंने अभिषेक को हमेशा यही समझाया कि अगर कोई फिल्म सफल नहीं हुई तो इसमें परेशान होने की जरूरत नहीं है। आगे भी फिल्में आएंगी और काम करने के नए अवसर मिलेंगे। उनका तरीका बेटे की असफलताओं को बार-बार गिनाने के बजाय उसके आत्मविश्वास को बनाए रखना था। उन्होंने आलोचना करने के बजाय उसे आशीर्वाद और प्रोत्साहन दिया। अमिताभ की इस बात में माता-पिता के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश छिपा है। बच्चों को यह समझाने की जरूरत होती है कि असफलता उनके व्यक्तित्व या काबिलियत का अंतिम फैसला नहीं है। एक बार मिली नाकामी के बाद भी उनके पास दोबारा कोशिश करने और बेहतर करने का मौका रहता है।

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बच्चों की आलोचना करने से कमजोर हो सकता है आत्मविश्वास

कई बार माता-पिता बच्चों की भलाई के लिए उन्हें डांटते हैं। उन्हें लगता है कि सख्ती करने से बच्चे अपनी गलतियां सुधारेंगे और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। लेकिन जरूरत से ज्यादा आलोचना का बच्चों की भावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। खासतौर पर जब माता-पिता बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं या दूसरों के सामने उनकी कमियां बताते हैं, तो उनमें हीनभावना और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। बच्चे धीरे-धीरे अपनी समस्याएं साझा करने से बचने लगते हैं। उन्हें डर रहता है कि अपनी परेशानी बताने पर उन्हें समझने के बजाय डांट सुननी पड़ेगी। इसलिए माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे गलती और बच्चे के व्यक्तित्व को अलग-अलग समझें। किसी गलती को गलत बताना जरूरी है, लेकिन बच्चे को यह महसूस कराना कि वह खुद ही गलत या नाकाबिल है, उसके आत्मविश्वास को नुकसान पहुंचा सकता है।

पिता और बच्चों के बीच खुलकर बातचीत होना है जरूरी

अमिताभ बच्चन की बात पिता और बेटे के रिश्ते का एक अहम पहलू भी सामने लाती है। अक्सर परिवारों में पिता और बच्चे एक-दूसरे से प्यार तो करते हैं, लेकिन अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर नहीं कर पाते। बच्चे कई बार पिता के सामने अपनी असफलता, डर या परेशानी बताने में हिचकिचाते हैं। उन्हें लगता है कि उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें डांट मिल सकती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए माता-पिता को घर में बातचीत का ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जहां बच्चे बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें। इसके लिए कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

  • बच्चों की बात ध्यान से सुनें: जब बच्चा अपनी परेशानी बताए तो तुरंत फैसला सुनाने या सलाह देने के बजाय पहले उसकी बात पूरी सुनें।
  • गलती पर अपमानित न करें: बच्चों को समझाएं कि उनसे गलती हुई है, लेकिन उन्हें दूसरों के सामने शर्मिंदा न करें।
  • दूसरों से तुलना करने से बचें: हर बच्चे की अपनी क्षमता, रुचि और सीखने की गति होती है।
  • असफलता में साथ दें: परीक्षा, खेल या करियर में असफल होने पर बच्चे को यह भरोसा दिलाएं कि आगे बढ़ने के और भी अवसर हैं।
  • उनकी भावनाओं को महत्व दें: बच्चों की छोटी दिखने वाली परेशानियां भी उनके लिए बड़ी हो सकती हैं। उन्हें नजरअंदाज न करें।

बच्चों को यह भरोसा होना चाहिए कि माता-पिता हमेशा साथ हैं

परवरिश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बच्चों के मन में सुरक्षा और अपनापन पैदा करना है। उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि दुनिया में कोई उनका साथ दे या न दे, उनके माता-पिता मुश्किल समय में उनके साथ खड़े रहेंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चों की हर गलती को नजरअंदाज किया जाए या उन्हें अनुशासन न सिखाया जाए। बल्कि उन्हें सही और गलत का अंतर समझाते हुए ऐसा व्यवहार करना जरूरी है, जिससे वे अपनी गलतियों को स्वीकार करने से डरें नहीं। जब बच्चों को पता होता है कि गलती होने पर भी माता-पिता उनका साथ नहीं छोड़ेंगे, तो वे अपनी समस्याओं को छिपाने के बजाय खुलकर साझा करते हैं। इससे परिवार के भीतर भरोसा मजबूत होता है।

बच्चे की सफलता से ज्यादा जरूरी है उसका मानसिक सुकून

अक्सर माता-पिता बच्चों से अच्छे नंबर, बेहतर करियर और बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद रखते हैं। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे जीवन में सफल हों, लेकिन इस कोशिश में कभी-कभी बच्चे की भावनात्मक जरूरतें पीछे छूट जाती हैं। अच्छी परवरिश का अर्थ केवल बच्चे को सफल बनाना नहीं, बल्कि उसे मानसिक रूप से मजबूत और आत्मविश्वासी बनाना भी है। अमिताभ बच्चन का अभिषेक को लेकर दिया गया उदाहरण इसी बात की याद दिलाता है कि बच्चों को हर बार आलोचना की नहीं, कई बार भरोसे और प्रोत्साहन की जरूरत होती है। आखिरकार, माता-पिता का काम बच्चों को गलतियों से पूरी तरह बचाना नहीं, बल्कि उन्हें यह सिखाना है कि गलती होने के बाद दोबारा कैसे खड़ा हुआ जाता है। अगर बच्चे को घर में प्यार, सम्मान और भावनात्मक सहारा मिलता है, तो वह जिंदगी की मुश्किल परिस्थितियों का सामना ज्यादा आत्मविश्वास के साथ कर सकता है।

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