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शुभेंदु अधिकारी ने एनएच के 7 हिस्से और चिकन नेक की 120 एकड़ जमीन केंद्र को दिया, जाने कारण ?

डेस्क। बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर हाईवे के 7 हिस्से और 120 एकड़ जमीन केंद्र के हवाले कर दी हैकोलकाता : पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालने ही शुभेंदु अधिकारी फुल फॉर्म में हैं। दो कैबिनेट मीटिंग में ही. . .

डेस्क। बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर हाईवे के 7 हिस्से और 120 एकड़ जमीन केंद्र के हवाले कर दी है
कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालने ही शुभेंदु अधिकारी फुल फॉर्म में हैं। दो कैबिनेट मीटिंग में ही नमाज, अतिक्रमण, पुलिस सिस्टम में सुधार, पशु वध समेत कई मुद्दों पर शुभेंदु सरकार फैसले ले चुकी है। उन्होंने केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना को बंगाल में लागू करने का भी ऐलान किया है। शुभेंदु अधिकारी ने एक फैसला राष्ट्रीय संदर्भ में किया है। बंगाल सरकार ने सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी नॉर्थ-ईस्ट के चिकन नेक की 120 एकड़ जमीन और एनएच-10 और एनएच-110 के सात हिस्सों को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और NHIDCL को सौंपने की मंजूरी दे दी। यह प्रस्ताव पिछली ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार के पास एक साल से लंबित था, जिसे शुभेंदु सरकार ने शपथ लेने के 10 दिनों के भीतर क्लियर कर दिया।

चिकन नेक के बारे में जानिए

केंद्र सरकार को दिए नेशनल हाईवे के सात हिस्सों में से पांच चिकन नेक से होकर गुजरते हैं।
60 किलोमीटर लंबा इलाके का सबसे संकरे हिस्से में सिर्फ 20-22 किलोमीटर चौड़ा है।
इसके बॉर्डर तीन देशों नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से जुड़ते हैं।
सिलिगुड़ी कॉरिडोर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि चिकन नेक कॉरिडोर में किसी तरह की रुकावट आई तो नॉर्थ-ईस्ट के 8 राज्यों का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से कट सकता है।
इस कॉरिडोर के एक छोर पर सिक्किम है, जिससे चीन की सीमा जुड़ती है। नॉर्थ-ईस्ट में डिफेंस के साजो-सामान पहुंचाने, बिजनेस, टूरिजम के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है।

डोकलाम के बाद ही केंद्र सरकार थी अलर्ट

2017 में चीन के साथ डोकलाम गतिरोध के बाद भारत सरकार ने देश की सीमाओं पर इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने में तेजी दिखाई। एक्सपर्टस ने चिकन नेक की सुरक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्टर बढ़ाने पर जोर दिया। मॉनसून के दौरान एनएच-10 पर लैंडस्लाइडिंग, ट्रैफिक जाम और जमीन धंसने की समस्या होती हैं। इन हालातों में सिक्किम में सप्लाई रुक जाती है और पूरा राज्य संवेदनशील जोन में पहुंच जाता है। अगस्त 2024 में जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार को अपदस्थ किया गया, तब भारत की चिंता और बढ़ गई। डॉ. मुहम्मद यूनुस के चिकन नेक को लेकर दिए गए बयानों से केंद्र सरकार अलर्ट मोड में चली गई।

चीन-बांग्लादेश गठजोड़ से बढ़ी चुनौती

2025 में विदेश मंत्रालय की स्थायी समिति की ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि चीन पड़ोसी देश बांग्लादेश में लालमोनिरहाट एयरबेस पर हवाई प‌ट्टी बना रहा है। कई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सीमा के पास बनने वाले एयरफील्ड को विकसित करने में पाकिस्तान भी बांग्लादेश की मदद कर रहा है। लालमोनिरहाट एयरबेस भारत के पश्चिम बंगाल और मेघालय से मात्र 12 से 15 किलोमीटर की दूरी पर है। सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी भारत का चिकन नेक इसे 135 किमी के दायरे में आता है। बाद में बांग्लादेश की सफाई आई कि लालमोनिरहाट एयरबेस का उपयोग सैन्य गतिविधियों के लिए नहीं होगा। एक्सपर्ट मानते हैं कि बांग्लादेश की नई सरकार भी चीन और पाकिस्तान के साथ सामरिक चुनौती पेश कर रहा है।

बीजेपी-टीएमसी में खिंची रहीं तलवारें

बंगाल के राजनीतिक मोर्चे पर चिकन कॉरिडोर को लेकर तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच तलवारें खिंची रहीं। बीजेपी हमेशा ममता बनर्जी सरकार पर घुसपैठियों को शह देकर उत्तर बंगाल की डेमोग्राफी बदलने का आरोप लगाती रही। चुनावों में भी बीजेपी ने सिलिगुड़ी कॉरिडर की सुरक्षा को घुसपैठियों के मुद्दे से जोड़ा। ममता बनर्जी लगातार यह कहती रहीं कि बॉर्डर पर सुरक्षा केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, वहीं बीजेपी ने दावा किया कि बंगाल में डबल इंजन सरकार ही चिकन नेक को सुरक्षित रख सकती है। पश्चिम बंगाल में भारी जीत के बाद बीजेपी सरकार ने शुरुआती फैसले में बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए 45 दिनों के भीतर जमीन देने का आदेश जारी किया। फिर नॉर्थ-ईस्ट के चिकन नेक की 120 एकड़ जमीन और हाइवे के 7 हिस्से एनएचएआई और NHIDCL को सौंपने की सहमति दे दी।

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