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आम आदमी हो जाये तैयार- पड़ने वाली है महंगाई की भंयकर मार : रोजमर्रा की चीजें होंगी महंगी! खाने-पीने से लेकर सभी चीजों के बढ़ सकते हैं दाम

डेस्क। पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल, गैस और दूसरे ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से भारतीय उद्योगों की लागत तेजी. . .

डेस्क। पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल, गैस और दूसरे ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से भारतीय उद्योगों की लागत तेजी से बढ़ रही है। इसका असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने की आशंका है। स्टील, प्लास्टिक, उर्वरक, रसायन, सिंथेटिक रबर और धातु उद्योगों में उत्पादन महंगा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द टैक्स में राहत और आयात नियंत्रण जैसे कदम नहीं उठाए, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। बढ़ती लागत के कारण कंपनियां धीरे-धीरे उत्पादों के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं।
कच्चे माल और पैकेजिंग लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजें, शैम्पू, साबुन और अन्य पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं। कंपनियां ग्रामेज कट यानी श्रिंकफ्लेशन का तरीका भी अपना सकती हैं।

खाने-पीने से लेकर पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स तक बढ़ सकते हैं दाम

आने वाले दिनों में आम लोगों की जेब पर महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है। खाने-पीने की चीजों से लेकर शैम्पू, साबुन, डिटर्जेंट और अन्य पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स महंगे होने की आशंका जताई जा रही है। सिस्टेमैटिक्स रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे माल और पैकेजिंग लागत में तेज बढ़ोतरी के चलते कंपनियां कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं।

2 महीने में 3% से 7% तक बढ़े दाम

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक-दो महीनों में कई कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम 3% से 7% तक बढ़ा चुकी हैं। कंपनियों की रॉ मटीरियल कॉस्ट में औसतन करीब 10% तक इजाफा हुआ है, जिसका असर अब सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

खाने-पीने की चीजों से बढ़ी महंगाई

देश में रिटेल महंगाई अप्रैल में बढ़कर 3.48% पहुंच गई है, जो मार्च में 3.40% थी। वहीं फूड इन्फ्लेशन भी बढ़कर 4.20% पर पहुंच गया। खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने से घरेलू बजट पर असर साफ दिखाई देने लगा है।

पैकेजिंग मटीरियल 56% तक महंगा

रिपोर्ट के मुताबिक, पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले HDPE प्लास्टिक की कीमतों में 56% तक उछाल आया है। यही प्लास्टिक शैम्पू की बोतलों, डिटर्जेंट कंटेनर और फ्लेक्सिबल पैकेजिंग में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा पश्चिम एशिया तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 32% तक बढ़ गई हैं, जबकि पाम ऑयल के दाम में भी 11% की तेजी आई है।

कंपनियां अपना सकती हैं ‘श्रिंकफ्लेशन’ का तरीका

महंगाई से बचने के लिए कंपनियां सिर्फ कीमतें ही नहीं बढ़ाएंगी, बल्कि पैकेट का वजन कम करने का तरीका भी अपना सकती हैं। इसे ‘श्रिंकफ्लेशन’ या ‘ग्रामेज कट’ कहा जाता है। यानी ग्राहक को पहले जितनी कीमत पर कम मात्रा में सामान मिलेगा, लेकिन पैकेट और कीमत लगभग वही दिखाई देगी।

कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव

कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर कंपनियों के मुनाफे पर भी दिखाई देने लगा है। मार्च तिमाही में कई बड़ी कंपनियों का ग्रॉस मार्जिन घटा है। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में इसका असर और ज्यादा दिखाई दे सकता है।

घट सकती है बाजार में खपत

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की खरीदारी क्षमता प्रभावित हो सकती है। अगर जरूरी सामान लगातार महंगे होते रहे, तो आने वाले महीनों में बाजार में खपत घटने की आशंका भी बढ़ सकती है।

क्या होता है ‘श्रिंकफ्लेशन’?

जब कोई कंपनी किसी प्रोडक्ट की कीमत बिना बढ़ाए उसके अंदर मिलने वाले सामान की मात्रा कम कर देती है, तो उसे ‘श्रिंकफ्लेशन’ कहा जाता है। इसका इस्तेमाल कंपनियां अपने मुनाफे को बचाने के लिए करती हैं ताकि ग्राहक को सीधे कीमत बढ़ने का एहसास न हो।

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