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SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के 9 बड़े फैसले: एजेंडा पहले जारी होगा, ईसीआईएनईटी की होगी जांच; कांग्रेस ने मांगा CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा

मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार, 26 सितंबर को कई अहम फैसलों का ऐलान किया. . .

नई दिल्ली: मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार, 26 सितंबर को कई अहम फैसलों का ऐलान किया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की बैठक के बाद आयोग ने SIR प्रक्रिया, Form 6, ECINET सिस्टम, मतदाताओं की सुनवाई और आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली से जुड़े कई बदलावों की जानकारी दी। आयोग ने कहा कि गैर-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं SIR के दौरान नोटिस पाने वाले कुछ मतदाताओं के लिए बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे और जरूरत पड़ने पर सुनवाई ऑनलाइन कराई जाएगी। इसके साथ ही ईसीआईएनईटी की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने का फैसला लिया गया है। आयोग के मुताबिक इस समिति में IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। इन फैसलों के बीच विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी जारी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने SIR को लेकर आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए आयोग की प्रक्रिया का बचाव किया है।

SIR विवाद के बीच क्यों अहम है यह बैठक?

शनिवार की बैठक ऐसे समय हुई जब चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों को लेकर मतभेद की खबरें सामने आई थीं। हाल की रिपोर्टों में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों में SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इसी विवाद के बीच आयोग ने शनिवार को अपने फैसलों के जरिए SIR प्रक्रिया और अपनी प्रशासनिक एवं तकनीकी व्यवस्था को लेकर कई स्पष्टीकरण दिए। आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए थे।

चुनाव आयोग के 9 बड़े फैसले

1. गैर-SIR अवधि में पुराने नियमों के मुताबिक Form 6

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि गैर-SIR अवधि में Form 6 का वही प्रारूप इस्तेमाल होगा जो Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित है। आयोग ने SIR के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे Form 6 से जुड़े विवाद पर कहा कि उसके साथ लगी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। लेकिन SIR के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए संबंधित नियमों के मुताबिक निर्धारित फॉर्म लागू रहेगा। The Indian Express

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Form 6 को लेकर विवाद क्या था?

Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़ा प्रमुख फॉर्म है। हाल में इसके एक हिस्से को लेकर विवाद सामने आया था, जिसमें SIR की पिछली मतदाता सूची से संबंधित जानकारी मांगे जाने पर सवाल उठे थे। रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस तरह के बदलाव को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि नियमों में बदलाव किए बिना Form 6 में ऐसा परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

2. ECINET की होगी स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा

आयोग ने जांच करेगी कि ECINET संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी। ECINET की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। यह समिति एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (Senior Deputy Election Commissioner) की अध्यक्षता में काम करेगी। इसमें IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। समिति यह जांच करेगी कि ECINET संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी। ECINET चुनाव प्रबंधन से जुड़ा एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे आयोग ने कई चुनावी IT एप्लीकेशन को एक प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए विकसित किया है।

3. SIR में नोटिस पाने वालों के घर जाएंगे BLO

SIR प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं को नाम मैप न होने या अन्य तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए गए हैं, उनके लिए आयोग ने प्रक्रिया को आसान बनाने की घोषणा की है। अब ऐसे मामलों में BLO मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटा सकेंगे। इसके बाद दस्तावेज ECINET पर अपलोड किए जाएंगे और संबंधित Electoral Registration Officer (ERO) उनके आधार पर निर्णय लेगा। इसका उद्देश्य यह है कि हर मतदाता को दस्तावेज जमा कराने के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

4. सुनवाई सामान्यतः कार्यालय में नहीं, जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन

आयोग ने कहा कि ऐसे मतदाताओं को सामान्य परिस्थितियों में ERO या AERO के कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल असाधारण परिस्थितियों में सुनवाई की जाएगी। आयोग ने यह भी कहा कि ऐसी सुनवाई को प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराया जाएगा और ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को भी अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है।

5. आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले साझा होगा

चुनाव आयोग ने अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। अब आयोग की बैठकों के लिए एजेंडा पहले से साझा किया जाएगा। इसके अलावा बैठकों की कार्यवाही का विवरण भी जारी किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय महत्वपूर्ण है जब आयोग के भीतर SIR से जुड़े निर्णयों को लेकर कथित मतभेदों की रिपोर्टें सामने आई हैं।

6. अधिकारियों की APAR समय पर पूरी होगी

आयोग ने अधिकारियों की Annual Performance Appraisal Reports (APAR) को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने का भी निर्देश दिया है। आयोग के अनुसार अधिकारियों की APAR प्रक्रिया 31 दिसंबर 2026 तक पूरी की जाएगी। इसका उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रिया में समयबद्धता सुनिश्चित करना बताया गया है।

7. अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर आयोग की मंजूरी जरूरी

आयोग ने अधिकारियों की विदेश यात्राओं को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिया है। अब ऐसी यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी आवश्यक होगी।इसके अलावा आयोग ने कहा है कि चुनाव आयुक्तों द्वारा अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।

8. दिल्ली में दावे और आपत्तियों की समयसीमा बढ़ी

दिल्ली में मतदाता सूची से संबंधित दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं नोटिस और दावों-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। इससे उन मतदाताओं को अतिरिक्त समय मिलेगा जो मतदाता सूची में अपने नाम को लेकर दावा या आपत्ति दर्ज कराना चाहते हैं।

9. महाराष्ट्र में भी बढ़ी समयसीमा

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध के बाद राज्य में भी समयसीमा बढ़ाई गई है। अब महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां 12 अक्टूबर 2026 तक दाखिल की जा सकती हैं। वहीं नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 कर दी गई है।

ECINET को लेकर विवाद क्यों उठा?

ECINET को लेकर विवाद तब और गंभीर हुआ जब चुनावी डेटा और मतदाता सूची से संबंधित डिजिटल प्रक्रियाओं पर सवाल उठे। एक रिपोर्ट के मुताबिक गोवा में 97 मतदाताओं ने ड्राफ्ट मतदाता सूची से अपना नाम हटाए जाने को चुनौती दी और अपने नाम दोबारा शामिल कराने में सफलता हासिल की। इसके बावजूद कथित तौर पर सॉफ्टवेयर सिस्टम में उनके नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाए। इसी तरह की चिंताओं के बीच आयोग ने अब ECINET की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। आयोग का कहना है कि फील्ड अधिकारियों को ECINET पर उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुरूप role-based access दिया गया है।

विपक्ष क्यों मांग रहा है CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा?

SIR विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने आयोग के भीतर कथित मतभेदों का हवाला देते हुए CEC के इस्तीफे की मांग की है। इससे पहले राहुल गांधी ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। वहीं तमिलनाडु में DMK नेता एमके स्टालिन और कर्नाटक के डीके शिवकुमार समेत कुछ अन्य विपक्षी नेताओं ने भी CEC के खिलाफ सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं। हालांकि, ये विपक्षी नेताओं के राजनीतिक दावे और मांगें हैं; इन्हें चुनाव आयोग के स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

BJP ने विपक्ष के आरोपों पर क्या कहा?

विपक्ष के आरोपों के जवाब में BJP ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव किया है। BJP नेताओं ने SIR से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि आयोग की प्रक्रिया कानून के अनुरूप है और निर्णय बहुमत/आयोगीय प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं। इस तरह SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच दो अलग-अलग दावे सामने हैं—विपक्ष आयोग की पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि BJP आयोग की प्रक्रिया का बचाव कर रही है।

क्या ये फैसले SIR विवाद को शांत कर पाएंगे?

शनिवार की घोषणाओं से आयोग ने तीन प्रमुख क्षेत्रों में सुधार का संकेत दिया है—मतदाताओं की सुविधा, तकनीकी व्यवस्था की समीक्षा और आयोग की आंतरिक पारदर्शिता। विशेष रूप से BLO द्वारा घर जाकर दस्तावेज जुटाने और ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था उन मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जिन्हें SIR प्रक्रिया के दौरान नोटिस मिले हैं। वहीं ECINET की स्वतंत्र समीक्षा तकनीकी प्रणाली से जुड़े सवालों की जांच का औपचारिक रास्ता उपलब्ध कराती है। लेकिन राजनीतिक विवाद पूरी तरह समाप्त होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आयोग के फैसलों और समीक्षा की रिपोर्ट के बाद सामने आने वाले तथ्य क्या होते हैं।

अब नजर ECINET समीक्षा और SIR प्रक्रिया पर

26 सितंबर की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने एक साथ कई महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। इनमें कुछ सीधे मतदाताओं से जुड़े हैं, जबकि कुछ आयोग की प्रशासनिक और तकनीकी कार्यप्रणाली से संबंधित हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ECINET की तकनीकी समीक्षा, SIR नोटिस पाने वाले मतदाताओं की प्रक्रिया और आयोग की बैठकों में एजेंडा एवं कार्यवाही को लेकर नई व्यवस्था अब आगे की निगरानी का केंद्र रहेंगी। वहीं CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्षी मांग और आयोग की ओर से SIR प्रक्रिया का बचाव—दोनों के बीच राजनीतिक विवाद फिलहाल जारी है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर चुनाव और मतदाता सेवाओं से संबंधित मौजूदा जानकारी भी उपलब्ध है। भारत निर्वाचन आयोग

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