Home » देश » दिल्ली में प्रदूषण का कहर: जहरीली हवा से लोगों की बढ़ी परेशानी, पंजाबी बाग में AQI 446 और नरेला में 434

दिल्ली में प्रदूषण का कहर: जहरीली हवा से लोगों की बढ़ी परेशानी, पंजाबी बाग में AQI 446 और नरेला में 434

देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। शहर की हवा इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों के लिए सामान्य रूप से सांस लेना भी मुश्किल होता जा रहा है। गुरुवार. . .

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। शहर की हवा इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों के लिए सामान्य रूप से सांस लेना भी मुश्किल होता जा रहा है। गुरुवार सुबह दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 8:01 बजे दिल्ली का समग्र AQI 482 तक पहुंच गया। यह स्तर वायु गुणवत्ता की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। राजधानी के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का प्रभाव साफ तौर पर देखने को मिला। कई निगरानी केंद्रों पर AQI 400 के पार दर्ज किया गया। इससे दिल्लीवासियों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति अधिक चिंताजनक मानी जा रही है।

पंजाबी बाग में सबसे ज्यादा प्रदूषण, सात इलाकों में AQI 400 के पार

दिल्ली के विभिन्न मॉनिटरिंग स्टेशनों से मिले आंकड़ों के अनुसार, पंजाबी बाग सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 446 दर्ज किया गया। वहीं नरेला में AQI 434 और रोहिणी में 431 तक पहुंच गया। इसके अलावा राजधानी के कई अन्य इलाकों में भी हवा की स्थिति बेहद खराब रही।

प्रमुख क्षेत्रों का AQI इस प्रकार दर्ज किया गया:

  • पंजाबी बाग – 446
  • नरेला – 434
  • रोहिणी – 431
  • आरके पुरम – 416
  • बवाना – 412
  • नॉर्थ कैंपस, दिल्ली विश्वविद्यालय – 408
  • पटपड़गंज – 405

इन सभी क्षेत्रों में AQI 400 से ऊपर रहा, जो गंभीर श्रेणी में आता है। इस स्तर का प्रदूषण आम लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

इंडिया गेट से आईटीओ तक हवा की गुणवत्ता बेहद खराब

दिल्ली के अन्य प्रमुख इलाकों में भी प्रदूषण से राहत नहीं मिली। ओखला फेज-2 और इंडिया गेट में AQI 399 दर्ज किया गया। वहीं आईटीओ में यह आंकड़ा 397 और द्वारका सेक्टर-8 में 396 रहा। चांदनी चौक में वायु गुणवत्ता सूचकांक 356 दर्ज किया गया, जबकि वसुंधरा एन्क्लेव में यह 330 रहा। दूसरी ओर आनंद विहार में AQI 293 और IMD लोधी रोड स्टेशन पर 268 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि इन क्षेत्रों की स्थिति कुछ अन्य इलाकों के मुकाबले बेहतर रही, लेकिन यहां भी हवा की गुणवत्ता स्वास्थ्य के लिहाज से चिंताजनक बनी हुई है।

पराली जलाने की घटनाओं में कमी, फिर भी दिल्ली की हवा क्यों खराब?

दिल्ली में हर साल सर्दियों के मौसम के दौरान प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसम संबंधी परिस्थितियां प्रमुख हैं। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं का असर भी दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता पर पड़ सकता है। सरकार की ओर से दावा किया गया है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है। धान की पराली के प्रबंधन के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद राजधानी में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंचना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

40 प्रतिशत धान की पराली का एक्स-सीटू प्रबंधन से हुआ इस्तेमाल: भूपेन्द्र यादव

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने बताया कि इस बार लगभग 40 प्रतिशत धान की पराली का इस्तेमाल एक्स-सीटू प्रबंधन के माध्यम से किया गया है। एक्स-सीटू प्रबंधन का मतलब है कि फसल अवशेषों को खेत में जलाने के बजाय खेत से बाहर ले जाकर दूसरे उपयोगों में लगाया जाए। इसमें पराली का इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक जरूरतों और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने के लिए किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इस तरह के उपायों से खेतों में पराली जलाने की आवश्यकता कम की जा सकती है और इससे होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है CAQM

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार गंभीर बने रहने के सवाल पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) मौसम से जुड़ी परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि हवा की दिशा, हवा की गति और अन्य मौसमी कारकों का नियमित आकलन किया जा रहा है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। दरअसल, सर्दियों के दौरान हवा की गति कम होने और वातावरण में नमी बढ़ने से प्रदूषक कण लंबे समय तक हवा में बने रह सकते हैं। ऐसे हालात में वाहनों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषक जमीन के नजदीक जमा होने लगते हैं, जिससे AQI में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।

गंभीर AQI का सेहत पर क्या पड़ सकता है असर?

जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से ऊपर पहुंच जाता है, तो इसे गंभीर श्रेणी माना जाता है। ऐसी स्थिति में प्रदूषित हवा का असर स्वस्थ लोगों पर भी पड़ सकता है। वहीं पहले से बीमार लोगों की परेशानियां बढ़ने का खतरा अधिक रहता है। इस दौरान लोगों को खांसी, गले में जलन, आंखों में पानी, सांस लेने में परेशानी और सीने में भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के मुताबिक, प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक होने पर अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारी वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। बाहर निकलना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करना और घर के अंदर प्रदूषण कम रखने के उपाय करना उपयोगी हो सकता है।

दिल्ली के सामने प्रदूषण नियंत्रण की बड़ी चुनौती

दिल्ली में प्रदूषण की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पराली प्रबंधन और सरकारी प्रयासों के बावजूद राजधानी को जहरीली हवा से राहत क्यों नहीं मिल पा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, वायु प्रदूषण किसी एक कारण से पैदा होने वाली समस्या नहीं है। इसके समाधान के लिए वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, निर्माण स्थलों की धूल, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा जलाने और पड़ोसी राज्यों से आने वाले प्रदूषण पर एक साथ काम करना जरूरी है। फिलहाल दिल्लीवासियों को साफ हवा के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में मौसम की परिस्थितियां और प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जाने वाले कदम यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि राजधानी की हवा में कितनी जल्दी सुधार हो पाता है।

Web Stories
 
इन लोगों को नहीं खाना चाहिए मोरिंगा शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए खाएं ये वेजेटेरियन फूड्स हल्दी का पानी पीने से दूर रहती हैं ये परेशानियां सकट चौथ व्रत पर भूल से भी न करें ये गलतियां बुध के गोचर से इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम