नई दिल्ली। फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़े चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बुधवार को बड़ी राहत मिली। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके प्रति कड़ा रुख भी अपनाया और बकाया रकम चुकाने को लेकर सख्त सवाल किए। सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को फिलहाल राहत इस शर्त पर दी कि वह कोर्ट रजिस्ट्री में ₹1.15 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट बुधवार को और ₹85 लाख सोमवार, 12 अक्टूबर को जमा करेंगे। इस तरह उन्हें कुल ₹2 करोड़ जमा करने होंगे। अदालत ने साफ किया कि यह राहत कुछ निर्धारित शर्तों के आधार पर दी जा रही है और मामले की अगली सुनवाई करीब दो सप्ताह बाद होगी।
पुश्तैनी जमीन बेचकर चुकाएंगे बकाया
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से बताया गया कि वह अपनी पुश्तैनी जमीन बेच रहे हैं। संपत्ति की बिक्री से मिलने वाली रकम से शिकायतकर्ता की बकाया राशि चुकाने की बात कही गई। राजपाल यादव के वकील ने अदालत को बताया कि उनके पास तत्काल ₹1.15 करोड़ उपलब्ध हैं, जबकि संपत्ति की रजिस्ट्री पितृपक्ष के कारण अटकी हुई थी। वकील के मुताबिक, नवरात्र की शुरुआत में संपत्ति का सौदा पूरा होने की उम्मीद है। वकील ने यह भी कहा कि जिस संपत्ति को बेचा जा रहा है, उसकी कीमत ₹30 करोड़ से अधिक है और जरूरत पड़ने पर बैंक गारंटी देने की पेशकश भी की गई है।
CJI सूर्यकांत ने पूछा- बकाया तो दो करोड़ से ज्यादा है
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल किया कि राजपाल यादव पर बकाया राशि तो दो करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इस पर उनके वकील ने संपत्ति की कीमत और उससे मिलने वाली रकम का हवाला देते हुए भरोसा दिलाया कि बकाया राशि चुकाने की व्यवस्था की जा रही है। अदालत के सामने यह भी बताया गया कि शिकायतकर्ता को भुगतान करने के लिए तत्काल रकम जमा की जा रही है और बाकी राशि संपत्ति की बिक्री के बाद उपलब्ध कराई जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने ₹2 करोड़ जमा करने की शर्त रखी
अदालत के आदेश के मुताबिक, राजपाल यादव की ओर से ₹1.15 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट रजिस्ट्री में जमा किया जाना है। इसके अलावा ₹85 लाख का भुगतान सोमवार को डिमांड ड्राफ्ट के जरिए करने का आश्वासन दिया गया। अदालत ने कहा कि इन शर्तों को पूरा करने की स्थिति में राजपाल यादव को निर्धारित शर्तों के साथ राहत दी जाएगी।
‘अब तो पैसा ही लापता हो गया है’
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल की ₹7 करोड़ से अधिक की राशि बकाया है और अदालत को इस पहलू पर ध्यान देना चाहिए। राजपाल यादव के वकील ने मामले की परिस्थितियों को उनकी बदकिस्मती से जोड़ते हुए कहा कि वह ‘अता पता लापता’ नाम की फिल्म बनाना चाहते थे और यह एक ज्वाइंट वेंचर था। इस पर CJI सूर्यकांत ने फिल्म के नाम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब तो “पैसा ही लापता हो गया है।”
कोर्ट ने राजपाल यादव से पूछा- ‘फिल्म वगैरह बना रहे हैं या नहीं?’
