नई दिल्ली: भारत की स्टार एथलीट पिंकी बलहारा ने एशियन गेम्स में एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने एक ऐसे प्राचीन खेल में मेडल अपने नाम किया है, जिसका इतिहास करीब 3500 साल पुराना है। इस शानदार उपलब्धि के साथ ही उन्होंने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक जीत और उस प्राचीन खेल के बारे में।
कुराश में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय
पिंकी बलहारा ने एशियन गेम्स में कुराश (Kurash) खेल के महिलाओं के 78 किलोग्राम भार वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इसके साथ ही वह एशियन गेम्स के इतिहास में कुराश में एक से अधिक मेडल जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गई हैं। इससे पहले पिंकी ने साल 2018 के एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। एशियन गेम्स के इतिहास में कुराश में यह भारत का कुल तीसरा मेडल है।
क्वार्टर फाइनल में दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी को दी मात
इस बार के मुकाबले में पिंकी बलहारा ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने क्वार्टरफाइनल मुकाबले में एशियन चैंपियनशिप की सिल्वर मेडलिस्ट रहीं दक्षिण कोरिया की लिम गरम को 3-0 से करारी शिकस्त दी। इस शानदार जीत के साथ ही उन्होंने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की करते हुए अपना मेडल सुरक्षित कर लिया था। हालांकि, सेमीफाइनल मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिसके चलते वह अपने मेडल का रंग बदलने से चूक गईं और ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा।
क्या है 3500 साल पुराना खेल ‘कुराश’?
कुराश असल में रेसलिंग यानी कुश्ती का ही एक प्राचीन रूप है, जिसकी जड़ें लगभग 3500 साल पुरानी हैं। इस अनूठे खेल का उद्गम स्थल उजबेकिस्तान माना जाता है। इस खेल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पहलवान जैकेट पहनकर और उस पर एक ही रंग की बेल्ट बांधकर मुकाबले में उतरते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस खेल को जकार्ता में हुए एशियन गेम्स 2018 में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया था, जहां से इस खेल ने भारत में भी लोकप्रियता हासिल की।