मॉस्को | रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन संघर्ष खत्म कराने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की है। इसी के साथ उन्होंने पश्चिमी देशों को चेतावनी दी कि अगर रूसी क्षेत्र पर सीधा हमला हुआ, तो रूस अपने पास मौजूद सभी हथियारों के इस्तेमाल के विकल्प पर विचार करेगा।
“मोदी को संघर्ष खत्म होने में दिलचस्पी”
पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण और व्यक्तिगत रूप से अच्छे संबंधों के बावजूद मोदी उन विश्व नेताओं में हैं जो लगातार यूक्रेन संघर्ष खत्म करने का सवाल उठाते हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री की इसमें गहरी रुचि है और उनके पास दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान खोजने वाले अच्छे विचार हैं। पुतिन ने माना कि मोदी तटस्थ रुख रखते हैं, लेकिन संघर्ष समाप्त कराने में उनकी दिलचस्पी है। उन्होंने इसके लिए आभार भी जताया।
वाल्दाई क्लब में बोले पुतिन: “यह डराना नहीं, जवाब है”
गुरुवार को वाल्दाई क्लब के मंच पर पुतिन से पूछा गया कि क्या रूस और NATO युद्ध के करीब हैं। उन्होंने कहा कि यह धमकी नहीं, बल्कि रूस को डराने की कोशिश का जवाब है। पुतिन ने साफ किया कि रूस यूरोपीय देशों पर हमला करने की योजना नहीं बना रहा, लेकिन कालिनिनग्राद या किसी अन्य रूसी क्षेत्र पर सीधा हमला हुआ तो सभी हथियारों के इस्तेमाल का सवाल “अनिवार्य रूप से और तुरंत” उठेगा। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल होगा या नहीं। उनके मुताबिक रूस के पास ऐसे हथियार हैं “जो किसी और के पास नहीं हैं” और हमले की स्थिति में तय होगा कि कौन-से इस्तेमाल हों।
पुतिन ने पश्चिमी देशों और यूरोप पर तनाव बढ़ाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश रूस के साथ युद्ध की तैयारी की बात कर रहे हैं, बाल्टिक सागर में सैन्य अभ्यास कर रहे हैं और रूसी जहाज जब्त कर रहे हैं।
कालिनिनग्राद को लेकर बढ़ा तनाव
यह बयान मॉस्को की उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि अगर NATO का कोई सदस्य कालिनिनग्राद को रूस के बाकी हिस्से से काटने की कोशिश करेगा, तो रूस परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से भी पीछे नहीं हटेगा। इस सप्ताह कई यूरोपीय देशों में रूसी दूतावासों ने दावा किया कि मॉस्को के पास जानकारी है कि NATO कालिनिनग्राद की हवाई और नौसैनिक नाकाबंदी की तैयारी कर रहा है। रूस ने यूरोपीय नेताओं पर “खतरनाक खेल” खेलने का आरोप लगाया और रूस के किसी देश पर हमला करने या ड्रोन व तोड़फोड़ से अस्थिरता फैलाने के दावों को बेतुका बताया। कालिनिनग्राद पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित रूस का अलग क्षेत्र है, जहां बाल्टिक नौसेना का मुख्य अड्डा और अन्य सैन्य ठिकाने हैं। यहां परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इस्कंदर मिसाइलें भी तैनात हैं। पश्चिमी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, रूस ने किसी NATO देश पर हमला किया तो ये ठिकाने शुरुआती लक्ष्यों में हो सकते हैं।
NATO का जवाब: हम रक्षात्मक गठबंधन
NATO प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने बुधवार को पुष्टि की कि रूस ने गठबंधन को लिखित संदेश भेजा है। उन्होंने बल प्रयोग की धमकी और गैर-जिम्मेदाराना परमाणु बयानबाजी की कड़ी निंदा की और कहा कि NATO कालिनिनग्राद को निशाना नहीं बना रहा। गठबंधन के जवाब के मुताबिक उसकी कोई गतिविधि या अभ्यास रूस के किसी हिस्से के लिए खतरा नहीं है। महासचिव मार्क रुटे ने यूरोन्यूज से कहा कि NATO का जवाब “संक्षिप्त और स्पष्ट” था। गठबंधन ने रूस से परमाणु धमकी बंद करने और यूक्रेन के खिलाफ “बिना उकसावे के आक्रामक युद्ध” रोकने को कहा है। यह युद्ध अब पांचवें वर्ष में है। रुटे के अनुसार रूस यूक्रेन की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के प्रयासों को कमजोर करने और पश्चिमी देशों में फूट डालने की कोशिश कर रहा है। यूरोपीय नेताओं और खुफिया एजेंसियों की चेतावनी है कि यूक्रेन में जीत मिली तो रूस कुछ वर्षों में किसी और देश पर हमले को तैयार हो सकता है। हाल के महीनों में NATO सहयोगियों ने बाल्टिक सागर में कई अभ्यास किए हैं और अक्टूबर में और प्रस्तावित हैं। संचार केबल और पाइपलाइनों की सुरक्षा के लिए NATO ने पिछले साल वहां ऑपरेशन बाल्टिक सेंट्री शुरू किया था।
भारत के साथ गलियारों और आर्थिक सहयोग पर बात
पुतिन ने भारत के साथ परिवहन और आर्थिक सहयोग की संभावनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रूस ने एक चीनी कंटेनर जहाज और दक्षिण कोरियाई जहाज के साथ पायलट परियोजना की है और भारतीय साझेदारों से भी बातचीत जारी है। रूस इन अंतरराष्ट्रीय गलियारों के संयुक्त इस्तेमाल के पक्ष में है। उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे पर उन्होंने कहा कि इसका विकास केवल रूस पर निर्भर नहीं है। रूस इसके लिए ऋण देने को तैयार है, लेकिन ईरान को अभी अपने हिस्से का काम पूरा करना है। गलियारे का एक हिस्सा अजरबैजान से गुजरेगा; राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से संपर्क में रहने की बात कहते हुए पुतिन ने बताया कि इसमें कोई समस्या नहीं और अजरबैजान सहमत है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ आर्थिक सहयोग की क्षमता परिवहन और लॉजिस्टिक्स तक सीमित नहीं है।