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भारत-स्विट्जरलैंड की दोस्ती से 10 लाख नौकरियों की उम्मीद, पीएम मोदी ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर दिया जोर

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अक्टूबर 2026 को स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के साथ नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता के बाद. . .

पीएम मोदी बोले- लोकतंत्र, कानून के शासन और कूटनीति के प्रति दोनों देशों की मजबूत प्रतिबद्धता; रक्षा, परमाणु ऊर्जा और निवेश में सहयोग बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अक्टूबर 2026 को स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के साथ नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि दोनों देश लोकतंत्र, कानून के शासन, संवाद और कूटनीति के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता साझा करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे। दोनों देशों ने यह भी माना कि उभरती वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार जरूरी है।

TEPA से भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों की उम्मीद

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी EFTA के बीच हुए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) को आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत में अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश को समर्थन मिलने और करीब 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। पीएम मोदी के मुताबिक, यह साझेदारी केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत में नवाचार, रोजगार और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को भी गति मिल सकती है।

यूरोप के आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला FTA

प्रधानमंत्री ने TEPA को यूरोप के किसी आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता बताया। उन्होंने कहा कि समझौते के जरिए दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। भारत इस साझेदारी का इस्तेमाल अपने निर्यात को बढ़ाने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी भागीदारी मजबूत करने के लिए करना चाहता है।

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स्विस निवेश को इन क्षेत्रों में बढ़ाने पर जोर

पीएम मोदी ने कहा कि भारत स्विट्जरलैंड से कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • बायोटेक्नोलॉजी
  • लाइफ साइंसेज
  • बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं
  • बीमा
  • फूड प्रोसेसिंग
  • सस्टेनेबिलिटी और ग्रीन टेक्नोलॉजी

भारत का लक्ष्य इन क्षेत्रों में स्विस कंपनियों के निवेश के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

भारतीय निर्यात को मिलेगा बाजार पहुंच का फायदा

प्रधानमंत्री ने कहा कि बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने के उपायों से स्विट्जरलैंड को भारत से होने वाले निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। खास तौर पर कृषि उत्पादों, फार्मास्युटिकल्स, कपड़ा और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात में नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इससे भारत के कारोबारियों और कंपनियों को स्विस बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

रक्षा सहयोग में भी नए अवसर

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच बातचीत केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रही। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा सहयोग और सैन्य आदान-प्रदान के क्षेत्र में नए अवसरों की पहचान की है। दोनों पक्ष रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और आपसी संपर्क को मजबूत करने की संभावनाओं पर आगे काम करेंगे।

परमाणु ऊर्जा में सहयोग मजबूत करने पर सहमति

भारत और स्विट्जरलैंड ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमति जताई है। ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों के बीच दोनों देशों के बीच यह सहयोग रणनीतिक महत्व रखता है।

वैश्विक चुनौतियों पर भी हुई चर्चा

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड का मानना है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का सामना केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की जरूरत है। दोनों देशों ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने और वैश्विक शांति एवं स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

आर्थिक साझेदारी से रणनीतिक रिश्तों तक

भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक रिश्तों से आगे बढ़कर निवेश, तकनीक, रक्षा और ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। TEPA के जरिए जहां दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, वहीं रक्षा और परमाणु ऊर्जा पर बातचीत यह संकेत देती है कि भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी अब बहुआयामी रूप ले रही है। आने वाले वर्षों में निवेश और रोजगार से जुड़े TEPA के लक्ष्यों को जमीन पर उतारना दोनों देशों के लिए इस साझेदारी की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

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