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अमेरिकी संसद से पास हुआ रूस विरोधी बिल : भारत पर लग सकता है 100 प्रतिशत टैरिफ, चीन पर क्या असर पड़ेगा? जानें पूरी बात

नई दिल्ली। हाल ही में अमेरिकी संसद (प्रतिनिधि सभा) ने रूस और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले एक नए और बड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया. . .

नई दिल्ली। हाल ही में अमेरिकी संसद (प्रतिनिधि सभा) ने रूस और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले एक नए और बड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा। इस बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। 262 सांसदों ने इसके पक्ष में और 159 ने विरोध में मतदान किया। 61 पन्नों वाले इस विधेयक को अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। यह विधेयक पिछले महीने अमेरिकी सीनेट में भी 86-11 वोटों से पारित हो चुका है। इसका नाम लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 रखा गया है। यह नाम जुलाई में अप्रत्याशित रूप से दिवंगत हुए सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में रखा गया है, जो रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के प्रमुख समर्थकों में रहे थे।

बिल का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस नए कानून का मुख्य मकसद रूस की आर्थिक ताकत को कमजोर करना है। रूस अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस बेचकर कमाता है। अमेरिका का मानना है कि इसी कमाई से रूस, यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को फंड कर रहा है। इसलिए, जो देश रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, उन पर दबाव बनाने के लिए इस बिल में कड़े प्रावधान किए गए हैं।

भारत और चीन का नाम क्यों आ रहा है?

भारत और चीन दुनिया के उन बड़े देशों में शामिल हैं जो रूस से भारी मात्रा में ऊर्जा (तेल और गैस) खरीदते हैं। इसी वजह से यह चर्चा है कि इस नए कानून का असर इन दोनों देशों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, यह समझना बहुत जरूरी है कि अभी भारत पर 100% टैरिफ (शुल्क) नहीं लगाया गया है। यह बिल केवल अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वे चाहें तो रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों के सामान पर 100% तक का शुल्क लगा सकते हैं।

इस कानून की 5 अहम बातें

  1. राष्ट्रपति को अधिकार: इस बिल के कानून बनने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के पास यह शक्ति आ जाएगी कि वे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक का शुल्क लगा सकें।
  2. छूट का प्रावधान: जो देश रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं, उनके लिए इस कानून में छूट मिलने की भी गुंजाइश रखी गई है।
  3. अन्य प्रतिबंध: इस विधेयक में रूस के बड़े सरकारी अधिकारियों, अमीर कारोबारियों (अरबपतियों) और वहां के वित्तीय संस्थानों (बैंकों) को भी निशाना बनाया गया है।
  4. ईरान पर भी शिकंजा: राष्ट्रपति ट्रंप के अनुरोध पर इसमें ईरान के हथियार और ऊर्जा क्षेत्रों को मिलने वाली फंडिंग को रोकने के कड़े नियम भी जोड़े गए हैं।
  5. राजनीतिक प्रतिक्रिया: अमेरिकी संसद में कुछ नेताओं ने चिंता जताई कि इससे राष्ट्रपति को बहुत ज्यादा अधिकार मिल जाएंगे, लेकिन इसके बावजूद बहुमत के साथ यह बिल पास हो गया।

मेरिकी संसद का रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का एक बड़ा कदम

संक्षेप में कहें तो, यह अमेरिकी संसद का रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का एक बड़ा कदम है। भारत और चीन जैसे देशों का नाम इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि वे रूस से ऊर्जा खरीदते हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भारत पर तुरंत कोई टैक्स या जुर्माना लग गया है। यह सिर्फ राष्ट्रपति को भविष्य के लिए एक अधिकार देता है, और इसमें उन देशों के लिए राहत के रास्ते भी छोड़े गए हैं जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विकल्प तलाश रहे हैं।

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