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Share Market Today : ट्रंप को झटका और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार में तूफानी तेजी, Sensex 1385 अंक उछला, Nifty 24,344 के पार

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। लगातार छह कारोबारी सत्रों से जारी तेजी ने निवेशकों के चेहरे खिला दिए हैं। गुरुवार सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। कच्चे. . .

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। लगातार छह कारोबारी सत्रों से जारी तेजी ने निवेशकों के चेहरे खिला दिए हैं। गुरुवार सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट, अमेरिकी शेयर बाजार में आई शानदार तेजी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने घरेलू बाजार को मजबूत सहारा दिया। गुरुवार सुबह शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 1,385 अंकों की छलांग लगाकर 78,686.73 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 384 अंकों की बढ़त के साथ 24,344.90 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों के बीच एक बार फिर सकारात्मक माहौल बना दिया है। खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ चुकी हैं। इसके साथ ही अमेरिका में राजनीतिक घटनाक्रम और ईरान के साथ जारी तनाव में कमी की संभावनाओं ने भी दुनियाभर के शेयर बाजारों को मजबूती दी है।

सेंसेक्स में 1,385 अंकों की छलांग, निफ्टी ने पार किया 24,300 का स्तर

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद मजबूत रही। कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय बाद प्रमुख सूचकांकों में तेज उछाल देखने को मिला। सुबह 9:17 बजे के आसपास बीएसई सेंसेक्स 1,385 अंक यानी 1.79 प्रतिशत की तेजी के साथ 78,686.73 के स्तर पर पहुंच गया। दूसरी ओर निफ्टी 50 में 384 अंकों यानी करीब 1.60 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 24,344.90 पर कारोबार करने लगा। बाजार में आई इस तेजी के पीछे केवल घरेलू निवेशकों का उत्साह नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में आए बदलाव भी बड़ी वजह बने। अमेरिका से लेकर एशियाई बाजारों तक सकारात्मक संकेत मिलने का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

ट्रंप को राजनीतिक झटका, बाजार ने राहत की उम्मीदों का किया स्वागत

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी के बेहतर प्रदर्शन को वैश्विक निवेशकों ने सकारात्मक रूप में लिया। राजनीतिक समीकरणों में बदलाव से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और फैसलों पर कांग्रेस की निगरानी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

निवेशकों के बीच यह उम्मीद भी मजबूत हुई कि अमेरिकी प्रशासन की विदेश नीति में संतुलन आ सकता है और ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल के टकराव के और बढ़ने की आशंका कम हो सकती है। दरअसल, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ता है। ऐसे में तनाव कम होने की उम्मीद ने निवेशकों को राहत दी और शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल मजबूत हुआ।

Crude Oil की कीमतों में लगातार चौथे दिन गिराव

भारतीय शेयर बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजहों में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भी शामिल रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में क्रूड ऑयल की कीमतें नीचे आईं।

गुरुवार को 02:11 GMT तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:

  • Brent Crude: 1.03 प्रतिशत गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा।
  • US WTI Crude: 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 86.98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

इससे पहले वाले कारोबारी सत्र में भी दोनों प्रमुख बेंचमार्क में 8 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। इस गिरावट के कारण कच्चे तेल की कीमतें 31 अगस्त के बाद के निचले स्तर तक पहुंच गई थीं। ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना भारत जैसी तेल आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत को कैसे मिलेगा सस्ते कच्चे तेल का फायदा?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बदलाव का असर देश की अर्थव्यवस्था पर सीधे तौर पर पड़ता है। जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत का आयात बिल बढ़ जाता है। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ने, रुपये पर दबाव आने और महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। इसके विपरीत तेल की कीमतों में गिरावट से कई मोर्चों पर राहत मिल सकती है।

1. महंगाई पर कम हो सकता है दबाव

कच्चे तेल की कीमतें घटने से ईंधन और परिवहन की लागत पर दबाव कम हो सकता है। इसका फायदा धीरे-धीरे कई वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

2. कंपनियों के मुनाफे में सुधार की उम्मीद

एविएशन, पेंट, टायर, लॉजिस्टिक्स और अन्य तेल आधारित क्षेत्रों की कंपनियों को सस्ते कच्चे तेल से फायदा मिल सकता है। इनके उत्पादन और परिचालन खर्च में कमी आने की संभावना रहती है।

3. भारत के आयात बिल को राहत

तेल सस्ता होने से देश को कच्चे तेल के आयात पर अपेक्षाकृत कम विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ सकती है। इससे भारत के बाहरी आर्थिक संतुलन को मजबूती मिल सकती है।

अमेरिकी शेयर बाजार में भी आई जबरदस्त तेजी

भारतीय बाजार को मजबूती देने वाला एक बड़ा संकेत अमेरिका के वॉल स्ट्रीट से आया। बुधवार के कारोबारी सत्र में अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में शानदार बढ़त दर्ज की गई।

अमेरिकी बाजार के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार रहे:

  • Dow Jones: 1,569 अंक यानी 3.03 प्रतिशत उछलकर 53,356.12 पर पहुंचा।
  • S&P 500: 1.58 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
  • Nasdaq Composite: 1.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।

डाउ जोंस की यह तेजी 9 अप्रैल 2025 के बाद एक कारोबारी दिन में दर्ज की गई सबसे बड़ी बढ़त बताई गई।

अमेरिकी बाजार में आई इस तेजी से वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। जब दुनिया के बड़े बाजारों में निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान बढ़ता है, तो उभरते बाजारों जैसे भारत में भी विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ने की संभावना रहती है।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी से भी बाजार को मिला सहारा

भारतीय शेयर बाजार में तेजी के पीछे विदेशी निवेशकों की खरीदारी भी एक महत्वपूर्ण वजह बताई जा रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से लगातार खरीदारी होने से बाजार में तरलता और निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों के सकारात्मक संकेतों ने घरेलू शेयरों में खरीदारी को प्रोत्साहित किया। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, तो भारतीय कंपनियों की लागत और मुनाफे से जुड़ी चिंताओं में कमी आ सकती है।

क्या शेयर बाजार में जारी रहेगी तेजी?

गुरुवार को आई शानदार तेजी ने बाजार के माहौल को सकारात्मक जरूर बनाया है, लेकिन निवेशकों के लिए आगे भी कुछ महत्वपूर्ण कारकों पर नजर रखना जरूरी होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका की राजनीतिक और आर्थिक नीतियां, पश्चिम एशिया की स्थिति, विदेशी निवेशकों का रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है और वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार को इसका फायदा मिल सकता है। हालांकि, बाजार में तेजी के बाद मुनाफावसूली की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए निवेशकों को केवल एक दिन की बड़ी तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला लेने से बचना चाहिए। फिलहाल गुरुवार की तेजी ने दलाल स्ट्रीट में उत्साह जरूर बढ़ा दिया है। सेंसेक्स की 1,385 अंकों की छलांग और निफ्टी के 24,300 के पार पहुंचने से निवेशकों को बाजार में बेहतर संभावनाओं की उम्मीद दिखाई देने लगी है।

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