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चीनी को सत्ता रहा परमाणु हमले का डर ! PLA की रिपोर्ट ने जापान को बताया बड़ा खतरा, बीजिंग ने शुरू की नई तैयारी

नई दिल्ली। चीन और जापान के बीच बढ़ती रणनीतिक तनातनी के बीच एक चीनी सैन्य अध्ययन ने परमाणु हमले की आशंका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की रॉकेट फोर्स से जुड़े शोधकर्ताओं. . .

नई दिल्ली। चीन और जापान के बीच बढ़ती रणनीतिक तनातनी के बीच एक चीनी सैन्य अध्ययन ने परमाणु हमले की आशंका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की रॉकेट फोर्स से जुड़े शोधकर्ताओं के अध्ययन में चीनी शहरों को संभावित परमाणु हमले के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट में जापान की परमाणु नीति और उसकी तकनीकी क्षमता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

दुनिया को तबाह करने वाला युद्ध नहीं, छोटे परमाणु हमले की चिंता

चीनी सैन्य विश्लेषकों के आकलन के मुताबिक व्यापक परमाणु युद्ध की संभावना भले ही कम हो, लेकिन छोटे स्तर के परमाणु हमले की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। अध्ययन में पड़ोसी देशों के साथ बढ़ते तनाव और उग्रवादी संगठनों की संभावित गतिविधियों को ऐसे खतरे से जोड़कर देखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक किसी प्रमुख चीनी शहर को कम क्षमता वाले परमाणु हथियार से निशाना बनाए जाने की स्थिति में देश की स्वास्थ्य और आपातकालीन व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ सकता है।

जापान क्यों बना PLA की रिपोर्ट में निशाना?

अध्ययन में जापान को लेकर चीन की चिंता खास तौर पर सामने आती है। चीन का आरोप है कि जापान ने परमाणु हथियारों के निषेध से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। साथ ही, जापान की लंबे समय से चली आ रही गैर-परमाणु नीति में संभावित बदलाव को लेकर भी बीजिंग सतर्क है। चीन की ओर से यह दावा भी किया गया है कि जापान के पास हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम का बड़ा भंडार है और उसकी तकनीकी तथा आर्थिक क्षमता उसे अपेक्षाकृत कम समय में परमाणु हथियार विकसित करने की स्थिति में ला सकती है। हालांकि, ऐसे दावों को चीन के आकलन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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हिरोशिमा से लेकर आधुनिक सिमुलेशन तक, PLA ने तैयार किया मॉडल

चीनी शोधकर्ताओं ने संभावित परमाणु हमले के प्रभावों का आकलन करने के लिए मॉडलिंग का सहारा लिया। इसके लिए 1945 के हिरोशिमा परमाणु हमले और दुनिया में किए गए विभिन्न सिमुलेशन से उपलब्ध आंकड़ों का अध्ययन किया गया। अध्ययन का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि किसी बड़े शहर में कम क्षमता वाले परमाणु हमले की स्थिति में चिकित्सा और आपातकालीन सेवाओं पर कितना दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक रेडिएशन से प्रभावित लोगों की बड़ी संख्या अस्पतालों और मेडिकल सिस्टम के सामने गंभीर चुनौती पैदा कर सकती है।

चीन ने शहरों को इमरजेंसी मोड में तैयार करना शुरू किया

परमाणु आपात स्थिति की आशंका को ध्यान में रखते हुए चीन ने देश में विशेष आपातकालीन बचाव केंद्रों का नेटवर्क तैयार किया है। रिपोर्ट में 30 से ज्यादा विशेष इमरजेंसी रेस्क्यू सेंटर बनाए जाने का उल्लेख किया गया है। शोधकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन को जरूरी चिकित्सा सामग्री और आपातकालीन उपकरणों का पर्याप्त भंडार बनाए रखने की सलाह दी है, ताकि किसी भी बड़े संकट की स्थिति में तुरंत राहत अभियान शुरू किया जा सके।

आम लोगों को भी दी जाए आपदा से निपटने की ट्रेनिंग

PLA से जुड़े शोधकर्ताओं का मानना है कि परमाणु आपात स्थिति से निपटना केवल सैन्य या मेडिकल व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। स्थानीय प्रशासन के साथ आम नागरिकों को भी आपात स्थिति में संयम बनाए रखने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट में आपदा प्रबंधन और चिकित्सा व्यवस्था को पहले से मजबूत करने पर जोर दिया गया है, ताकि किसी अप्रत्याशित घटना की स्थिति में अफरा-तफरी को कम किया जा सके।

चीन-जापान तनाव के बीच क्यों अहम है यह रिपोर्ट?

इस अध्ययन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चीन और जापान के बीच सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति को लेकर पहले से ही तनाव मौजूद है। ऐसे समय में PLA से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा संभावित परमाणु खतरे का अध्ययन करना बीजिंग की रणनीतिक चिंताओं का संकेत माना जा सकता है।

हालांकि, रिपोर्ट में व्यक्त आशंकाएं संभावित परिदृश्यों और सैन्य विश्लेषण पर आधारित हैं। इसे चीन या जापान के बीच किसी वास्तविक परमाणु हमले की घोषणा या तत्काल हमले की चेतावनी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

एक्सक्लूसिव एंगल: असली चिंता परमाणु हमला नहीं, तैयारी की होड़?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यह है कि परमाणु हथियारों की चर्चा से ज्यादा जोर आपातकालीन तैयारी पर दिया जा रहा है। चीन का यह अध्ययन बताता है कि बीजिंग संभावित बड़े शहरों पर हमले की स्थिति में मेडिकल सिस्टम, रेस्क्यू नेटवर्क और नागरिकों की तैयारियों को रणनीतिक सुरक्षा का हिस्सा मान रहा है। यानी चीन-जापान तनाव की कहानी अब सिर्फ मिसाइल और सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है। इसके साथ शहरों की सुरक्षा, नागरिक तैयारी और परमाणु आपदा प्रबंधन भी नई चिंता के रूप में सामने आ रहे हैं।

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