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कलेजे के टुकड़े को बांधना पड़ता है जंजीरों से, बेबस मां नहीं रोक पाती अपने आंसू, आखिर करें तो करें क्या

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सिलीगुड़ी। माँ तो आखिर माँ होती है, उसका संतान चाहे कैसा भी, माँ कभी साथ नहीं छोड़ती है, चाहे पूरी दुनिया ही उसके संतान से मुंह मोड़ लें लेकिन एक माँ अपने संतान से मुंह नहीं मोड़ती है। ऐसी ही एक बेबस और मजबूर माँ की दर्दभरी सच्ची कहानी सिलीगुड़ी संलग्न एनजेपी थाना क्षेत्र के शांतिपाड़ा से आयी है, जहां एक मां को अपने दिल के टुकड़े को जंजीर से बांधकर रखाना पड़ता है। यहाँ तक की लडके के पिता तक ने अपने बेटे का साथ छोड दिया है, पडोसी भी लडके से डरते है , लेकिन फिर वहीँ बता….माँ तो आखिर माँ होती है, वह अपने बेटे को कैसे छोड सकती है, यही कारन है कि दिमागी हालत ठीक नहीं होने के कारण वह अपने बेटे को जंजीरों से बांध कर रखती है, हालाँकि ऐसा करते वक्त उसका कलेजा छली हो जाता है, मगर एक मजबूर माँ करे भी तो क्या करें
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार इस बेबस मां का नाम पिंकी रॉय है। पिंकी की शादी 13 साल पहले सिलीगुड़ी के पास बारिभासा क्षेत्र के रहने वाले लालू रॉय के साथ हुई थी। शादी के कुछ समय बाद एक बेटे का जन्म हुआ। जन्म के बाद बच्चा सामान्य थ। लेकिन धीरे-धीरे जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया, वह असामान्य व्यवहार करने लगा। अपने कपड़े फाड़ने लगा, अपने शरीर को काटने लगा, घर से बाहर जाने पर दूसरे बच्चों को मारने दौड़ता। इस कारण सभी बच्चे उससे डरने लगे और उसको घर में रखना पड़ता है। इस बीच इस बच्चे के कारण पति और ससुराल वालों ने भी उससे मुंह मोड़ लिया। तब माँ अपने बेटे को अपने पिता के घर ले गई है। आखिरकार बेबस मां अपने बेटे को कैसे छोड़ते, जबकि उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। इस बीच जंजीर में बंधने का खबर मीडिया में आ गया है और लोग इस माँ पर आंगुल भी उठा रहे है , लेकिन कोई उसकी मजबूरी को नहीं समझ पा रहा है। बेबस मां पिंकी रॉय ने बताया की “कई जगह इलाज कराया गया लेकिन कुछ नहीं हुआ। मानसिक रूप से असंतुलित बालक को जंजीर में बांधना पड़ता ह। मुझे यह काम मजबूरी में करना पड़ता है, क्योंकि काम पर नहीं जाउंगी, तो क्या खाउंगी। ” माँ को अपने इकलौते असंतुलित बेटे को आँखों में आँसू लिए और जंजीरों से बाँधकर काम पर जाना पड़ता है। बेबस मां ने शहरवासियों से इसके लिए मदद की गुहार लगाई है ।
पीड़ित मां ने बताया कि बेटे की दिमागी हालत ठीक नहीं है. वह गांव में कहीं भी उत्पात मचाना शुरू कर देता है। इसीलिए गांव वालों ने उसे बांधकर रखने की सलाह दी थी। महिला को उसके बेटे का बेहतर जगह इलाज कराने को कहा गया था, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते बड़ी मुश्किल से दो वह वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाती है. ऐसे में इलाज कराना बहुत बड़ी समस्या हो गई है। महिला का पति दूसरी शादी कर चुका है और कहीं और रहता है। जितनी भी जमा पूंजी थी, सारी बेटे के इलाज में खर्च हो चुकी है। पति के जाने के बाद महिला के पास अब ना ही राशन कार्ड है और ना उसे राशन मिलता मिलता है। काफी मजबूरी में जिंदगी गुजारनी पड़ रही है।


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