नई दिल्ली: भारत सरकार के महत्वाकांक्षी स्वच्छता अभियान ने इस बार प्रशासकीय गलियारों से लेकर कबाड़खानों तक एक ऐसा आर्थिक और प्रशासनिक उलटफेर कर दिखाया है, जिसने सबको चौंका दिया है। एक महीने तक चले इस देशव्यापी महा-अभियान के दौरान सरकारी कार्यालयों के पुराने कबाड़ और ई-कचरे को ठिकाने लगाकर सरकार ने 970.33 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 16 प्रतिशत अधिक है, जो यह साबित करता है कि अब प्रशासनिक गलियारों में ‘कचरे को कंचन’ बनाने की संस्कृति तेजी से पनप रही है।
‘कचरे से कंचन’: अभियान 6.0 के चौकाने वाले आंकड़े
कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, गत 2 से 31 अक्टूबर तक चला यह विशेष अभियान (Special Campaign 6.0) केवल झाड़ू लगाने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सरकारी कार्यसंस्कृति में एक बड़े बदलाव का गवाह बना है। अभियान के मुख्य आकर्षण इस प्रकार रहे:
- विशाल स्तर पर सफाई: देश के कोने-कोने में कुल 19,88,826 स्थानों को चमकाया गया, जो पिछले वर्ष के आंकड़ों (11.59 लाख) से करीब 71 प्रतिशत अधिक है।
- दफ्तरों में सांस लेने लगी जगह: अभियान के दौरान फाइलें समेटने और कबाड़ हटाने से सरकारी कार्यालयों में 277.82 लाख वर्ग फीट बेशकीमती जगह खाली कराई गई है, जो पिछले साल से 19 प्रतिशत अधिक है।
- ई-कचरे से कमाई: केवल ई-कचरे के वैज्ञानिक निपटान से ही सरकार के खजाने में करीब 50 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।
कमाई की रेस में भारतीय रेलवे ने मारी बाजी
कबाड़ बेचकर सरकारी खजाने को मालामाल करने के मामले में विभिन्न मंत्रालयों ने अपनी सक्रियता दिखाई, लेकिन रेलवे बोर्ड ने इस रेस में सबको पीछे छोड़ दिया।
- रेलवे बोर्ड: कबाड़ बेचकर 618.06 करोड़ रुपये जुटाए और देश में पहले पायदान पर कब्जा जमाया।
- सैन्य मामलों का विभाग (रक्षा मंत्रालय): 88.96 करोड़ रुपये की कमाई के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
- कोयला मंत्रालय: 61.41 करोड़ रुपये जुटाए। इसके साथ ही, कोयला मंत्रालय ने कार्यालयों में सबसे ज्यादा 1.48 करोड़ वर्ग फीट जगह खाली कराकर एक और बड़ा रिकॉर्ड बनाया।
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय: 34.81 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की।
फाइलों के बोझ से मुक्ति और शिकायतों का त्वरित निस्तारण
यह अभियान केवल कबाड़ बेचने तक सीमित नहीं था, बल्कि दशकों से धूल फांक रही फाइलों और आम जनता की समस्याओं के समाधान की दिशा में भी एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ:
- शिकायतों का अंबार साफ: सरकार ने इस अवधि के दौरान कुल 9,99,168 जन शिकायतों का रिकॉर्ड समय में निपटारा किया और 40,878 अपीलों का निस्तारण किया।
- लाखों फाइलों की विदाई: लगभग 26.79 लाख फिजिकल (भौतिक) फाइलों की गहन समीक्षा के बाद 15,76,828 फाइलें हटाई गईं। वहीं, 9.58 लाख ई-फाइलों की समीक्षा कर 7,01,723 बंद की गईं।
- मैदानी स्तर पर भागीदारी: स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने 7.01 लाख से अधिक स्थानों पर अभियान चलाकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश भर के 6.52 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों में इस महा-सफाई को सफल बनाया।
प्रशासनिक विश्लेषकों की नजर में
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान ने न केवल सरकारी महकमों को साफ-सुथरा और कार्यकुशल बनाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे बेहतर प्रबंधन और इच्छाशक्ति से प्रशासनिक मशीनरी राजस्व सृजन का एक अनूठा जरिया बन सकती है। कबाड़ से मिले इन 970 करोड़ रुपयों ने यह साबित कर दिया है कि ‘स्वच्छता’ अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि आर्थिक सुदृढ़ीकरण का एक नया मार्ग बन चुकी है।