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Lust Stories 3 Review: महिलाओं की इच्छाओं से रिश्तों की उलझनों तक, अदिती राव हैदरी ने छोड़ी गहरी छाप, जाने कैसी है ?

नई दिल्ली: प्यार, शादी, अफेयर और इंटीमेसी जैसे विषयों पर बेबाक कहानियां कहने वाली एंथोलॉजी ‘लस्ट स्टोरीज’ एक बार फिर लौट आई है। 2018 में शुरू हुई इस फ्रेंचाइजी ने रिश्तों के उन पहलुओं पर चर्चा छेड़ी थी, जिन्हें अक्सर. . .

नई दिल्ली: प्यार, शादी, अफेयर और इंटीमेसी जैसे विषयों पर बेबाक कहानियां कहने वाली एंथोलॉजी ‘लस्ट स्टोरीज’ एक बार फिर लौट आई है। 2018 में शुरू हुई इस फ्रेंचाइजी ने रिश्तों के उन पहलुओं पर चर्चा छेड़ी थी, जिन्हें अक्सर पर्दे पर खुलकर नहीं दिखाया जाता। 2023 के दूसरे पार्ट के बाद अब ‘लस्ट स्टोरीज 3’ चार नई कहानियों के साथ नेटफ्लिक्स पर दस्तक दे चुकी है। इस बार विक्रमादित्य मोटवाने, किरण राव, शकुन बत्रा और विशाल भारद्वाज ने चार अलग-अलग कहानियों के जरिए महिलाओं की इच्छाओं, रिश्तों, शादी, धोखे, तलाक और रोमांस को अलग-अलग नजरिए से पेश किया है। चारों कहानियां अलग हैं, लेकिन इनके केंद्र में रिश्तों और इंटीमेसी की जटिलताएं हैं।

चार कहानियां, एक सवाल—रिश्तों में इच्छा की जगह कितनी?

‘लस्ट स्टोरीज 3’ की सबसे दिलचस्प बात यह है कि चारों कहानियां अलग समय और अलग सामाजिक परिवेश में दिखाई गई हैं। पहली कहानी शादी और बच्चों के बाद महिलाओं की बदलती इच्छाओं और उन्हें पूरा करने की जद्दोजहद को सामने रखती है। दूसरी कहानी प्यार और रोमांस पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने के बाद मिलने वाले धोखे को दिखाती है। तीसरी कहानी शादीशुदा जिंदगी में बढ़ती दूरी और तलाक की कगार पर पहुंच चुके रिश्ते की कहानी है, जहां इंटीमेसी रिश्ते को जोड़े रखने की एक कड़ी बन जाती है। चौथी कहानी दर्शकों को कई दशक पीछे ले जाती है। यहां प्यार, रोमांस और इंटीमेसी को उस दौर के सामाजिक माहौल के बीच दिखाया गया है।

विक्रमादित्य मोटवाने: रिश्तों की प्राइवेट दुनिया में झांकती कहानी

विक्रमादित्य मोटवाने ने शादीशुदा जिंदगी और महिलाओं की निजी इच्छाओं पर फोकस किया है। कहानी आज के दौर के रिश्तों की बदलती तस्वीर दिखाने की कोशिश करती है। हालांकि इस कहानी में कुछ हिस्से थोड़े उलझे हुए महसूस हो सकते हैं। किरदारों की भावनाओं को समझने में दर्शक को कुछ समय लगता है, लेकिन विषय की संवेदनशीलता इसे दिलचस्प बनाए रखती है।

किरण राव का ट्विस्ट: प्यार, धोखा और मॉडर्न लाइफ

किरण राव की कहानी आधुनिक लाइफस्टाइल के बीच प्यार, इंटीमेसी, धोखे और ड्रग्स जैसे पहलुओं को छूती है। कहानी का ट्रीटमेंट अपेक्षाकृत हल्का है, लेकिन इसका ट्विस्ट इसे संभाल लेता है। यह कहानी उन दर्शकों को ज्यादा पसंद आ सकती है जिन्हें रिश्तों की गंभीरता के साथ थोड़ा हल्का-फुल्का और अप्रत्याशित अंदाज भी पसंद है।

शकुन बत्रा की कहानी में शादी और तलाक के बीच फंसा रिश्ता

शकुन बत्रा ने राधिका मदान और अली फजल को एक ऐसे कपल के रूप में पेश किया है जिसकी शादी कई साल बाद टूटने की कगार पर पहुंच चुकी है। कहानी का केंद्र यह सवाल है कि जब भावनात्मक रिश्ता कमजोर पड़ जाए, तो क्या इंटीमेसी किसी रिश्ते को बचाए रख सकती है? यहां इमोशन और इंटीमेसी को साथ रखने की कोशिश की गई है। हालांकि कुछ दर्शकों को कहानी का इमोशनल पक्ष थोड़ा कमजोर लग सकता है। राधिका मदान और अली फजल की केमिस्ट्री इसे संभालती है।

