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बंगाल मिशन 2026 : फिर भारी पड़ेंगे शुभेंदु या नंदीग्राम की हार का बदला लेंगी ममता? कभी TMC सुप्रीमो के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार थे अधिकारी….

डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक कहावत मशहूर है- जो मेदिनीपुर जीतता है, वो बंगाल जीतता है। इस मेदिनीपुर के बेताज बादशाह कहे जाते हैं शुभेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार रहे शुभेंदु आज दीदी के. . .

डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक कहावत मशहूर है- जो मेदिनीपुर जीतता है, वो बंगाल जीतता है। इस मेदिनीपुर के बेताज बादशाह कहे जाते हैं शुभेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार रहे शुभेंदु आज दीदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

2026 में फिर आमने-सामने ममता बनर्जी

वर्ष 2021 के बंगाल चुनाव में नंदीग्राम की ऐतिहासिक लड़ाई में अपनी ही ‘गुरु’ ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अब 2026 के रण में एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस बार मुकाबला केवल नंदीग्राम तक सीमित नहीं है, बल्कि नंदीग्राम के धरती पुत्र ने दीदी के गढ़ भवानीपुर में भी ताल ठोक दी है।

नंदीग्राम का वो संग्राम, जब हिल गयी थी नबान्न की कुर्सी

2021 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने वह कर दिखाया था, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। 1,956 वोटों के अंतर से शुभेंदु ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके ही चुने हुए मैदान में पटखनी दी थी। वर्ष 2007 के भूमि आंदोलन में ममता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने वाले शुभेंदु ने जब वर्ष 2020 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थामा, तो बंगाल की राजनीति का भूगोल बदल गया।

2026 का मिशन : डबल धमाका करने की तैयारी

इस बार शुभेंदु अधिकारी एक साथ दो मोर्चों पर लड़ रहे हैं। ममता बनर्जी के मौजूदा निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर से चुनाव लड़कर उन्होंने सीधे चीफ मिनिस्टर को उनके घर में चुनौती दी है। उनका दावा है- नंदीग्राम में हराया था, इस बार भवानीपुर में भी हराऊंगा। नंदीग्राम में टीएमसी ने शुभेंदु के ही एक पूर्व करीबी को उनके खिलाफ उतारकर उन्हें घेरने की कोशिश की है, लेकिन लीडर ऑफ ऑपोजीशन यहां ‘भूमिपुत्र’ कार्ड के साथ डटे हुए हैं।

अभिषेक बनर्जी और प्रशांत किशोर से शुरू हुई थी बगावत

शुभेंदु अधिकारी के ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी का बढ़ता कद और प्रशांत किशोर (PK) की एंट्री को माना जाता है। शुभेंदु को लगा कि उनकी मेहनत को दरकिनार कर ‘भतीजे’ को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी टीस ने उन्हें बीजेपी का ‘पोस्टर बॉय’ बना दिया। आज वे विधानसभा में नेता प्र

फिर भारी पड़ेंगे शुभेंदु या नंदीग्राम की हार का बदला लेंगी ममता?

4 मई को जब ईवीएम (EVM) खुलेंगे, तो यह साफ हो जाएगा कि क्या ‘शिष्य’ एक बार फिर अपनी ‘गुरु’ पर भारी पड़ेगा या ममता बनर्जी अपनी हार का बदला चुकता करेंगी. बंगाल के इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

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