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टीएमसी के पहले ही धरने में आधे से ज्यादा विधायक गायब! पार्टी में मची खलबली, अभिषेक बनर्जी के नारे भी गायब

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और नई सरकार के गठन के बाद विपक्ष में बैठी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अपने पहले ही बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में भारी असहजता और फजीहत का सामना करना पड़ा है। राज्य भर में टीएमसी. . .

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और नई सरकार के गठन के बाद विपक्ष में बैठी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अपने पहले ही बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में भारी असहजता और फजीहत का सामना करना पड़ा है। राज्य भर में टीएमसी कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों, एलपीजी (रसोई गैस) की बढ़ती कीमतों और हॉकर्स (फेरीवालों) की बेदखली जैसे मुद्दों को लेकर बुधवार को विधानसभा में अंबेडकर मूर्ति के नीचे टीएमसी विधायक दल ने एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था। लेकिन, इस धरने में टीएमसी के आधे से ज्यादा विधायक ही गायब (गैरहाजिर) रहे, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
इस धरने में संसदीय दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय, पूर्व मंत्री फिरहाद हकीम और बेलघाटा के विधायक कुणाल घोष जैसे शीर्ष नेता शामिल हुए थे। परंतु, चुनाव में करारी हार के बाद एकजुटता दिखाने के इस पहले ही प्रयास में विधायकों की नगण्य उपस्थिति ने टीएमसी के आंदोलन की धार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

80 में से पहुंचे सिर्फ 34 विधायक, अभिषेक के नारे भी गायब

हालिया चुनाव में हार के बाद विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल विधायकों की संख्या घटकर 80 रह गई है। लेकिन बुधवार को जब अंबेडकर प्रतिमा के नीचे धरना शुरू हुआ, तब शुरुआती समय में केवल 31 विधायक ही मौजूद थे। बाद में 3 और विधायक आकर जुड़े, जिससे यह संख्या महज 34 तक पहुंच सकी।
विधायकों की अनुपस्थिति के अलावा एक और बात ने राजनीतिक पंडितों का ध्यान खींचा। धरने के दौरान टीएमसी विधायकों ने ‘ममता बनर्जी जिंदाबाद’ और ‘तृणमूल जिंदाबाद’ के नारे तो लगाए, लेकिन पूरे प्रदर्शन के दौरान एक बार भी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ‘अभिषेक बनर्जी जिंदाबाद’ का नारा नहीं गूंजा। इसे हाल के दिनों में अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

फजीहत उड़ती देख कुणाल घोष ने दी सफाई

विधायकों की भारी अनुपस्थिति से मीडिया में पार्टी की किरकिरी होते देख बेलघाटा के टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने तुरंत डैमेज कंट्रोल (साफ-सफाई) का मोर्चा संभाला। उन्होंने संवाददाताओं से कहा:
“हमारे कई विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में नई सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा भारी राजनीतिक हिंसा चलाई जा रही है। कई जगहों पर हमारे आम कार्यकर्ता घर छोड़ने को मजबूर हैं। हमारी पार्टी की केंद्रीय ‘फैक्ट फाइंडिंग टीम’ (तथ्य अन्वेषण समिति) भी आज प्रभावित इलाकों के दौरे पर है। अपने-अपने क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होने की बड़ी जिम्मेदारी के कारण ही हमारे कई विधायक समय पर कोलकाता के इस कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए हैं।”

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पुलिसिया कार्रवाई और गिरफ्तारी के डर से ‘भूमिगत’ हुए नेता

जानकारों का मानना है कि कुणाल घोष भले ही इसे राजनीतिक हिंसा का नाम दे रहे हों, लेकिन असल वजह कुछ और है। राज्य में सत्ता बदलते ही जबरन वसूली (तोलाबाजी), सिंडिकेट राज, आम लोगों को धमकाने और देर रात ट्रकों व गाड़ियों से लूटपाट की साजिश रचने जैसे गंभीर मामलों में टीएमसी के छोटे-बड़े नेताओं की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां शुरू हो गई हैं। पिछले 24 से 48 घंटों में राज्य के चारों कोनों में हुई पुलिसिया कार्रवाई से टीएमसी बैकफुट पर है। ऐसे में कानूनी शिकंजे और गिरफ्तारी से बचने के लिए कई विधायक सार्वजनिक रूप से सामने आने से बच रहे हैं।
हाल ही में बिधाननगर नगर निगम के कद्दावर पार्षद और अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले देवराज चक्रवर्ती को पुलिस ने हिरासत में लिया है, जो पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है। दूसरी ओर, कैनिंग पश्चिम से उम्मीदवार रहे परेशराम दास और बाली से उम्मीदवार कैलाश मिश्रा गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले ही कोलकाता हाई कोर्ट में अग्रिम सुरक्षा की गुहार लगा चुके हैं। इस डर के माहौल ने विधानसभा में टीएमसी के पहले ही शक्ति प्रदर्शन की हवा निकाल दी है।

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