कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बढ़त ने राज्य की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। अगर भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज होती है, तो बंगाल का अगला ‘चीफ मिनिस्टर’ कौन होगा? सियासी गलियारों में सबसे ऊपर जिस नाम की चर्चा है, वह है शुभेंदु अधिकारी। कभी ममता बनर्जी के सबसे खास सिपहसालार रहे शुभेंदु अब उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं। आखिर क्यों शुभेंदु अधिकारी का पलड़ा मुख्यमंत्री की रेस में सबसे भारी नजर आ रहा है? आइए जानते हैं इसके पीछे के 5 बड़े समीकरण.
हिंदुत्व और सनातन का सबसे बड़ा चेहरा
शुभेंदु अधिकारी ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को भाजपा के कट्टर हिंदुत्व के चेहरे के रूप में स्थापित किया है। वे खुलकर सनातन धर्म की रक्षा की बात करते हैं और तुष्टीकरण की राजनीति पर ममता सरकार को घेरते रहे हैं। भाजपा के कैडर और कोर वोटर के बीच उनकी यह छवि उन्हें बाकी नेताओं से मीलों आगे ले जाती है।
ममता बनर्जी और अभिषेक पर सीधा प्रहार
शुभेंदु अधिकारी इकलौते ऐसे नेता हैं, जो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पर सबसे तीखे और सीधे हमले करते हैंव् भ्रष्टाचार, सिंडिकेट राज और भाई-भतीजावाद के खिलाफ उनकी आवाज ने जमीन पर भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम किया है।
मित शाह के साथ निकटता
चुनाव प्रचार 2026 के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी की केमिस्ट्री ने बहुत कुछ साफ कर दिया है। शुभेंदु ने कभी ममता बनर्जी को अपना गुरु माना था, लेकिन अब उनके राजनीतिक मार्गदर्शक अमित शाह बन चुके हैं। शाह के साथ मंच साझा करने से लेकर रणनीति बनाने तक, शुभेंदु हर जगह फ्रंट फुट पर नजर आये।
धरती पुत्र वाला दांव और बंगाल की अस्मिता
अमित शाह ने चुनाव के दौरान बार-बार एक ही बात दोहरायी- बंगाल का मुख्यमंत्री बंगाल का कोई धरती पुत्र ही बनेगा।शुभेंदु अधिकारी खुद को पूर्व मेदिनीपुर का ‘धरती पुत्र’ बताते हैं और उन्होंने ममता बनर्जी के ‘बाहरी’ वाले नारे की हवा निकालने के लिए खुद को बंगाली अस्मिता का रक्षक बताया।
जमीन पर मजबूत पकड़ और संगठन पर नियंत्रण
शुभेंदु अधिकारी न केवल एक फायरब्रांड नेता हैं, बल्कि वे एक कुशल संगठनकर्ता भी हैं। मेदिनीपुर से लेकर उत्तर बंगाल तक, पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम रही है। हालांकि, भाजपा आलाकमान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी नाम का ऐलान नहीं किया है।पार्टी के भीतर दिलीप घोष जैसे अन्य दिग्गज भी हैं, लेकिन मौजूदा माहौल और अमित शाह के संकेतों को देखें, तो शुभेंदु अधिकारी का पलड़ा सबसे भारी दिख रहा है. अब देखना यह है कि क्या दिल्ली दरबार उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाता है?