लखनऊ/अमरोहा। क्रिकेट के मैदान पर अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को परेशान करने वाले भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी अब राजनीति की पिच पर उतरेंगे या नहीं, इसे लेकर उत्तर प्रदेश में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। 20 सितंबर को दिल्ली में शमी की राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। जयंत चौधरी ने भी इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की है। सबसे ज्यादा चर्चा अमरोहा सदर विधानसभा सीट को लेकर है। हालांकि, अभी तक न तो शमी ने चुनाव लड़ने की घोषणा की है और न ही RLD ने उनकी उम्मीदवारी की आधिकारिक पुष्टि की है। ऐसे में फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक एंट्री के तौर पर ही देखा जा रहा है।
जयंत चौधरी से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल
मोहम्मद शमी और जयंत चौधरी की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। मुलाकात की तस्वीर सामने आते ही अमरोहा से लेकर लखनऊ तक शमी के संभावित राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बातचीत में अमरोहा से विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना पर चर्चा हुई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि बातचीत शमी के अलावा उनके बड़े भाई हसीब अहमद को चुनावी मैदान में उतारने की संभावना को लेकर भी हुई है। हालांकि, इन दावों की दोनों पक्षों से आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अमरोहा सदर सीट ही क्यों चर्चा में?
मोहम्मद शमी का संबंध अमरोहा से है। वह अमरोहा सदर तहसील के सहसपुर अलीनगर के रहने वाले हैं। यही वजह है कि अगर वह राजनीति में उतरते हैं तो अपने गृह क्षेत्र से सियासी पारी शुरू करने की संभावना को लेकर चर्चा हो रही है। NDTV India राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, गठबंधन में सीटों के बंटवारे की स्थिति में अमरोहा सदर सीट RLD के हिस्से में आ सकती है। इसी संभावना ने शमी के नाम को लेकर अटकलों को और हवा दी है। हालांकि, सीट बंटवारे और उम्मीदवार के नाम को लेकर अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।
शमी खुद उतरेंगे या भाई हसीब को मिलेगा मौका?
मोहम्मद शमी की राजनीतिक एंट्री को लेकर एक और चर्चा उनके बड़े भाई हसीब अहमद को लेकर है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, शमी के खुद चुनाव लड़ने के बजाय उनके भाई को अमरोहा सदर से मैदान में उतारने की संभावना पर भी चर्चा है। हसीब का नाम पहले भी अमरोहा की राजनीति में चर्चा में रहा है। सितंबर की एक रिपोर्ट में उनके RLD के टिकट पर अमरोहा से चुनाव लड़ने की संभावनाओं का जिक्र किया गया था। हालांकि, हसीब की ओर से भी अभी कोई अंतिम चुनावी घोषणा नहीं हुई है। यानी फिलहाल अमरोहा की सियासी पिच पर दो संभावनाओं की चर्चा है—शमी खुद मैदान में उतरें या परिवार की ओर से हसीब अहमद को मौका मिले।
अमरोहा सीट का सियासी गणित भी अहम
अमरोहा सदर सीट लंबे समय से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के महबूब अली लगातार पांच चुनावों से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में शमी या उनके परिवार के किसी सदस्य की संभावित एंट्री से इस सीट पर राजनीतिक मुकाबले को लेकर चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हुई है। 1रिपोर्ट्स में अमरोहा को मुस्लिम और जाट आबादी वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया गया है। ऐसे में संभावित उम्मीदवारों और गठबंधन के समीकरणों को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति पर नजर बनी हुई है।
शमी की क्रिकेट से राजनीति तक की कहानी?
मोहम्मद शमी लंबे समय से भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर चल रहे हैं और उनकी क्रिकेट में वापसी को लेकर भी चर्चा होती रही है। इसी बीच जयंत चौधरी से मुलाकात ने उनके करियर को लेकर एक बिल्कुल अलग तरह की चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि, क्रिकेट से राजनीति में आने का फैसला शमी ने सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्ट्स में भी उनकी संभावित उम्मीदवारी को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। AABP News+1
तस्वीर सामने आई, लेकिन ‘फाइनल टिकट’ अभी नहीं
जयंत चौधरी के साथ शमी की तस्वीर ने जरूर राजनीतिक अटकलों को तेज किया है, लेकिन अमरोहा सदर सीट से शमी की उम्मीदवारी अभी फाइनल नहीं मानी जा सकती। न शमी की ओर से कोई औपचारिक घोषणा हुई है और न RLD ने उम्मीदवार के तौर पर उनका नाम घोषित किया है। इसलिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मोहम्मद शमी खुद क्रिकेट की पिच से राजनीति की पिच पर उतरेंगे, या फिर उनके भाई हसीब अहमद अमरोहा से RLD का चेहरा बनेंगे? इसका जवाब आने वाले दिनों में पार्टी और शमी की ओर से मिलने वाली आधिकारिक घोषणा से ही साफ होगा।