कोलकाता : 23 अप्रैल यानी गुरुवार को पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान होने जा रहा है। चुनावी हिंसा के लिए चर्चित पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कुछ ऐसे फैसले लिए हैं, जो पहले देखे-सुने नहीं गए। बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से जारी आदेश के मुताबिक मतदान से 48 घंटे पहले बाइक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे के बीच बाइक वही चला सकेंगे, जिनके लिए इमरजेंसी वाली स्थिति में कहीं आना-जाना जरूरी है। यह आदेश 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग के दिन भी लागू होगा। गड़बड़ी करने वालों की लिस्ट में विधायकों के नाम भी हैं।
चुनाव के ऐलान के बाद लिए गए थे ये फैसले
@ विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में ताबड़तोड़ ट्रांसफर किए। डीजीपी से थाना इंचार्ज तक बदले गए।
@ 26 फरवरी से ही चुनाव आयोग ने मुफ्त चीजों की जब्ती पर नजर रखना शुरू कर दिया था।
@ फिर हंगामे और धमकी की शिकायतों के देखते हुए बाइक की सवारी पर भी शर्त लगा दी गई।
@ बाइक पर राइडर के पीछे बैठने पर भी मनाही है। बाइक रैली तो पूरी तरह प्रतिबंधित है।
@ अमूमन चुनाव वाले क्षेत्रों में वोटिंग से 48 घंटे पहले ड्राई-डे होता है, मगर बंगाल में यह अवधि भी 96 घंटे हो गई है।
@ वोटों की गिनती वाले दिन यानी 4 मई को चुनावी राज्यों में ड्राई-डे रहेगा।
विधायकों पर भी आयोग की नजर
चुनाव के दौरान खासकर वोटिंग से पहले हर राज्य में चिह्नित बदमाशों को एहतियातन हिरासत में लिया जाता है, मगर पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने अलग-अलग जिलों में गड़बड़ी करने वालों की लिस्ट बनाई है, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हैं। इस लिस्ट में तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा विधायक भी शामिल हैं। चुनाव आयोग का सख्त निर्देश हैं कि अगर विधायक वोटरों को डराते-धमकाते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए। टीएमसी ने बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में इस लिस्ट को चुनौती दी। पार्टी के सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने आयोग के अधिकारों पर सवाल उठाए।