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18 देशों की सरहदें पार कर 14 हजार KM पैदल चले स्विट्जरलैंड के ‘वॉकिंग बाबा’, नैनीताल में सुनाएंगे हिमालय तक पहुंचने की अनोखी कहानी

मंजिल तक पहुंचने के लिए दुनिया अक्सर रास्ते छोटे करती है, लेकिन स्विट्जरलैंड के एक शख्स ने अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए हजारों किलोमीटर का रास्ता पैदल तय किया। 18 देशों की सीमाएं पार कीं, करीब 14 हजार किलोमीटर. . .

नैनीताल : मंजिल तक पहुंचने के लिए दुनिया अक्सर रास्ते छोटे करती है, लेकिन स्विट्जरलैंड के एक शख्स ने अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए हजारों किलोमीटर का रास्ता पैदल तय किया। 18 देशों की सीमाएं पार कीं, करीब 14 हजार किलोमीटर की दूरी अपने कदमों से नापी और आखिरकार पहुंच गए भारतीय हिमालय की गोद में। यह कहानी है स्विट्जरलैंड के बेंजामिन वियात्ते की, जिन्हें दुनिया ‘वॉकिंग बाबा’ और ‘बेन बाबा’ के नाम से जानती है। उनकी यह यात्रा केवल एक देश से दूसरे देश तक पहुंचने का सफर नहीं है, बल्कि अलग-अलग संस्कृतियों, परंपराओं, प्रकृति और आध्यात्मिक जीवन को करीब से समझने की एक अनोखी कोशिश भी है। भगवा वस्त्र पहनने वाले बेन बाबा आज शुक्रवार को नैनीताल पहुंचे हैं। यहां वह अपनी लंबी पैदल यात्रा, भारतीय संस्कृति से जुड़ाव और हिमालय तक पहुंचने के अनुभव लोगों के साथ साझा करेंगे। उनकी कहानी ऐसे समय में सामने आ रही है, जब नैनीताल में साहित्य, कला और पर्यावरण पर केंद्रित हिमालयन इकोज का 11वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है।

जब रास्ता ही बन गया जिंदगी का सबसे बड़ा मकसद

कल्पना कीजिए कि कोई व्यक्ति आरामदायक जिंदगी छोड़कर पैदल ही दुनिया देखने निकल पड़े। न कोई जल्दबाजी, न किसी मंजिल तक पहुंचने की बेचैनी। बस कदम बढ़ाते जाना और रास्ते में मिलने वाले लोगों, संस्कृतियों और प्रकृति को समझते जाना। बेंजामिन वियात्ते की जिंदगी कुछ ऐसी ही कहानी बयां करती है। स्विट्जरलैंड में पेशे से वेब डिजाइनर रहे बेंजामिन ने अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी। आधुनिक और सुविधाजनक जीवनशैली से दूर होकर उन्होंने योग, ध्यान और आध्यात्म की राह चुनी। धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति उनका आकर्षण बढ़ता गया। इसके बाद उन्होंने पैदल विश्व यात्रा को अपने जीवन का उद्देश्य और साधना बना लिया। इस यात्रा में उन्होंने 18 देशों की सीमाएं पार कीं और लगभग 14 हजार किलोमीटर का सफर तय किया। इस दौरान उन्होंने केवल भौगोलिक दूरियां नहीं नापीं, बल्कि अलग-अलग देशों के लोगों की जीवनशैली, उनकी मान्यताओं और प्रकृति के साथ उनके संबंधों को भी समझने की कोशिश की।

भगवा वस्त्रों में दिखते हैं बेन बाबा, योग और सनातन से जुड़ा है गहरा लगाव

बेंजामिन वियात्ते को लोग प्यार से ‘बेन बाबा’ कहते हैं। वहीं, हजारों किलोमीटर की पैदल यात्रा के कारण उनकी पहचान ‘वॉकिंग बाबा’ के रूप में बन गई है। भगवा वस्त्र धारण करने वाले बेन बाबा भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और आध्यात्मिक परंपराओं से काफी प्रभावित हैं। उनका मानना है कि भारतीय सभ्यता और यहां की आध्यात्मिक विरासत में दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है। योग, ध्यान, वेद और पुराणों के प्रति उनकी विशेष रुचि है। उनके लिए भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभवों और जीवन को समझने का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। उनकी यात्रा इस बात का भी उदाहरण है कि किसी संस्कृति को समझने के लिए केवल किताबें पढ़ना या पर्यटन स्थलों पर जाना पर्याप्त नहीं होता। कभी-कभी उस संस्कृति के लोगों के बीच रहना और उनके साथ रास्ते साझा करना भी जरूरी होता है।

नैनीताल में आज से सजेगा हिमालयन इकोज, छह देशों के प्रतिभागी होंगे शामिल

बेन बाबा की कहानी इस बार नैनीताल में आयोजित होने वाले हिमालयन इकोज उत्सव का खास आकर्षण बनने जा रही है। 30 और 31 अक्टूबर को नैनीताल के एबॉट्सफोर्ड एस्टेट में हिमालयन इकोज का 11वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। साहित्य, कला, संस्कृति और पर्यावरण को केंद्र में रखकर होने वाले इस आयोजन में भारत समेत छह देशों के प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। इस मंच पर लेखक, कलाकार, पर्यावरणविद्, इतिहासकार और विचारक हिमालय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। आयोजन का उद्देश्य हिमालय को केवल पहाड़ों और पर्यटन के नजरिए से देखना नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संपदा, स्थानीय समुदायों और पर्यावरणीय चुनौतियों को भी समझना है।