विशाल भारद्वाज की कहानी सबसे अलग

अगर चारों कहानियों में किसी एक का असर सबसे ज्यादा देर तक रहता है, तो वह विशाल भारद्वाज की कहानी है। दर्शकों को चार दशक पुराने दौर में ले जाते हुए फिल्म प्यार और इंटीमेसी को एक अलग सामाजिक परिवेश में दिखाती है। प्रोफेसर के किरदार में अदिती राव हैदरी और डॉक्टर की भूमिका में सिद्धार्थ नजर आते हैं। दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री कहानी के माहौल के अनुरूप है, लेकिन अदिती राव हैदरी अपनी इंटेंस और सहज अदाकारी से खास तौर पर प्रभावित करती हैं। उनके किरदार में मासूमियत और भावनात्मक गहराई दोनों दिखाई देती हैं।

एक्टिंग बनी ‘लस्ट स्टोरीज 3’ की सबसे मजबूत कड़ी

एंथोलॉजी की चारों कहानियों में कलाकारों का प्रदर्शन इसकी बड़ी ताकत है। कोंकणा सेन शर्मा और राधिका आप्टे ने शादीशुदा महिलाओं के किरदारों में भावनात्मक जटिलताओं को अच्छी तरह निभाया है। विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी भी अपने किरदारों में प्रभाव छोड़ते हैं। गुरफतेह पीरजादा और सना थंपी ने भी कहानी को आगे बढ़ाने में अच्छा योगदान दिया है। वहीं राधिका मदान और अली फजल की जोड़ी अपने हिस्से की कहानी को विश्वसनीय बनाने में सफल रहती है। लेकिन चौथी कहानी में अदिती राव हैदरी और सिद्धार्थ की जोड़ी खास आकर्षण बनकर उभरती है।

फिल्म की खूबियां क्या हैं?

‘लस्ट स्टोरीज 3’ की सबसे बड़ी खूबी इसकी विविधता है। चारों कहानियां अलग-अलग समय, किरदार और परिस्थितियों में होने के बावजूद रिश्तों की एक ही बुनियादी उलझन के आसपास घूमती हैं।

  • अलग-अलग दौर और सामाजिक परिवेश।
  • महिलाओं की इच्छाओं और भावनाओं को केंद्र में रखना।
  • रिश्तों, शादी और तलाक पर अलग-अलग नजरिए।
  • चारों कहानियों में अलग तरह का ट्रीटमेंट।
  • मजबूत कलाकार और अच्छी परफॉर्मेंस।
  • संगीत और सिनेमैटोग्राफी कहानी के मूड के साथ मेल खाते हैं।
  • विशाल भारद्वाज की कहानी खास तौर पर अलग प्रभाव छोड़ती है।

कहां थोड़ी कमजोर पड़ती है फिल्म?

एंथोलॉजी की सभी कहानियां समान प्रभाव नहीं छोड़तीं। मोटवाने की कहानी कुछ जगहों पर उलझी हुई महसूस होती है। किरण राव की कहानी हल्की-फुल्की है और उसका ट्विस्ट इसे गति देता है, लेकिन हर दर्शक इससे समान रूप से जुड़ पाए, यह जरूरी नहीं। शकुन बत्रा की कहानी में इंटीमेसी के साथ इमोशनल एंगल जोड़ने की कोशिश की गई है, लेकिन कुछ हिस्सों में इसकी भावनात्मक पकड़ कमजोर पड़ती है। यही वजह है कि चारों कहानियों का असर एक जैसा नहीं रहता।

अदिती राव हैदरी ने जीता दिल

फिल्म के सबसे यादगार हिस्सों में अदिती राव हैदरी का अभिनय शामिल है। विशाल भारद्वाज की कहानी में उनका किरदार सिर्फ रोमांस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसमें भावनात्मक परतें भी दिखाई देती हैं। उनकी सहज अदाकारी और स्क्रीन प्रेजेंस कहानी के पुराने दौर को विश्वसनीय बनाने में मदद करती है। सिद्धार्थ के साथ उनकी केमिस्ट्री भी कहानी की खूबसूरती बढ़ाती है।

Verdict: रिश्तों की चार कहानियों का अलग-अलग स्वाद

‘लस्ट स्टोरीज 3’ सिर्फ इंटीमेसी पर आधारित कहानियों का संग्रह नहीं है। यह प्यार, शादी, इच्छा, धोखे, भावनाओं और रिश्तों में आती दूरी को अलग-अलग नजरिए से देखने की कोशिश करती है। चारों कहानियों की गुणवत्ता और असर अलग-अलग है, लेकिन कलाकारों का प्रदर्शन, खासकर अदिती राव हैदरी की परफॉर्मेंस, इसे देखने की वजह देता है।अगर आपको रिश्तों पर आधारित एंथोलॉजी पसंद हैं और आप ‘लस्ट स्टोरीज’ की पिछली फिल्मों के दर्शक रहे हैं, तो ‘लस्ट स्टोरीज 3’ आपके लिए एक दिलचस्प वॉच हो सकती है।

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