कोलकाता: नंदीग्राम के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच ने नए मामले में मिलन प्रधान को गिरफ्तारी से सुरक्षा देने वाले आदेश को खारिज कर दिया। कोर्ट ने उन्हें राहत पाने के लिए जमानत की प्रक्रिया अपनाने को कहा। इससे पहले न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने निर्देश दिया था कि नए मामले में मिलन प्रधान को गिरफ्तार नहीं किया जाए और पुलिस उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न करे। राज्य सरकार ने इस आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी।
मुख्य न्यायाधीश ने पूछा- अग्रिम जमानत क्यों नहीं मांगी?
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मिलन प्रधान के वकील से सवाल किया कि उन्होंने अब तक अग्रिम जमानत या गिरफ्तारी के बाद जमानत के लिए आवेदन क्यों नहीं किया।कोर्ट ने कहा कि अदालत कानून के अनुसार ही काम करेगी और कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होगा।मिलन प्रधान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने 15 सितंबर को उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। इसके बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और उन्हें पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।
‘चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन कानून से ऊपर नहीं’
मिलन प्रधान के वकील ने अदालत को बताया कि चुनाव नजदीक हैं और गिरफ्तारी के कारण उनके लिए चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नए मामले में जमानत की प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय कम है।इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए समय मौजूद है और जरूरत पड़ने पर छुट्टी के दिन भी अदालत बैठ सकती है। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ना किसी व्यक्ति को कानून से अलग नहीं करता।सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “आप भगवान नहीं हैं।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून की नजर में उम्मीदवार और आम नागरिक के बीच अलग-अलग मानक नहीं हो सकते।
‘कानून सबके लिए बराबर है’
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हर नागरिक को कानून पर भरोसा है और अदालत को कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा। चुनाव और कानूनी प्रक्रिया को अलग-अलग रखते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को भी सामान्य कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। अदालत ने मिलन प्रधान को सुरक्षा कवच देने के बजाय जमानत के लिए आवेदन करने का रास्ता अपनाने को कहा।
राज्य सरकार ने गिरफ्तारी पर क्या कहा?
राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत में कहा कि मिलन प्रधान की गिरफ्तारी उस मामले में जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर हुई है। राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि जिस अतिरिक्त मामले को लेकर विवाद है, उसमें मिलन प्रधान को 19 सितंबर को ही गिरफ्तार किया गया था। राज्य के मुताबिक, अदालत के 22 सितंबर के आदेश के बाद उनके खिलाफ कोई नई गिरफ्तारी नहीं की गई।
‘पुराने मामलों में 2021 से ही वारंट था’
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि संबंधित पुराने मामलों में 2021 से ही गिरफ्तारी वारंट लंबित थे। राज्य के अनुसार, पिछली सरकार ने इन पुराने मामलों को वापस लेने की कोशिश की थी, जिसके कारण लंबे समय तक मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। राज्य ने दावा किया कि बाद में संबंधित निर्देशों के आधार पर इन मामलों में कार्रवाई की गई और मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की गई।
मिलन प्रधान के वकील की क्या दलील थी?
मिलन प्रधान की ओर से अदालत में कहा गया कि उनके खिलाफ कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब चुनाव बेहद नजदीक हैं। वकील का आरोप था कि गिरफ्तारी के कारण उनके चुनाव प्रचार और चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं, राज्य सरकार ने गिरफ्तारी को कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया गया कदम बताया और कहा कि वारंट पहले से मौजूद थे।
अब आगे क्या होगा?
डिवीजन बेंच द्वारा सुरक्षा कवच खारिज किए जाने के बाद मिलन प्रधान के पास जमानत के लिए आवेदन करने का रास्ता खुला है। अदालत ने संकेत दिया कि चुनावी समयसीमा के कारण जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सकती है।फिलहाल इस मामले में मुख्य विवाद चुनाव लड़ने के अधिकार और लंबित आपराधिक मामलों में लागू होने वाली सामान्य कानूनी प्रक्रिया के बीच नहीं, बल्कि अदालत के सामने उपलब्ध उचित कानूनी उपाय को लेकर है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनावी उम्मीदवार होने के बावजूद संबंधित व्यक्ति को कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रिया का ही पालन करना होगा।