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स्कूल को ट्रेन जैसा लुक दिया, बच्चों को काफी पसंद आ रहा स्कूल का नया रूप

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सिलीगुड़ी। शिक्षा के प्रति बच्चों का रुझान बढ़ाने के लिए सरकार ही नहीं अब अब स्कूल प्रबंधन भी अपने स्तर पर नवाचार कर रहे हैं। शिमुलगुड़ी में सीएस प्राइमरी स्कूल में भी ऐसा ही एक नवाचार किया गया है। स्कूल स्टाफ के सहयोग से पूरे स्कूल को ट्रेन का लुक दिया गया। क्लास के गेट पर खड़े होते हैं तो ऐसा लगता है जैसे किसी ट्रेन के गेट पर खड़े हो। ट्रेन का यह लुक बच्चों को काफी पसंद आ रहा है। बच्चों को जब भी पढ़ाई से खाली समय मिलता है तो वे बार-बार क्लास रूम के गेट पर आकर खड़े होते हैं। ऐसा करने से बच्चों को ट्रेन के सफर करने जैसा महसूस होता है।
सिलीगुड़ी । शिक्षा के प्रति बच्चों का रुझान बढ़ाने के लिए सरकार ही नहीं अब अब स्कूल प्रबंधन भी अपने स्तर पर नवाचार कर रहे हैं। शिमुलगुड़ी में सीएस प्राइमरी स्कूल में भी ऐसा ही एक नवाचार किया गया है। स्कूल स्टाफ के सहयोग से पूरे स्कूल को ट्रेन का लुक दिया गया। क्लास के गेट पर खड़े होते हैं तो ऐसा लगता है जैसे किसी ट्रेन के गेट पर खड़े हो। ट्रेन का यह लुक बच्चों को काफी पसंद आ रहा है। बच्चों को जब भी पढ़ाई से खाली समय मिलता है तो वे बार-बार क्लास रूम के गेट पर आकर खड़े होते हैं। ऐसा करने से बच्चों को ट्रेन के सफर करने जैसा महसूस होता है।
हम सब जानते है कि रास्ते में ट्रेन को जाते देख कई बच्चे प्रभावित होते है। यहां तक कि रेलगाड़ी को देख प्रभावित बच्चे गाँव में अपना एक समूह बनाकर रेलगाड़ी का खेल भीखेलते है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि बच्चों का ट्रेनों के प्रति विशेष आकर्षण होता है। इसलिए पढ़ने और खेलने की भावना को जगाने के लिए न केवल पढ़ाई की सीमा के भीतर बल्कि सरकारी प्राथमिक विद्यालय को ट्रेन के डिब्बे के रूप में बदलने के लिए पहल किया गया । एक ओर जहां छात्रों को स्कूल की ओर आकर्षित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक स्कूल की चार दीवारी के जंग लगे रंग को एक अलग आयाम मिल गया है। बताते चले राजगंज प्रखंड के शिमुलगुड़ी में सीएस प्राइमरी स्कूल है, जो सिलीगुड़ी क्षेत्र के पास जंगल से घिरा हुआ है। 2019 में, सर्वसम्मति से स्कूल के टेराकोटा लुक को ट्रेन के कमरे में बदलने का निर्णय लिया गया था। लेकिन दुर्भाग्य से कोरोना के कारण स्कूल दो साल के लिए बंद कर दिया गया। हालांकि देर से ही स्कूल के इस रूप को देखकर छात्र खुश तो हो रहे है , उनको दो साल तक स्कूल न आ पाने का मलाल जरूर है, लेकिन इस साल के अंत में जब स्कूल खुला तो छात्र दौड़ पड़े। लॉकडाउन के कारण घर से स्कूल आने की आदत खो चुके छात्र भी स्कूल में इस बदलाव के बारे में सुनकर स्कूल आने के इच्छुक हो गए। स्कूल के कार्यवाहक
प्रधानाध्यापक निर्मल कांति सरकार ने कहा कि स्कूल के ट्रेन का लुक देने के परिणामस्वरूप, स्कूल के सभी 103 छात्र नियमित रूप से स्कूल आने लगे हैं। जानकारों की मानें तो नए कॉन्सेप्ट में अगर नई शैली को बचपन की पढ़ाई से जोड़ा जा सकता है तो बच्चे पढ़ने की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं।”
स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाध्यापक ने कहा, “मैंने देखा है कि राज्य के कुछ अन्य स्कूलों में ऐसी तस्वीरें हैं। जिसे देखकर यह विचार आया कि यहाँ भी कुछ नया किया जाना चाहिए। उन्होंने कहाँ कि हमाया प्रयास सफल हो रहा है स्कूल के लुक को देख कर विद्यार्थी आकर्षित हो रहे हैं। जिस तरह से एक ट्रेन एक यात्री को उनके गंतव्य तक ले जाती है। स्कूल उसी तरह एक छात्र का भविष्य सुनिश्चित करेगा। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य छात्रों को अधिक स्कूल से अधिक सांख्य में स्कूल आने के लिए प्रेरित करना है।


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