नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के साकेत के निकट सैदुल्लाजाब इलाके में शनिवार शाम अवैध छह मंजिला इमारत ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में एक युवक की मौत हो गई है और करीब आठ लोग घायल हैं हादसा उस वक्त हुआ जब सातवीं मंजिल की छत ढालने की तैयारी हो रही थी। वेस्टर्न मार्ग स्थित गली नंबर-5 में हुई इस घटना में देर रात तक 15 लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका था। घायलों में 11 पुरुष और चार महिलाएं शामिल हैं। सभी घायलों को मैक्स, एम्स और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मलबे में दबकर एक की मौत और आठ घायल
मृतक की पहचान रवि (26) के रूप में हुई है। घायलों की पहचान गुरुग्राम के तरुण कुमार (26), बिहार के मोतिहारी की साइका खान (27), सैदुलाजाब की नीलम यादव (25), साकेत के आदित्य शर्मा (24), नोएडा के क्षितिज प्रताप (25), साकेत के अनुज दीक्षित (25), सैदुलाजाब की आस्था (25) और साकेत के विशाल (24) के रूप में हुई है। राहत और बचाव कार्य जारी है।
अग्निशमन विभाग के अनुसार शाम 7.45 बजे इमारत ढहने की सूचना मिली थी। शुरुआती चरण में दमकल की चार गाड़ियां मौके पर भेजी गईं, लेकिन हादसे की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त दमकल वाहन और कर्मियों को भी तैनात किया गया। मौके पर एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस, दिल्ली नगर निगम तथा खोजी कुत्तों की टीमों को भी लगाया गया। अधिकारियों के अनुसार स्थानीय लोगों ने राहत दलों के पहुंचने से पहले तीन लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। भीड़ को नियंत्रित करने और बचाव कार्य में बाधा न आए इसके लिए पूरे इलाके को घेर लिया गया। सभी एजेंसियां समन्वय के साथ राहत एवं बचाव अभियान में जुटी रहीं।
धूल का गुबार छंटते ही सबसे पहले मदद के लिए उठे स्थानीय हाथ
सैदुल्लाजाब में शनिवार रात जब तीन मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, तब कुछ मिनटों तक पूरे इलाके में सिर्फ धूल, चीखें और अफरा-तफरी थी। लेकिन इसी अफरातफरी के बीच सबसे पहले जो चीज दिखाई दी, वह थी स्थानीय लोगों की इंसानियत और हिम्मत। हादसे के कुछ ही मिनटों में आसपास रहने वाले लोग अपनी जान की परवाह किए बिना मलबे की ओर दौड़ पड़े।
मलबे के भीतर से दबे लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थीं
जोरदार आवाज सुनकर लोग घबराकर जब घरों से बाहर निकले, लेकिन धूल के गुबार के बीच किसी को समझ में नहीं आया। कई युवक तुरंत मलबे की तरफ भागे। उस समय तक न पुलिस पहुंची थी और न ही दमकल की टीमें। मलबे के भीतर से दबे लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। कोई मदद के लिए पुकार रहा था, तो कोई धीरे-धीरे कराह रहा था। इन्हीं आवाजों ने स्थानीय लोगों को रुकने नहीं दिया। किसी ने हाथों से ईंटें हटानी शुरू कीं, तो कोई लोहे की सरियों को खींचकर रास्ता बनाने लगा।
आसपास की दुकानों और घरों से फावड़े, रॉड और टॉर्च तक उठा लाए गए। स्थानीय निवासी जगदीश बताते हैं कि उस वक्त किसी के दिमाग में अपनी सुरक्षा का ख्याल नहीं था। इसी दौरान मलबे में दबे कुछ लोगों ने आवाज देकर अपनी मौजूदगी का संकेत दिया। लोगों ने तेजी दिखाई और राहत एजेंसियों के पहुंचने से पहले ही तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाहर निकलते ही घायल दर्द से कराह रहे थे, लेकिन जिंदा होने की राहत उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी।
आसपास खड़े लोग तुरंत पानी लेकर दौड़े और किसी ने एंबुलेंस बुलाने के लिए फोन मिलाना शुरू कर दिया। भीम नाम के एक स्थानीय निवासी कहते हैं कि हादसे के बाद वहां ऐसा माहौल था जिसमें हर कोई एक-दूसरे का सहारा बन गया था। कोई घायल को संभाल रहा था, कोई रास्ता खाली करवा रहा था, तो कोई लगातार मलबे में फंसे लोगों को आवाज दे रहा था कि हिम्मत मत हारो, हम निकाल रहे हैं।
सैदुल्लाजाब समेत चार गांवों की कमेटी के प्रधान रविंद्र सिंह ने बताया कि इमारत में विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। यहां कॉफी हाउस, कैफे, कोचिंग सेंटर, पीजी और कैंटीन चल रही थीं। उन्होंने बताया कि हादसे के समय कैंटीन में छात्र भोजन कर रहे थे, जिससे अधिक लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका बनी हुई है।