रूस से फ्रांस तक के कलाकार साझा करेंगे हिमालय की कहानियां

इस बार हिमालयन इकोज में अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की मौजूदगी विशेष आकर्षण होगी। रूस के व्लादिमीर जैतसेव हिमालय के चित्रकारों और उनकी कला पर चर्चा करेंगे। वहीं, फ्रांसीसी कलाकार और खगोल वैज्ञानिक प्रियंका राजकाकती कवि सुदीप सेन के साथ संवाद करेंगी। इन सत्रों के जरिए हिमालय की कला, साहित्य और प्राकृतिक विरासत को एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से समझने की कोशिश की जाएगी। भारत, नेपाल, भूटान, स्विट्जरलैंड, रूस और फ्रांस के प्रतिभागियों की भागीदारी इस आयोजन को वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान देगी।

अमीश त्रिपाठी से लेकर पीपल बाबा तक, कई चर्चित चेहरे होंगे शामिल

हिमालयन इकोज के इस संस्करण में साहित्य और पर्यावरण जगत की कई जानी-मानी हस्तियां भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी। ‘द इम्मॉर्टल्स ऑफ मेलुहा’, ‘द सीक्रेट ऑफ नागाज’ और ‘द ओथ ऑफ द वायुपुत्राज’ जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक अमीश त्रिपाठी भी इस आयोजन का हिस्सा होंगे। इसके अलावा बाल साहित्यकार पारो आनंद, खाद्य इतिहासकार रुशीना मुनशॉ घिल्डियाल और पर्यावरणविद् पीपल बाबा अलग-अलग विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। लेखिका मृदुला रमेश के ‘नेचर वे’ सत्र में प्रकृति, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। इस तरह यह उत्सव साहित्यिक अभिव्यक्ति से आगे बढ़कर प्रकृति और समाज के बीच संबंधों को समझने का मंच भी बनेगा।

हिमालय की खूबसूरती के पीछे छिपी हैं कई गंभीर चुनौतियां

हिमालय को दुनिया की सबसे खूबसूरत पर्वत श्रृंखलाओं में गिना जाता है। बर्फ से ढकी चोटियां, घने जंगल, नदियां और जैव विविधता इस क्षेत्र को खास बनाते हैं। लेकिन हिमालय की पहचान केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। यहां रहने वाले स्थानीय समुदायों की आजीविका, पारंपरिक ज्ञान, सांस्कृतिक विरासत और नाजुक पारिस्थितिकी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित पर्यटन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव और पर्वतीय क्षेत्रों में बदलती जीवनशैली कई नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। हिमालयन इकोज के विभिन्न सत्रों में इन विषयों पर साहित्य, कला और पर्यावरण के नजरिए से चर्चा होगी। कोशिश होगी कि केवल समस्याओं पर बात न हो, बल्कि उनके समाधान और संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी पर भी विचार किया जाए।

आयोजक जाह्नवी प्रसाद ने बताया आयोजन का उद्देश्य

हिमालयन इकोज की आयोजक जाह्नवी प्रसाद के अनुसार, यह आयोजन अपने दूसरे दशक में प्रवेश करते हुए दुनिया के अन्य पर्वतीय देशों के साथ संवाद को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पर्वतों को समझने के लिए केवल उन्हें दूर से निहारना पर्याप्त नहीं है। उनकी प्रकृति, संस्कृति और वहां रहने वाले लोगों के जीवन से जुड़ना भी जरूरी है। जाह्नवी प्रसाद के मुताबिक, 30 और 31 अक्टूबर को आयोजित होने वाला यह उत्सव इसी जुड़ाव, संवाद और पर्यावरण संरक्षण की भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

14 हजार KM की यात्रा से क्या संदेश देते हैं वॉकिंग बाबा?

बेन बाबा की कहानी केवल एक विदेशी यात्री की असाधारण यात्रा नहीं है। यह उस सोच को सामने लाती है, जिसमें दुनिया को देखने के लिए तेज रफ्तार के बजाय धैर्य, जिज्ञासा और अनुभवों को महत्व दिया जाता है। 18 देशों से गुजरकर भारतीय हिमालय तक पहुंचने वाले बेंजामिन वियात्ते ने अपने कदमों से एक ऐसी यात्रा तय की है, जिसमें हर रास्ता एक नया अनुभव और हर संस्कृति एक नई सीख बन गई। अब नैनीताल में लोग उनकी जुबानी सुन सकेंगे कि आखिर स्विट्जरलैंड से शुरू हुआ यह सफर भारतीय हिमालय तक कैसे पहुंचा? किन अनुभवों ने उनकी जिंदगी बदली और भारतीय संस्कृति तथा आध्यात्म ने उन्हें किस तरह प्रभावित किया? हिमालयन इकोज के मंच पर ‘वॉकिंग बाबा’ की मौजूदगी इस बार के आयोजन को खास बना रही है। उनकी 14 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा की कहानी निश्चित रूप से उन लोगों को भी प्रेरित करेगी, जो जिंदगी को एक अलग नजरिए से देखना चाहते हैं। कभी-कभी मंजिल तक पहुंचने से ज्यादा खूबसूरत उस रास्ते की कहानी होती है, जिसे तय करने में पूरी जिंदगी बदल जाती है। बेन बाबा की यात्रा इसी बात की एक अनोखी मिसाल है।

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