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बस्तर में जवानों के बीच PM मोदी की दिवाली, बोले- हथियारबंद नक्सलियों के बाद अब ‘दिमागी नक्सलियों’ से लड़ने की चुनौती

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में CRPF जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ देश की लड़ाई, आंतरिक सुरक्षा और सुरक्षाबलों की उपलब्धियों पर विस्तार से बात की। बस्तर. . .

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में CRPF जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ देश की लड़ाई, आंतरिक सुरक्षा और सुरक्षाबलों की उपलब्धियों पर विस्तार से बात की। बस्तर के करणपुर स्थित कोबरा ऑपरेशंस बेस में जवानों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सलियों का प्रभाव खत्म हो रहा है, लेकिन अब एक नई चुनौती सामने है। उन्होंने कहा कि देश को अब ‘दिमागी नक्सलियों’ की पहचान कर उनसे भी लड़ना होगा। प्रधानमंत्री ने करीब 42 मिनट तक जवानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की बाहरी सुरक्षा उसकी आंतरिक मजबूती पर निर्भर करती है। जब देश के भीतर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है, तब बाहरी दुश्मनों के मंसूबे सफल नहीं हो पाते। वहीं, आंतरिक सुरक्षा कमजोर होने पर बाहरी ताकतों को भी सिर उठाने का मौका मिल जाता है।

लगातार 13वीं बार जवानों के साथ दिवाली मनाने पहुंचे PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष लगातार 13वीं बार देश के सुरक्षाबलों के साथ दीपावली का त्योहार मनाया। इस बार उन्होंने छत्तीसगढ़ के बस्तर को चुना और CRPF की कोबरा यूनिट के जवानों के बीच पहुंचकर उनके साथ खुशियां साझा कीं। इससे पहले भी प्रधानमंत्री अलग-अलग सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के साथ दिवाली मना चुके हैं। पिछले 12 अवसरों पर उन्होंने देश के विभिन्न सैन्य ठिकानों और सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया था। इनमें सबसे अधिक तीन बार जम्मू-कश्मीर और दो-दो बार हिमाचल प्रदेश तथा लद्दाख का दौरा शामिल रहा है।

’40-50 साल बाद देश का हर जिला नक्सलवाद के डर से मुक्त’

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए अभियान को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 की दिवाली देश के लिए विशेष है, क्योंकि करीब 40-50 वर्षों बाद पहली बार देश का हर जिला नक्सलवाद के डर से मुक्त हुआ है। पीएम मोदी के मुताबिक, नक्सलवाद के कारण लंबे समय तक देश के कई हिस्सों में भय और असुरक्षा का माहौल रहा। अब करोड़ों लोगों को उस डर से बाहर निकलने का अवसर मिला है। उन्होंने सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जवानों के साहस, बलिदान और लगातार किए गए प्रयासों से यह बदलाव संभव हुआ है।

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एक साल में ड्यूटी के दौरान CRPF का कोई जवान शहीद नहीं हुआ

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में CRPF की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान ड्यूटी पर CRPF का कोई जवान शहीद नहीं हुआ। मोदी ने इसे सुरक्षा बलों की बहादुरी, बेहतर रणनीति और सरकार की नीतियों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में लगे जवानों के समर्पण के कारण ही आंतरिक सुरक्षा की स्थिति में सुधार हुआ है।

पिछली सरकारों पर भी साधा निशाना

नक्सलवाद के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने वर्ष 2004 से 2013 के बीच की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान हर साल नक्सलियों के मुकाबले सुरक्षा बलों के अधिक जवान शहीद होते थे। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने नक्सलवाद को ऐसी समस्या मान लिया था, जिसका कोई स्थायी समाधान नहीं हो सकता। लेकिन मौजूदा सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए स्पष्ट रणनीति और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ काम किया।

‘हथियारबंद नक्सली कमजोर हुए, लेकिन विचारधारा के नाम पर चुनौती बाकी’

प्रधानमंत्री के भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा ‘दिमागी नक्सलियों’ को लेकर उनकी टिप्पणी रही। उन्होंने कहा कि जंगलों में हथियार लेकर सक्रिय रहने वाले नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है। उन्होंने दावा किया कि कई संगठनों में ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो लोगों को संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ भड़काने का प्रयास करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब ऐसे तत्वों की पहचान करना और उनसे वैचारिक स्तर पर मुकाबला करना जरूरी है।

नक्सलियों की आर्थिक ताकत पर भी किया प्रहार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ कार्रवाई केवल सुरक्षा अभियानों तक सीमित नहीं रही है। सरकार ने ऐसे कई कदम उठाए हैं, जिनसे इन गतिविधियों को आर्थिक मदद देने वाले नेटवर्क पर भी असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई सख्त फैसले लिए हैं। इनमें नक्सलियों और अलगाववादी संगठनों की फंडिंग पर रोक लगाने, नकली नोटों के नेटवर्क को कमजोर करने और उनकी आर्थिक गतिविधियों पर कार्रवाई जैसे कदम शामिल हैं। पीएम मोदी के अनुसार, इन प्रयासों से न केवल ऐसे संगठनों की आर्थिक ताकत प्रभावित हुई, बल्कि हथियारों की आपूर्ति, आवाजाही और नए लोगों की भर्ती पर भी असर पड़ा। उन्होंने कहा, ‘सफलता के लिए सही इरादे और सही नीतियां जरूरी हैं।’ प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनकी जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंची है।

12 वर्षों में 50 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए: PM मोदी

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के करीब 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने इसे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और विकास से जुड़ी नीतियों की उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, सुरक्षा और विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब किसी क्षेत्र में शांति और स्थिरता आती है, तभी वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार संभव होता है।

जवानों के साथ त्योहार मनाकर दिया एकजुटता का संदेश

बस्तर के कोबरा ऑपरेशंस बेस में CRPF जवानों के साथ दिवाली मनाकर प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और समर्थन का संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने जवानों के साहस, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण की सराहना की। प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब छत्तीसगढ़ सहित देश के कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान और विकास कार्यों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बस्तर में जवानों के बीच पहुंचकर पीएम मोदी ने साफ संकेत दिया कि सरकार की प्राथमिकता केवल नक्सलवाद के सशस्त्र नेटवर्क को कमजोर करना नहीं, बल्कि प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति और विकास का माहौल तैयार करना भी है।

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