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बंगाल उपचुनाव से पहले TMC में बड़ी सेंध, 100 से ज्यादा नेताओं ने छोड़ा साथ; कांग्रेस में हुए शामिल

पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मालदा के महीष बाथानी इलाके में 100 से ज्यादा TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. . .

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मालदा के महीष बाथानी इलाके में 100 से ज्यादा TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इनमें 13 पंचायत सदस्य, एक पंचायत समिति सदस्य, क्षेत्रीय अध्यक्ष, ब्लॉक उपाध्यक्ष और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल बताए जा रहे हैं। कांग्रेस में शामिल होने का कार्यक्रम बलरामपुर में आयोजित किया गया, जहां जिला कांग्रेस अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक बी. हलदर समेत पार्टी के कई नेता मौजूद रहे।

पंचायत स्तर तक पहुंची राजनीतिक हलचल

महीष बाथानी इलाके में हुए इस दल-बदल को स्थानीय संगठन में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस में शामिल होने वालों में पंचायत और संगठन से जुड़े पदाधिकारी भी शामिल हैं। TMC छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए शराफत अली ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोलने की क्षमता कांग्रेस में ही है। हालांकि, इन नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने और इसके राजनीतिक प्रभाव से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हुई है।

उपचुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। चुनाव आयोग ने दोनों सीटों के लिए कार्यक्रम घोषित किया है। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी और बाद में नंदीग्राम सीट छोड़ दी। वहीं रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई।

नंदीग्राम में बदला चुनावी समीकरण

उपचुनाव में TMC की ओर से पहले संचिता प्रधान डे को नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया गया था। उन्होंने 19 सितंबर को अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। इससे नंदीग्राम का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस ने नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ़ी को उम्मीदवार बनाया है।

TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर भी सुप्रीम कोर्ट में मामला

इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। चुनाव आयोग ने पार्टी के भीतर दो गुटों के विवाद के बीच ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल एवं घास’ चुनाव चिह्न को अंतरिम तौर पर फ्रीज किया है। 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया और चुनाव आयोग को विवाद पर निर्णय लेने के लिए उसके बाद तीन महीने की समयसीमा तय की। यानी पूरी प्रक्रिया के लिए प्रभावी तौर पर चार महीने की समयसीमा तय हुई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने बड़ी संख्या में दस्तावेजों की जांच के लिए AI और मशीन-लर्निंग जैसे साधनों के इस्तेमाल का सुझाव भी दिया।

उपचुनाव से पहले संगठन की परीक्षा

नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव और TMC के नाम-चिह्न विवाद के बीच पार्टी के स्थानीय स्तर पर हो रहे दल-बदल ने बंगाल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। महीष बाथानी से 100 से ज्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में जाने का दावा इसी राजनीतिक हलचल की एक कड़ी है। हालांकि, इसका व्यापक चुनावी असर क्या होगा, यह उपचुनाव के नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा।

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