गांधी जयंती पर बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई तीन वर्षीय बाघिन
अलीपुरद्वार: उत्तर बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों को फिर से बसाने की दिशा में शुक्रवार को अहम कदम उठाया गया। गांधी जयंती के अवसर पर बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई करीब तीन वर्षीय रॉयल बंगाल बाघिन को बक्सा के प्राकृतिक घेराबंदी क्षेत्र में छोड़ा गया। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और राज्य के वन मंत्री मनोज कुमार ओरांव मौजूद रहे। बाघिन को करीब 2.2 हेक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर में रखा गया है, जहां उसकी गतिविधियों और स्वास्थ्य पर नजर रखी जाएगी। अधिकारियों की योजना उसे धीरे-धीरे जंगल के प्राकृतिक वातावरण का अभ्यस्त कराने की है।
अगले दो महीनों में तीन और बाघ छोड़े जाएंगे
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि अगले दो महीनों में बक्सा टाइगर रिजर्व में तीन और बाघ छोड़े जाएंगे। उन्होंने बक्सा क्षेत्र में वन पर्यटन और जंगल आधारित विकास को बढ़ावा देने की बात भी कही। अधिकारी ने बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बाघिन को सुरक्षित तरीके से बक्सा पहुंचाने में सहयोग के लिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को धन्यवाद दिया। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार की वन्यजीव संरक्षण नीति को लेकर राजनीतिक आरोप भी लगाए।
2018 के बाद बक्सा में बाघों की मौजूदगी नहीं मिली थी
बक्सा टाइगर रिजर्व में लंबे समय से बाघों की स्थायी मौजूदगी नहीं थी। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की 2018 की गणना में यहां बाघ नहीं पाए गए थे। हालांकि, बाद में कैमरा ट्रैप में एक बाघ की मौजूदगी दर्ज हुई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, वह बाघ भूटान या असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान की ओर से भटककर बक्सा क्षेत्र में पहुंचा हो सकता है। अब वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बाघिन लाकर बक्सा में बाघों की नई आबादी स्थापित करने की कोशिश शुरू की गई है।
पांच साल की योजना का हिस्सा है पुनर्वास कार्यक्रम
अधिकारियों के अनुसार, बक्सा में बाघों को फिर से बसाने का कार्यक्रम 2023-24 से 2027-28 वित्तीय वर्ष तक चलने वाली योजना का हिस्सा है। इसमें केवल दूसरे क्षेत्रों से बाघ लाना ही शामिल नहीं है, बल्कि शिकार प्रजातियों के लिए बेहतर आवास तैयार करना, वन्यजीव कॉरिडोर मजबूत करना और मानव-बाघ संघर्ष को कम करना भी योजना का हिस्सा है। योजना के तहत बाघों को चरणबद्ध तरीके से ‘सॉफ्ट रिलीज’ किया जाएगा। यानी पहले उन्हें नियंत्रित प्राकृतिक वातावरण में रखा जाएगा और उनके व्यवहार, स्वास्थ्य तथा आसपास के पर्यावरण के अनुकूलन की निगरानी के बाद जंगल में पूरी तरह छोड़ा जाएगा।
बक्सा में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद
वन विभाग के मुताबिक बाघों की वापसी से बक्सा के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ डुआर्स क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों ने बक्सा में पर्याप्त शिकार आधार, आवास की गुणवत्ता और मानव गतिविधियों जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता बताई है।
बक्सा के लिए ऐतिहासिक दिन
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई यह तीन वर्षीय बाघिन बक्सा में बाघों की आबादी दोबारा स्थापित करने के अभियान की पहली बड़ी कड़ी है। इसके बाद अन्य बाघों को भी चरणबद्ध तरीके से लाने की योजना है। इस पहल के जरिए उत्तर बंगाल में बाघों के प्राकृतिक आवास को फिर से मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।