नई दिल्ली। सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची (Voter List) और नागरिकता मामले में दिल्ली की एक सत्र अदालत (विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत (मजिस्ट्रेट कोर्ट) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली शिकायत को खारिज कर दिया गया था। इस मामले को अब नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेज दिया गया है।
1. मामला क्या है?
यह पूरा विवाद कांग्रेस संसदीय दल की chairperson सोनिया गांधी के भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले कथित तौर पर उनका नाम मतदाता सूची (Electoral Roll) में जोड़े जाने की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने मजिस्ट्रेट अदालत में याचिका दायर कर सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की थी।
2. मजिस्ट्रेट अदालत का पुराना आदेश और सेशन कोर्ट की आपत्ति
- मजिस्ट्रेट का फैसला: अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह एक अप्रमाणित रिकॉर्ड की फोटोकॉपी पर आधारित महज एक तथ्यात्मक दावा है। साथ ही, नागरिकता से जुड़े मुद्दों और अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) को लेकर कुछ टिप्पणियां की थीं।
- सत्र अदालत की कड़ी टिप्पणी: सेशंस कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि उसमें कई कानूनी खामियां हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनौती दिए गए आदेश में इस बात का कोई ठोस और स्पष्ट कारण नहीं दिया गया है कि मामले से किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) का खुलासा होता है या नहीं।
- सत्र अदालत ने यह भी माना कि नागरिकता के संबंध में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग (Election Commission) को लेकर निचली अदालत की टिप्पणियां उचित नहीं थीं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि “मतदाता सूची की पवित्रता हर नागरिक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है”।
3. अब आगे क्या होगा?
- नए सिरे से सुनवाई: सत्र अदालत ने मामले को वापस संबंधित अदालत में भेज दिया है ताकि इस पर नए सिरे से सुनवाई हो सके और कानून के मुताबिक उचित कारण स्पष्ट करते हुए नया आदेश पारित किया जा सके।
- अगली तारीख: इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की गई है।
इस कानूनी घटनाक्रम के बाद इस पुराने मामले में एक बार फिर से न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।