कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर एक नया और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। राज्य के महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी लाभार्थी एक साथ ‘अन्नपूर्णा योजना’ और ‘विधवा पेंशन’ दोनों का लाभ नहीं उठा सकता है। जिन महिलाओं को दोनों योजनाओं का पैसा मिल रहा है, उन्हें अब इनमें से किसी एक को चुनना होगा। इसके लिए राज्य प्रशासन ने 29 सितंबर 2026 तक की समयसीमा तय की है।
किस योजना में कितनी मिलती है वित्तीय सहायता?
वर्तमान नियमों के अनुसार दोनों योजनाओं में मिलने वाली राशि इस प्रकार है:
- अन्नपूर्णा योजना: इसके तहत पात्र महिलाओं (25 से 60 वर्ष) को हर महीने ₹3,000 की आर्थिक मदद सीधे आधार-संबद्ध बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के जरिए भेजी जाती है।
- विधवा पेंशन योजना: इस योजना के तहत लाभार्थियों को प्रति माह ₹1,500 मिलते हैं।
अब सरकार के नए फरमान के बाद, दोनों का लाभ ले रही महिलाओं को लिखित रूप में यह बताना होगा कि वे किस योजना को जारी रखना चाहती हैं।
प्रशासनिक प्रक्रिया और समर्थ पोर्टल पर अपडेट
- स्थानीय संपर्क: कोलकाता नगर निगम (KMC) के कमिश्नर और सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसी सूची तैयार करें जो दोनों योजनाओं का लाभ ले रही हैं।
- लिखित सहमति: प्रशासन इन लाभार्थियों से संपर्क कर निर्धारित प्रारूप में उनकी लिखित सहमति लेगा कि वे कौन सी योजना छोड़ना और कौन सी रखना चाहती हैं।
- पोर्टल पर अपडेशन: सभी चयनित विकल्पों की जानकारी पश्चिम बंगाल सरकार के एकीकृत प्लेटफॉर्म ‘समर्थ पोर्टल’ (Samarth Portal) पर 29 सितंबर तक अनिवार्य रूप से अपडेट करनी होगी।
सरकार का उद्देश्य: दोहरा लाभ रोकना और पारदर्शिता लाना
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य सरकारी खजाने से दिए जाने वाले लाभों में दोहरेपन को रोकना है, ताकि पात्रता के नियमों का सख्ती से पालन हो सके। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्नपूर्णा योजना का लाभ कुछ अन्य योजनाओं (जैसे दिव्यांग पेंशन या कृषक बंधु) के साथ लिया जा सकता है, लेकिन विधवा पेंशन के साथ इसका दोहरा लाभ मिलना मान्य नहीं होगा। प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया है कि विकल्प चुनने की इस प्रक्रिया में आम नागरिकों या बुजुर्ग महिलाओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।