डेस्क : दीपावली का त्योहार हिंदू धर्म के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। इस दिन धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी तथा प्रथम पूजनीय भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि दिवाली की अमावस्या की शाम प्रदोष काल में विधि-विधान से लक्ष्मी-गणेश पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। साल 2026 में दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। दिवाली पर घरों के साथ-साथ दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और ऑफिस में भी लक्ष्मी पूजन किया जाता है। इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। अगर आप भी इस दिवाली कम समय में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करना चाहते हैं, तो यहां जानिए 10 मिनट में पूजा करने की सरल विधि, शुभ मुहूर्त, आवश्यक सामग्री, मंत्र और आरती की पूरी जानकारी।
Diwali 2026: लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस दिन प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है।
वर्ष 2026 में लक्ष्मी पूजन के लिए बताए गए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
लक्ष्मी पूजा के प्रमुख शुभ मुहूर्त
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| लक्ष्मी पूजा मुहूर्त | शाम 5:54 से 7:50 बजे तक |
| प्रदोष काल | शाम 5:31 से रात 8:09 बजे तक |
| वृषभ काल | शाम 5:54 से 7:50 बजे तक |
| निशिथ काल | रात 11:39 से 12:31 बजे तक |
| सिंह लग्न | रात 12:25 से 2:42 बजे तक |
दिवाली के अन्य शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 बजे तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:54 से 2:37 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:31 से 5:57 बजे तक।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गृहस्थ परिवारों के लिए प्रदोष काल में वृषभ लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजन करना विशेष फलदायी माना जाता है। वहीं, निशिथ काल का समय विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों और महानिशा पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
दिवाली 2026 में अमावस्या तिथि कब से कब तक रहेगी?
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे।
- अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर 2026, दोपहर 12:31 बजे।
ध्यान दें: पूजा मुहूर्त और पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि जरूर करें।
घर, दुकान और ऑफिस में कब करें लक्ष्मी पूजा?
दिवाली पर केवल घर ही नहीं, बल्कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कार्यालयों में भी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
- घर में पूजा: गृहस्थ परिवार शाम 5:54 से 7:50 बजे के बीच दिए गए मुख्य लक्ष्मी पूजा मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं।
- दुकान और व्यापारिक प्रतिष्ठान: व्यापारी अपने प्रतिष्ठान में शुभ लक्ष्मी पूजा मुहूर्त के दौरान बही-खाते, तिजोरी और धन की पूजा कर सकते हैं।
- ऑफिस में पूजा: कार्यालयों में भी इसी शुभ अवधि में गणेश-लक्ष्मी पूजन और कुबेर पूजन किया जा सकता है।
प्रदोष काल में पूजा करते समय स्वच्छता, श्रद्धा और पारंपरिक विधि का विशेष ध्यान रखें।
दिवाली लक्ष्मी पूजा के लिए जरूरी सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री एक जगह इकट्ठा कर लें, ताकि पूजा के दौरान किसी चीज की कमी न हो।
1. पूजा स्थल की तैयारी
- लकड़ी की चौकी
- लाल या पीला कपड़ा
- मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां
- पूजा के लिए आसन
2. कलश स्थापना की सामग्री
- तांबे या पीतल का कलश
- स्वच्छ जल और गंगाजल
- आम के पत्ते
- साबुत नारियल
- सुपारी और सिक्का
- मौली या कलावा
3. पूजन सामग्री
- रोली, कुमकुम और हल्दी
- चंदन और अक्षत
- फूल और फूलों की माला
- कमल या गुलाब के फूल
- दूर्वा घास
- पान और सुपारी
- जनेऊ और सिंदूर
4. दीपक और आरती की सामग्री
- मिट्टी के दीपक
- शुद्ध देसी घी
- सरसों या तिल का तेल
- रुई की बत्ती
- धूप और अगरबत्ती
- कपूर और थाली
5. भोग और प्रसाद
- पंचामृत
- खील और बताशे
- मिठाई और खीर
- मौसमी फल
- नारियल
- इलायची और लौंग
6. धन और कुबेर पूजन सामग्री
- सोने-चांदी के सिक्के
- रुपये और नोट
- कौड़ियां
- कमलगट्टे
- गोमती चक्र
- कुबेर जी का चित्र या यंत्र
दिवाली पर 10 मिनट में करें मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा
अगर आपके पास समय कम है, तो भी श्रद्धा और सरल विधि से मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश का पूजन किया जा सकता है। इसके लिए पहले से सभी सामग्री तैयार रखें।
पहला चरण: पूजा स्थल तैयार करें
सबसे पहले घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में साफ जगह चुनें। वहां लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। परंपरा के अनुसार गणेश जी को लक्ष्मी जी के दाईं ओर रखें, अर्थात पूजा करने वाले की दृष्टि से लक्ष्मी जी बाईं ओर और गणेश जी दाईं ओर होंगे। इसके बाद पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
दूसरा चरण: कलश स्थापना करें
चौकी के पास तांबे या पीतल का कलश रखें। उसमें स्वच्छ जल और थोड़ा गंगाजल डालें। परंपरा के अनुसार कलश में सुपारी, अक्षत और एक सिक्का डालें। इसके मुख पर आम के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल स्थापित करें। कलश को शुभता, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
तीसरा चरण: आचमन और पूजा का संकल्प लें
हाथ में थोड़ा जल लेकर आचमन करें और पूजा सामग्री पर भी जल छिड़कें। इसके बाद हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लेकर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए पूजा का संकल्प लें।
इस दौरान निम्न मंत्र का स्मरण कर सकते हैं:
मंत्र:
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
चौथा चरण: सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसलिए दिवाली पर भी सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें।
उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें। इसके बाद मोदक या मिठाई का भोग लगाएं।
गणेश मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः॥
पांचवां चरण: मां लक्ष्मी का पूजन करें
भगवान गणेश की पूजा के बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करें। उन्हें कुमकुम, रोली, चंदन, अक्षत और लाल फूल अर्पित करें। संभव हो तो कमल का फूल चढ़ाएं। इसके बाद मां लक्ष्मी को खील, बताशे, मिठाई, फल और पंचामृत का भोग लगाएं। पूजा के दौरान मां लक्ष्मी से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करें।
मां लक्ष्मी का मंत्र:
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
छठा चरण: कुबेर जी और धन की पूजा करें
दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ धन के देवता भगवान कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दौरान तिजोरी, बही-खाते, सोने-चांदी के सिक्के, रुपये, कौड़ियां और कमलगट्टे पूजा स्थल पर रखें। इन सभी पर रोली और अक्षत लगाकर भगवान कुबेर का ध्यान करें।
कुबेर मंत्र:
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये।
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
सातवां चरण: दीप प्रज्वलित करके आरती करें
पूजा के अंत में शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद पहले भगवान गणेश और फिर मां लक्ष्मी की आरती करें। कपूर से आरती करना भी शुभ माना जाता है। आरती के बाद हाथ जोड़कर जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।
आठवां चरण: पूरे घर में दीपक जलाएं
लक्ष्मी पूजन पूरा होने के बाद घर के मुख्य द्वार, आंगन, बालकनी, पूजा स्थल और तुलसी के पास दीपक जलाएं। परंपरा के अनुसार घर के अलग-अलग हिस्सों को दीपों से रोशन किया जाता है। इस तरह श्रद्धा और सरल विधि से लगभग 10 मिनट में मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजन पूरा किया जा सकता है। विस्तृत षोडशोपचार पूजा में इससे अधिक समय लग सकता है।
दिवाली पर मां लक्ष्मी की आरती
पूजा के अंत में मां लक्ष्मी की आरती करने की परंपरा है। श्रद्धालु प्रचलित महालक्ष्मी आरती गाकर माता से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता॥
तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
महालक्ष्मी जी की आरती के बाद भगवान गणेश जी की आरती भी करें।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का क्या है धार्मिक महत्व?
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की अमावस्या की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन, वैभव और समृद्धि आती है। भगवान गणेश की आराधना से कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने और शुभ शुरुआत की प्रार्थना की जाती है। दिवाली पर दीपक जलाने का विशेष महत्व है। दीपक का प्रकाश अज्ञान और नकारात्मकता को दूर करके ज्ञान, आशा और सकारात्मकता का संदेश देता है। व्यापारी वर्ग इस दिन अपने पुराने बही-खातों का पूजन करके नए वित्तीय वर्ष या नए कारोबारी चक्र की शुरुआत की कामना भी करता है।
दिवाली लक्ष्मी पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा स्थल और घर को पहले से साफ-सुथरा रखें।
- गणेश जी की पूजा सबसे पहले करें।
- मां लक्ष्मी को ताजे फूल और स्वच्छ भोग अर्पित करें।
- पूजा के दौरान मन को शांत रखें और श्रद्धापूर्वक मंत्रों का जाप करें।
- आरती के बाद परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद बांटें।
- दीपक जलाते समय उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखें और आग से बचाव का ध्यान रखें।
दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। साल 2026 में 8 नवंबर को मनाए जाने वाले दीपावली पर्व पर गृहस्थ परिवार शाम 5:54 से 7:50 बजे के मुख्य लक्ष्मी पूजा मुहूर्त में पूजन कर सकते हैं। पूजा के लिए पहले से सामग्री जुटाकर गणेश पूजन, लक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, मंत्र जाप और आरती की सरल विधि अपनाई जा सकती है। श्रद्धा, स्वच्छता और सकारात्मक भाव के साथ की गई पूजा ही इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है।