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थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने पर फंसा पेंच, शपथ से पहले तमिलनाडु के राज्यपाल ने रखी ये शर्त

नई दिल्ली। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद से एक्टर थलापति विजय की चर्चा पूरे देश में हो रही है। विजय की पार्टी TVK 234 सीटों वाली विधानसभा में 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर. . .

नई दिल्ली। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद से एक्टर थलापति विजय की चर्चा पूरे देश में हो रही है। विजय की पार्टी TVK 234 सीटों वाली विधानसभा में 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, तमिलनाडु में सरकार बनाने को लेकर पेच फंस गया है। राज्यपाल अर्लेकर ने नई सरकार बनाने के लिए एक्टर को बहुमत साबित करने को कहा है।
दरअसल, आज यानी गुरुवार (07 मई, 2026) सुबह TVK चीफ विजय ने राज्यपाल से मुलाकत की। सामाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस दौरान राज्यपाल अर्लेकर ने तमिलनाडु में नई सरकार बनाने के लिए विजय को बहुमत साबित करने को कहा है।
गवर्नर ने कहा, ‘TVK प्रमुख विजय शपथ तभी ले सकते हैं, जब बहुमत साबित हो जाए।’ तमिलनाडु के राज्यपाल तमिलनाडु में एक स्थिर सरकार चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार, बहुमत साबित होते ही विजय शपथ ले सकेंगे।

6 मई को पेश किया था सरकार बनाने का दावा

बता दें कि एक्टर से पॉलिटिशियन बने टीवीके प्रमुख विजय ने बुधवार को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। कांग्रेस द्वारा समर्थन दिए जाने के बाद भी बहुमत के लिए टीवीके को पांच विधायकों की जरूरत है।
राज्य में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 118 है। टीवीके संस्थापक ने लोक भवन के निमंत्रण पर दोपहर 3.15 बजे राज्यपाल से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। विजय ने कांग्रेस नेताओं के साथ हुई बैठक और कांग्रेस द्वारा समर्थन की घोषणा के कुछ घंटों बाद राज्यपाल से भेंट की थी।
विजय ने राज्यपाल को उन कांग्रेस विधायकों की सूची भी सौंपी, जिन्होंने समर्थन देने का वादा किया है। हालांकि, लोकभवन सूत्रों ने संकेत दिया कि विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने के संबंध में अभी तक कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि राज्यपाल अर्लेकर विजय के दावे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।

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