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SIR के बाद अब ‘वापसी’ का अभियान: 20 राज्यों में छूटे और नए युवा मतदाताओं के नाम जोड़ेंगे BLO, मौके पर भरवाएंगे फॉर्म 6

चुनाव आयोग ने देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छूटे हुए पात्र मतदाताओं और पहली बार वोट डालने जा रहे युवाओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है।. . .

नई दिल्ली | चुनाव आयोग ने देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छूटे हुए पात्र मतदाताओं और पहली बार वोट डालने जा रहे युवाओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। यह कदम उन राज्यों के लिए उठाया गया है, जहां वोटर लिस्ट की SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हाल ही में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं। हालांकि आयोग ने साफ किया है कि यह आंकड़ा मसौदा सूचियों से हटाए गए नामों का है और इसका मतलब यह नहीं कि हटाए गए सभी लोग पात्र वोटर थे जिन्हें गलती से बाहर किया गया।

29 सितंबर के आदेश और 1 अक्टूबर की बैठक के बाद फैसला

निर्वाचन आयोग के 1 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक पत्र के मुताबिक, यह निर्देश 29 सितंबर 2026 के पूर्व आदेश और 1 अक्टूबर को सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) के साथ हुई अहम बैठक के क्रम में जारी हुआ है। आयोग का मुख्य उद्देश्य है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। आयोग ने बताया कि SIR के गणना चरण में BLO ने अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट मतदाताओं की पहचान कर सूची बनाई थी। इसे पंचायत भवनों, स्थानीय निकायों और बीडीओ कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर लगाया गया, राजनीतिक दलों और BLA से साझा किया गया और CEO की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई।

छूटे हुए मतदाताओं की होगी पहचान

आयोग ने रेखांकित किया कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाना सतत प्रक्रिया है। जिसका नाम अब तक नहीं जुड़ा या कट गया है, वह कभी भी आवेदन कर सकता है। विशेष अभियान के तहत CEO, जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को कड़े निर्देश दिए गए हैं। BLO वर्तमान मतदाता सूची का मिलान प्री-SIR सूची से करेंगे। जिन लोगों के नाम पुरानी सूची में थे पर नई में नहीं आ पाए, उनकी अलग सूची बनेगी और उन्हें दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया आसान की जाएगी।

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घर-घर पहुंचेंगे BLO, मौके पर भरा जाएगा फॉर्म 6

बूथ लेवल अधिकारी (BLO) चिन्हित मतदाताओं के घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति की पुष्टि करेंगे। पात्र पाए जाने पर मौके पर ही फॉर्म 6 भरवाकर नाम शामिल कराने की सुविधा होगी। अभियान को करीब एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य है और हर BLO को हफ्ते में कम से कम 20 से 25 मतदाताओं को कवर करने को कहा गया है। BLO अपनी सूची में हर मतदाता की स्थिति दर्ज करेंगे और यह भी दिखाएंगे कि किनसे फॉर्म 6 भरवाया जा चुका है। दौरे के दौरान मिलने वाले नए या पहली बार वोट डालने वाले युवाओं का फॉर्म 6 भी तुरंत भरा जाएगा।

पारदर्शिता के लिए राजनीतिक दलों को मिलेगी सूची

BLO यह सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) से साझा करेंगे। इसके बाद भरे हुए फॉर्म 6 और फील्ड वेरिफिकेशन रिपोर्ट ERO को सौंपी जाएगी, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के तहत फैसला लेंगे। प्रक्रिया पूरी होने पर बूथवार सूची दोबारा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को दी जाएगी।

गोवा में बाहर रह गए 97 पात्र नाम

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गोवा में पुनरीक्षण के दौरान “तार्किक विसंगतियों” के कारण कई मतदाताओं के नाम सूची से बाहर रह गए। उन्हें दस्तावेज और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया, जिसके बाद 649 लोग सामने आए। ERO और सहायक ERO की गहन जांच में 97 लोग सूची में शामिल होने के पूरी तरह पात्र पाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 11 से 17 फरवरी के बीच आठ बार पत्र भेजकर इन नामों को जोड़ने और पुराने निर्णय को पलटने की अनुमति मांगी, लेकिन कोई बदलाव नहीं हुआ और 21 फरवरी को जारी अंतिम सूची से ये 97 नाम बाहर ही रहे।

केंद्रीकरण पर उठे सवाल

पात्र मतदाताओं के नाम शामिल न होने से मतदाता सूचियों के केंद्रीकरण पर सवाल उठे हैं। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने अपने असहमति पत्र में भी यह मुद्दा उठाया था। गोवा के CEO के आंकड़ों के अनुसार, इन 97 मामलों में 88 लोगों का पंजीकरण हो चुका है, 6 विदेश में हैं और 3 पुर्तगाली पासपोर्ट धारक हैं। इन मामलों से साफ है कि अनजाने में छूटे पात्र नागरिकों और विशेष सत्यापन वाले मामलों के बीच सही फर्क करना कितना जरूरी है।

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