नई दिल्ली/ग्रेटर नोएडा: यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे में 9 यात्रियों की मौत हुई, जबकि करीब 20 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। अब मामले की FIR में दर्ज घटनाक्रम ने हादसे को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। FIR में एक यात्री की शिकायत के आधार पर आरोप लगाया गया है कि बस से जलने की गंध आने की जानकारी ड्राइवर और कंडक्टर को दिए जाने के बावजूद बस को तत्काल नहीं रोका गया। इसके बाद आग तेजी से फैली और यात्रियों के लिए हालात बेकाबू हो गए।
पहले आई जलने की गंध, फिर उठने लगीं लपटें
FIR के मुताबिक, घटना रात करीब 11:30 बजे की है। बस संख्या BR32PA8647 नोएडा-आगरा मार्ग पर करीब 33वें किलोमीटर के पास पहुंची थी। इसी दौरान यात्रियों को ड्राइवर के केबिन की तरफ से कुछ जलने की गंध महसूस हुई। शिकायतकर्ता के अनुसार, यात्रियों ने ड्राइवर और कंडक्टर को इसकी जानकारी दी। आरोप है कि ड्राइवर ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और कहा कि बस में इस तरह की गंध आना सामान्य बात है। इसके कुछ ही समय बाद ड्राइवर की सीट के आसपास से आग की लपटें दिखाई देने लगीं।
यात्रियों ने बस रोकने को कहा, FIR में गंभीर आरोप
आग दिखाई देने के बाद बस के भीतर अफरा-तफरी मच गई। यात्रियों ने ड्राइवर से बस रोकने की गुहार लगाई। FIR में आरोप लगाया गया है कि ड्राइवर और कंडक्टर ने शुरुआत में बस रोकने से इनकार किया और यात्रियों को कथित तौर पर धमकाया। इसी दौरान आग तेजी से फैलती गई और बस के अंदर धुआं भरने लगा। स्लीपर बस का बंद और संकरा इंटीरियर यात्रियों के लिए बाहर निकलने की चुनौती को और बढ़ाता गया।हालांकि, ड्राइवर और कंडक्टर के व्यवहार से जुड़े ये आरोप FIR में दर्ज शिकायत पर आधारित हैं। मामले की पुलिस जांच के बाद ही इन आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।
आग लगते ही ड्राइवर-कंडक्टर के भागने का आरोप
FIR के अनुसार, आग विकराल होने के बाद ड्राइवर और कंडक्टर बस छोड़कर चले गए। मौके पर मौजूद लोगों और स्थानीय लोगों ने यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। बस में मौजूद फायर एक्सटिंग्विशर से आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह प्रभावी साबित नहीं हुआ। इसके बाद बस के अंदर से यात्रियों की आवाजें सुनाई देने पर बाहर मौजूद लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर अंदर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की।
खिड़की तोड़कर यात्रियों को निकालने की कोशिश
रेस्क्यू के दौरान स्थिति बेहद मुश्किल थी। आग और धुएं के कारण बस के भीतर पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो गया था। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने किसी तरह खिड़कियों के शीशे तोड़े और अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का प्रयास किया। पुलिस और बचाव दल के पहुंचने के बाद राहत एवं बचाव अभियान तेज किया गया। कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया।
‘मैं सो रही थी, अचानक आग लगने का शोर हुआ’
हादसे में बची यात्री रेखा भारद्वाज ने बताया कि जब आग लगी, तब वह बस में सो रही थीं। उनके मुताबिक, अचानक शोर सुनाई दिया कि बस में आग लग गई है और सभी लोग बाहर निकलें। रेखा के अनुसार, बाहर निकलने की कोशिश के दौरान वह बस के अंदर ही गिर गईं। उन्होंने बताया कि काफी देर तक वह पेट के बल पड़ी रहीं और भगदड़ के बीच कई लोग उनके ऊपर से गुजरते रहे। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पति बस से बाहर नहीं निकल सके और हादसे के बाद उन्हें उनके बारे में जानकारी नहीं थी।
‘ड्राइवर बस छोड़कर भाग गया’
रेखा ने आरोप लगाया कि आग लगने के बाद ड्राइवर बस छोड़कर भाग गया था। उन्होंने बताया कि कुछ समय तक उन्हें समझ ही नहीं आया कि उनके साथ क्या हुआ। बाद में उन्होंने खुद को सड़क पर पड़ा पाया। रेखा अपने पति के साथ महोबा जा रही थीं। उनके मुताबिक, आग बस के आगे की तरफ ड्राइवर की सीट के आसपास से शुरू हुई और देखते ही देखते धुआं पूरे यात्री हिस्से में फैल गया।
करीब 35 यात्रियों के सवार होने की जानकारी
यह बस नोएडा से महोबा जा रही थी और उसमें करीब 35 यात्री सवार बताए गए थे। आग लगने के बाद कुछ यात्रियों ने बस से कूदकर अपनी जान बचाई, जबकि कुछ को स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाला। लेकिन 9 यात्री बस से बाहर नहीं निकल सके और उनकी मौत हो गई।
सीएम योगी ने मुआवजे का किया ऐलान
हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। जानकारी के अनुसार, मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने तथा घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
हादसे की जांच में अब इन सवालों के जवाब जरूरी
इस दुर्घटना के बाद जांच एजेंसियों के सामने कई अहम सवाल हैं—बस से जलने की गंध आने के बाद उसे तुरंत क्यों नहीं रोका गया? आग आखिर किस वजह से लगी? क्या बस में अग्निशमन उपकरण काम कर रहे थे? यात्रियों के लिए आपातकालीन निकास की स्थिति कैसी थी? और आग लगने के बाद ड्राइवर-कंडक्टर की भूमिका क्या रही? पुलिस अब FIR में लगाए गए आरोपों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, बस की तकनीकी जांच और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। फिलहाल FIR में सामने आए आरोपों को जांच का विषय माना जा रहा है। हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।