अंतरराष्ट्रीय डेस्क: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में कॉकपिट के भीतर हुए कथित हमले के बाद विमान तेजी से नीचे गिरने लगा था। उस वक्त इजराइली यात्री और पेशे से प्लंबर यानिव हायून ने सूझबूझ और साहस दिखाते हुए हमलावर को काबू करने में मदद की और कुछ पलों के लिए विमान के कंट्रोल भी संभाले। अब उन्हें वैश्विक स्तर पर ‘हीरो’ के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें गले लगाया, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनकी जमकर तारीफ की।
कॉकपिट में क्या हुआ? हमले से शुरू हुआ संकट
रिपोर्ट के मुताबिक बोइंग 737 विमान के कॉकपिट में सह-पायलट (ओमानी नागरिक) नेरिया क्राउस ने कथित तौर पर कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया और विमान को नीचे की ओर क्रैश कराने की कोशिश की। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद भारतीय नागरिक कैप्टन स्मित मच्छार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे, जिससे केबिन में मौजूद लोग दखल दे सके। उस समय विमान की ऊंचाई तेजी से घट रही थी।
यानिव हायून ने कैसे बचाई जान?
हायून उन लोगों में शामिल थे जो कॉकपिट की ओर दौड़े।
- उन्होंने कथित हमलावर का सामना किया और उसे चोकहोल्ड में लेकर फ्लाइट कंट्रोल से दूर खींचा।
- इसके बाद दूसरे यात्री भी जुड़े और हमलावर को काबू करने में मदद की।
- हमलावर को हटाने के बाद हायून ने ध्यान विमान पर लगाया, जो गोता लगा रहा था। वे फ्लाइट डेक पर लौटे और कंट्रोल्स को पीछे की ओर खींचा।
- विमान सीधा होने लगा, तभी विमान में मौजूद एक अन्य ऑफ-ड्यूटी पायलट ने कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया।
तबुक में सुरक्षित लैंडिंग
फ्लाइट में सवार अन्य पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाला और उसे सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़कर सुरक्षित उतार दिया। यात्रियों ने बाद में इस घटना को अफरा-तफरी भरी जद्दोजहद बताया, जिसमें कैप्टन, यात्री, क्रू सदस्य और ऑफ-ड्यूटी पायलट सबने मिलकर विमान को सुरक्षित जमीन तक पहुंचाया। यात्रियों और क्रू ने कथित हमलावर को काबू में रखा।
नेतन्याहू से मुलाकात: खून के निशान वाली शर्ट में पहुंचे हायून
हायून बाकी यात्रियों के साथ इजराइल लौटे और बाद में प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मिले। उन्होंने मुलाकात में वही शर्ट पहनी थी जो हमले के समय उनके तन पर थी, और उस पर खून के निशान साफ दिख रहे थे। नेतन्याहू ने संकट के समय आगे आने के लिए उनकी तारीफ की और उन्हें गले लगाया।
“मैं ‘मेडे’ देखता हूं”: हायून ने बताया कैसे पता चला क्या करना है
जब नेतन्याहू ने पूछा कि उन्हें कैसे पता चला कि क्या करना है, तो हायून का जवाब था, “मैं ‘मेडे’ देखता हूं।” ‘मेडे’ हवाई हादसों पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज है। हायून ने बताया कि इस शो को देखने से उन्हें इमरजेंसी में विमान के व्यवहार की थोड़ी समझ मिली थी, और इसी वजह से कॉकपिट में पहुंचकर उन्होंने कंट्रोल को पीछे की ओर खींचा।
ट्रंप बोले: “पाइप उठाते-उठाते मजबूत हो जाते हैं”
ट्रंप ने भी हायून की सराहना की। उन्होंने कहा कि कभी विमान न उड़ाने के बावजूद हायून ने कंट्रोल स्टिक संभाली, उसे ऊपर खींचा और दुर्घटना से ठीक पहले विमान को सीधा कर लिया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जब आप दिन भर पाइप उठाते हैं, तो आप मजबूत हो जाते हैं। ट्रंप ने इसे “सबसे अद्भुत कहानी” बताया।
कौन हैं यानिव हायून?
- पेशे से प्लंबर और इजराइली नागरिक।
- दुबई से तेल अवीव की यात्रा कर रहे थे।
- फ्लाइट क्रू का हिस्सा नहीं थे, लेकिन कॉकपिट में हालात हिंसक होने पर आगे बढ़े।
एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| फ्लाइट | फ्लाईदुबई FZ1073 (बोइंग 737), दुबई से तेल अवीव |
| घटना | कॉकपिट में सह-पायलट द्वारा कैप्टन पर कथित हमला |
| घायल | कैप्टन स्मित मच्छार (भारतीय नागरिक) |
| हीरो | यानिव हायून, इजराइली प्लंबर |
| लैंडिंग | तबुक, सऊदी अरब |
| तारीफ करने वाले | बेंजामिन नेतन्याहू, डोनाल्ड ट्रंप |
कौन हैं यानीव हायून?
यानीव हायून इजरायल के नागरिक हैं और पेशे से प्लंबर हैं। वह फ्लाईदुबई की उस फ्लाइट में यात्री के तौर पर सफर कर रहे थे। वह विमान के क्रू का हिस्सा नहीं थे और उनके पास पायलट के तौर पर काम करने का अनुभव नहीं था। लेकिन कॉकपिट में हिंसक स्थिति पैदा होने और विमान के तेजी से नीचे जाने के बाद वह मदद के लिए आगे आए। उन्होंने कथित हमलावर को काबू करने में मदद की और इसके बाद विमान को स्थिर करने के प्रयास में कंट्रोल संभाला। बाद में फ्लाइट में मौजूद अन्य पायलटों ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लिया और उसे सऊदी अरब में सुरक्षित उतारने में मदद की।
कैप्टन स्मित मच्छार भी हुए घायल
इस घटना में फ्लाइट के भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार घायल हुए। रिपोर्टों के मुताबिक, कथित हमले के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिससे यात्रियों और क्रू के सदस्यों को अंदर पहुंचने का मौका मिला। इसके बाद यात्रियों, क्रू और ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने मिलकर स्थिति को संभालने में भूमिका निभाई। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद घटना में शामिल लोगों की बहादुरी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई।