नई दिल्ली। लोकसभा से एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पारित होने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल कानून बना देने से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या खत्म नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक कानून लागू करने वालों की नीयत और व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक ऐसे कानून प्रभावी साबित नहीं होंगे।
‘प्रधानमंत्री नहीं, इन्फ्लुएंसर बन जाएं मोदी’
महाराष्ट्र स्थित अपने गृहनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया वीडियो को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा,“मुझे लगता है कि पीएम मोदी को इन्फ्लुएंसर बन जाना चाहिए। वह यह काम बहुत अच्छी तरह कर रहे हैं। अगर वह इतने अच्छे इन्फ्लुएंसर हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए और किसी दूसरे को देश चलाने का मौका देना चाहिए।”
प्रियंका गांधी ने भी साधा निशाना
इससे पहले कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया वीडियो पर टिप्पणी कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि केवल अलग-अलग कैमरा एंगल से वीडियो बनाकर जेन-जी युवाओं का विश्वास नहीं जीता जा सकता। उनके अनुसार प्रधानमंत्री को कैमरे का नहीं, बल्कि अपने दृष्टिकोण का बदलाव करना चाहिए।
‘कानून नहीं, नीयत बदलने की जरूरत’
एंटी-पेपर लीक बिल पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने कहा कि देश में पहले भी कई अच्छे कानून बने हैं, लेकिन उनका सही तरीके से पालन नहीं हो पाया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में सरकार ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट का वादा किया था, लेकिन पेपर लीक मामले की पहली सुनवाई ही स्थगित हो गई क्योंकि सीबीआई का वकील अदालत में उपस्थित नहीं था। दीपके ने कहा कि जब व्यवस्था ही गंभीर नहीं है, तो नए कानूनों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे।
20 जुलाई के छात्र आंदोलन को लेकर सरकार पर आरोप
दीपके ने छात्र आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक और छात्र आत्महत्याओं के विरोध में 20 जुलाई को हजारों छात्रों ने संसद मार्च किया था। उनके अनुसार आंदोलन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, छात्रों को हिरासत में लिया और कई मामलों में एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने आंदोलन समाप्त कराने के दौरान कई आश्वासन दिए थे, लेकिन बाद में उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया।
CJP के प्रमुख आरोप और मांगें
दीपके और CJP की ओर से सरकार के खिलाफ कई मुद्दे उठाए गए हैं—
- आंदोलन के बाद भी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहने का आरोप।
- एफआईआर वापस लेने और नए मामले दर्ज न करने के वादे को पूरा न करने का दावा।
- प्रभावित छात्रों और परिवारों को न्याय एवं मुआवजा देने की मांग।
- पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने की मांग।
- छात्र आंदोलन में कथित पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच की मांग।
‘छात्र वोट से देंगे जवाब’
दीपके ने कहा कि यदि छात्रों के साथ कथित उत्पीड़न जारी रहा तो इसका असर चुनावों में दिखाई देगा। उनका कहना था कि प्रत्येक छात्र के परिवार में कई मतदाता होते हैं और यदि सरकार युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती, तो छात्र लोकतांत्रिक तरीके से मतदान के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
कंगना रनौत के बयान पर भी प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद कंगना रनौत के ‘गटर जनरेशन’ वाले बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में दीपके ने सीधे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह केवल गंभीर राजनीतिक मुद्दों पर प्रतिक्रिया देना पसंद करते हैं और पार्ट-टाइम नेताओं के बयानों पर समय नहीं देना चाहते।
राजनीतिक माहौल और आगे की राह
एंटी-पेपर लीक बिल को लेकर संसद के भीतर और बाहर बहस तेज है। एक ओर सरकार इसे सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष और छात्र संगठनों का कहना है कि केवल कठोर कानून पर्याप्त नहीं हैं। उनका तर्क है कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, जवाबदेही और पारदर्शी व्यवस्था के बिना पेपर लीक जैसी घटनाओं पर स्थायी रोक लगाना संभव नहीं होगा।