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फॉर्म-6 पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: SIR विवाद के बीच Annexure-D की अनिवार्यता खत्म, नए वोटरों को नहीं देना होगा अतिरिक्त घोषणा पत्र

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर छिड़े विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। अब Form 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र यानी Annexure-D देना जरूरी नहीं होगा. . .

नई दिल्ली | मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर छिड़े विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। अब Form 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र यानी Annexure-D देना जरूरी नहीं होगा रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने 30 सितंबर को इस बदलाव की जानकारी दी है।

क्या है आयोग का ताजा फैसला?

Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। ताजा फैसले के मुताबिक SIR से जुड़े अतिरिक्त घोषणा पत्र को Form 6 के साथ अनिवार्य रूप से जमा करने की जरूरत नहीं होगी। यानी नए वोटरों को अब यह अतिरिक्त जानकारी नहीं देनी होगी।हालांकि, मतदाता पंजीकरण के लिए लागू अन्य नियम और जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया पहले की तरह ही रहेंगे।

क्या था Annexure-D और क्यों उठा विवाद?

चुनाव आयोग का कहना था कि Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR के तहत उसके साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र (एनेक्सर D) जोड़ा गया था। आयोग के 24 जून 2025 के बिहार SIR निर्देशों में नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को Form 6/Form 8 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र भरना जरूरी बताया गया था। इस घोषणा पत्र में आवेदक को बताना होता था कि पिछले SIR के समय उसके माता-पिता या दादा-दादी मतदाता सूची में शामिल थे या नहीं। इसी प्रावधान पर विपक्ष और पूर्व चुनाव अधिकारियों ने सवाल उठाए थे।

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कांग्रेस और विपक्ष की आपत्ति

कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया में नए वोटरों को जोड़ने के लिए Form 6 से जुड़े बदलावों पर चिंता जताई थी। केरल से सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर ऑनलाइन Form 6 में जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा को वापस लेने और इससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की थी।

आयोग के भीतर भी मतभेद की खबरें

रिपोर्टों के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने भी सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की असहमतियों का समर्थन किया था। इसके बाद आयोग सूत्रों ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दोनों चुनाव आयुक्तों ने विभिन्न राज्यों के SIR आदेशों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी।

आयोग ने पहले क्या सफाई दी थी?

आयोग ने कहा था कि Form 6 या Form 8 के साथ Additional Declaration Form जमा करने वाले आवेदक को कोई दूसरा दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी, और यह व्यवस्था मतदाताओं की सुविधा के लिए थी। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए भी इस व्यवस्था का बचाव किया था।

SIR की पृष्ठभूमि

SIR का मकसद मतदाता सूची को सही बनाना है, यानी मृत, स्थायी रूप से शिफ्ट हो चुके, डुप्लीकेट और गैर-नागरिक मतदाताओं के नाम हटाना और पात्र नागरिकों को छूटने से बचाना है। 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने SIR को जनप्रतिनिधित्व कानून के अनुरूप और आयोग के वैधानिक अधिकार के भीतर बताया था।

नए वोटरों के लिए इसका मतलब

इस फैसले से नए मतदाताओं को Form 6 भरते समय अलग से घोषणा पत्र देने की बाध्यता से राहत मिलेगी। हालांकि आयोग की ओर से पूरे आदेश का विस्तृत ब्योरा सामने आने पर स्थिति और साफ होगी।

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