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने खुद भी अदालत के सामने अपनी बात रखी। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उनसे पूछा कि क्या वह अभी कोई फिल्म बना रहे हैं। राजपाल यादव ने जवाब देते हुए कहा कि वह पिछले कई वर्षों से इस मामले को झेल रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 13 वर्षों में उन्होंने कई फिल्में की हैं, लेकिन इस विवाद के कारण उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस मामले का उनके करियर और फिल्मों पर भी असर पड़ा।
राजपाल यादव ने कोर्ट में बताई अपनी परेशानी
राजपाल यादव ने अदालत के सामने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि यह मामला उनके लिए लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ है। उन्होंने दावा किया कि कुल रकम को लेकर विवाद ने उनके कई वर्षों के काम को प्रभावित किया और उनकी ब्रांडिंग को भी नुकसान पहुंचा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी एक फिल्म को बड़े स्तर पर रिलीज किया जाना था, लेकिन विवाद के चलते उसे नुकसान उठाना पड़ा। राजपाल यादव ने मामले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से वह इस विवाद का सामना कर रहे हैं।
CJI ने कहा- ‘एक अच्छी सी मूवी बनाकर लोगों को एंटरटेन करो’
राजपाल यादव की बात सुनने के बाद CJI सूर्यकांत ने उनसे कहा कि अब एक अच्छी फिल्म बनाकर लोगों का मनोरंजन करें। इस पर राजपाल यादव ने बताया कि 2010 से 2016-17 के बीच जो कुछ हुआ, उस दौर को लेकर उन्होंने एक फिल्म का शीर्षक ‘16 सावन’ सोच रखा है। अदालत में अभिनेता की इस बातचीत से सुनवाई के दौरान कुछ हल्का माहौल भी बना।
राजपाल ने शिकायतकर्ता को लेकर भी रखी अपनी बात
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता के साथ अपने पुराने संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में शिकायतकर्ता उनके मित्र थे और उस समय उनके बीच पैसों को लेकर अलग तरह की बातचीत हुई थी। राजपाल ने दावा किया कि उन्होंने उस समय भी भुगतान करने की कोशिश की थी, लेकिन विवाद बढ़ता चला गया। उनके मुताबिक, इस मामले के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ पेशेवर और व्यक्तिगत स्तर पर भी नुकसान उठाना पड़ा।
कोर्ट ने सजा बढ़ाने की चेतावनी भी दी
हालांकि, राहत देने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव के मामले में कड़ा रुख अपनाया। CJI सूर्यकांत ने राजपाल यादव के वकील से पूछा कि उनके मुवक्किल को कितनी सजा सुनाई गई है। वकील ने बताया कि उन्हें तीन महीने की सजा सुनाई गई है। इस पर दूसरे पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि राजपाल यादव ने अभी तक एक दिन भी सजा नहीं काटी है और यह सजा सिविल जेल से संबंधित थी।
‘सजा दो साल तक बढ़ा देंगे’, कोर्ट ने दी चेतावनी
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने सजा बढ़ाने के लिए नोटिस जारी करने की बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि सजा को बढ़ाकर दो साल तक किया जा सकता है। राजपाल यादव की ओर से उनके वकील ने अदालत से उनकी नीयत और भुगतान की कोशिशों को ध्यान में रखने का अनुरोध किया। वकील ने कहा कि राजपाल यादव भुगतान करने की कोशिश कर रहे हैं और उनकी नीयत खराब नहीं है।
कोर्ट ने कहा- नेक नीयत से प्रभावित नहीं हैं
अदालत ने इस दलील पर भी सख्त प्रतिक्रिया दी। जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत राजपाल यादव के व्यवहार से संतुष्ट नहीं है।अदालत ने स्पष्ट किया कि वह न तो उनकी कथित नेक नीयत से प्रभावित है और न ही मामले की मेरिट के आधार पर उन्हें राहत दी जा रही है। कोर्ट ने कहा कि राहत देने का मुख्य उद्देश्य शिकायतकर्ता को उचित राहत दिलाना है।
अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राजपाल यादव को भुगतान की शर्तों के साथ राहत दी है। उन्हें तय समयसीमा के भीतर कुल ₹2 करोड़ की राशि कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई करीब दो सप्ताह बाद होगी। तब अदालत यह देख सकती है कि राजपाल यादव ने भुगतान से जुड़ी शर्तों का पालन किया या नहीं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला राजपाल यादव की फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़े वित्तीय विवाद और चेक बाउंस मामले से संबंधित है। लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद में अभिनेता पर भुगतान से जुड़ी देनदारी का मामला है। सुप्रीम कोर्ट की ताजा सुनवाई में एक तरफ अदालत ने भुगतान को लेकर सख्ती दिखाई, वहीं दूसरी तरफ राजपाल यादव को तत्काल रकम जमा करने और बाकी भुगतान की व्यवस्था करने के आश्वासन पर राहत भी दी। अब इस मामले में अगली सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी कि राजपाल यादव तय रकम जमा कर पाते हैं या नहीं और अदालत आगे क्या रुख अपनाती है।