नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आज का दिन राजनीतिक हलचल और बड़े आयोजनों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाला है। आज दिल्ली में एक ही समय पर दो बड़े सियासी और वैचारिक आयोजन होने जा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय राजधानी की सियासत गर्मा गई है। एक तरफ जहां ‘सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी’ (Citizens for Democracy) संगठन की ओर से लोकतंत्र को बचाने के लिए संसद की तर्ज पर एक ‘मॉक पार्लियामेंट’ (प्रतीकात्मक संसद) का आयोजन किया जा रहा है; वहीं दूसरी तरफ विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रियाओं में खामियों के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर रहा है।
1. ‘सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी’ का मॉक पार्लियामेंट: क्या है कार्यक्रम और एजेंडा?
‘सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी’ संगठन की ओर से यह मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम राजधानी के NDMC कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत सुबह 10:30 बजे से हुई। इस पूरे आयोजन का मुख्य विषय ‘लोकतंत्र बनाम अराजकता’ रखा गया है।
चर्चा के प्रमुख बिंदु:
संस्था के मुताबिक, इस प्रतीकात्मक संसद सत्र में देश और संसद से जुड़े कई गंभीर व प्रासंगिक विषयों पर खुली चर्चा की जा रही है, जिनमें प्रमुख हैं:
- हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और संसदीय मर्यादाओं को बनाए रखना।
- लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, स्वायत्तता और उनकी विश्वसनीयता।
- राजनीतिक जवाबदेही तय करने के उपाय।
- SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण/प्रक्रिया), EVM (ईवीएम) की कार्यप्रणाली और चुनाव आयोग की भूमिका।
- वोट चोरी के आरोप, लोकतांत्रिक असहमति और अराजकता के बीच का मूलभूत अंतर।
बीजेपी ने क्यों बनाई दूरी?
यद्यपि आयोजकों का दावा है कि इस कार्यक्रम को किसी भी प्रत्यक्ष राजनीतिक एजेंडे से पूरी तरह दूर रखा गया है, फिर भी इसकी थीम और कार्यक्रमों की रूपरेखा काफी हद तक सत्तारूढ़ दल के रुख से मेल खाती है। यही वजह है कि आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस कार्यक्रम से अपनी दूरी बना रखी है।
2. विपक्षी ‘इंडिया’ अलायंस का ‘जन महाभियोग’: क्या-क्या होगा खास?
दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया के खिलाफ पहले जिसे ‘मॉक पार्लियामेंट’ के रूप में प्रस्तुत कर रहा था, उसे अब ‘जन महाभियोग’ के रूप में आयोजित कर रहा है।
- समय और संचालन: यह कार्यक्रम दोपहर 3:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक चलेगा और इसका समापन राष्ट्रगान के साथ होगा। कार्यक्रम का संचालन लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार करेंगी, जिनकी सहायता के लिए समाजवादी पार्टी के एक सांसद भी मौजूद रहेंगे।
- वक्ता और समय-सीमा: इस मंच पर ‘इंडिया’ गठबंधन के 19 दलों के नेताओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। ज्यादातर नेताओं को 5-5 मिनट का समय मिलेगा, जबकि प्रमुख दलों के रूप में समाजवादी पार्टी (SP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रतिनिधियों को 10-10 मिनट का समय आवंटित किया गया है।
- खास मेहमान: इस आयोजन में उन आम नागरिकों और पीड़ितों को भी मंच पर बुलाने की योजना है जिनके नाम हालिया वोटर लिस्ट से कथित तौर पर काट दिए गए हैं।
- विपक्ष का स्पष्ट मानना है कि यह केवल एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जनता की चिंताओं को राष्ट्रीय स्तर पर मुखर करने का एक गंभीर मंच है।
3. बीजेपी की काट: ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा
विपक्ष द्वारा 1 नवंबर को दिल्ली के रामलिला मैदान में एक विशाल रैली करने की तैयारियों के जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने भी एक बड़ा राजनीतिक दांव चला है। बीजेपी ने इसके तोड़ के रूप में देश के कई शहरों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा की शुरुआत की है।
- इस यात्रा की कमान खुद पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने हाथों में संभाली है।
- इस अभियान की शुरुआत 28 अक्टूबर को दिल्ली के ऐतिहासिक चांदनी चौक क्षेत्र से की गई थी। इसके अलावा बिहार, गुजरात और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में भी इस पदयात्रा को निकाला जा रहा है।
- राजनीतिक निहितार्थ: बीजेपी की इस कवायद का मुख्य उद्देश्य विपक्ष के उन दावों की हवा निकालना है, जिसके तहत विपक्षी दल अपनी चुनावी हार के लिए बार-बार चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराते हैं और धरना-प्रदर्शन के नाम पर राजनीतिक अस्थिरता या अराजकता का माहौल पैदा करते हैं।
राजधानी में एक ही दिन हो रहे इन बड़े आयोजनों से साफ है कि आने वाले दिनों में संसद के बाहर राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक और रणनीतिक टकराव और अधिक तेज होने वाला है।