नई दिल्ली। सबरीमाला मामले पर सुनवाई के दौरान बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्यीय संविधान पीठ के सामने संवैधानिक नैतिकता पर जोरदार बहस हुई। एक मौका ऐसा भी आया जब बेंच से लेकर वकीलों तक में लगभग आम सहमति नजर आ रही थी।
हमारे सहयोगी अखबार टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) की ओर से संविधान पीठ से पूछा गया कि संविधान के तहत हर संप्रदाय को ‘सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता’ के तहत सार्वजनिक नग्नता को अपराध मानने के बावजूद क्या अदालतें जैन धर्म के दिगंबर संप्रदाय के नग्न साधुओं को सामने आने पर बैन लगा सकती हैं?
‘कुछ धार्मिक विधियां न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं’
इस मामले में त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश कर रहे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कुछ उदाहरणों के हवाले से अदालत में तर्क दिया कि कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जो न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं आ सकते।
अभिषेक मनु सिंघवी, टीडीवी के वकील ने कहा इसमें कोई संदेह नहीं कि ज्यादातर समाजों में नग्नता सभ्य बर्ताव के विपरीत और घृणित मानी जाती है। फिर भी क्योंकि दिगंबर जैन प्रथाओं में नग्न रहना और नग्न अवस्था में ही सार्वजनिक रूप से घूमना धर्म के मूल रूप में निर्वाद रूप से स्वीकार्य है,इसलिए इसे आर्टिकल 25 के तहत खत्म नहीं किया जा सकता।
सॉलिसिटर जनरल ने नागा साधुओं का उदाहरण दिया
इसपर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों से सहमति जताई और ‘नागा साधुओं’ का उदाहरण सामने रखा, जो सार्वजनिक रूप से नग्न होकर निकलते हैं और हिंदू धर्म में उनका अपना खास महत्त्व और उनके प्रति एक विशेष श्रद्धा भाव देखा जाता है।
‘लाखों श्रद्धालुओं की आस्था पर फैसला देने मुश्किल काम’
इस दौरान एक ऐसा मौका भी आया जब भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत को कहना पड़ा, ‘किसी संवैधानिक कोर्ट के लिए सबसे मुश्किल काम यह फैसला देना होता है कि लाखों श्रद्धालुओं की सदियों पुरानी आस्था सही है या गलत।’
जस्टिस एमएम सुंद्रेश ने भी सीजेआई से जताई सहमति
इस दौरान जस्टिस एमएम सुंद्रेश ने सीजेआई की बातों से सहमति जताते हुए कहा,’वह भी बिना उन लाखों श्रद्धालुओं के विचारों को सुने हुए और पूरी तरह से पीआईएल याचिकाकर्ताओं, राज्य और धार्मिक संगठनों की याचिका के आधार पर।’
नेपाल सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो चुकी है ऐसी याचिका
पिछले साल सितंबर में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में नागा साधुओं पर प्रतिबंध लगाने का मामला आया भी था।
याचिकाकर्ताओं की आपत्ति महाशिवरात्रि के दौरान नागा साधुओं के काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में प्रवेश करने को लेकर थी।
याचिकाकर्ताओं का दावा था कि सार्वजनिक रूप से नागा साधुओं की नग्नता के चलते श्रद्धालुओं को दिक्कत होती है।
लेकिन, नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को ही खारिज कर दिया।
सबरीमाला केस की सुनवाई का बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में चौथा दिन था। इस मामले की सुनवाई करने वाले 9 जजों की संवैधानिक बेंच में ये जज हैं-
सीजेआई सूर्यकांत
जस्टिस बीवी नागरत्ना
जस्टिस एमएम सुंद्रेश
जस्टिस अहसनुद्दीन अमानुल्लाह
जस्टिस अरविंद कुमार
जस्टिस ए जॉर्ज मसीह
जस्टिस प्रसन्ना बी वाराले
जस्टिस आर महादेवन
जस्टिस जॉयमाल्या बागची