नई दिल्ली। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले संगठित साइबर गिरोहों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने शुक्रवार को बताया कि ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ के तहत 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान हरियाणा और कोलकाता से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
20 राज्यों में एक साथ कार्रवाई, डिजिटल सबूतों की तलाश
सीबीआई ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े कई मामलों की जांच अपने हाथ में लेने के बाद यह व्यापक अभियान शुरू किया। जांच एजेंसी ने तीन प्रमुख मामलों में वित्तीय लेन-देन और तकनीकी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया। इसके आधार पर देशभर में तलाशी अभियान चलाया गया। जांच के दौरान बैंक खातों, ऑनलाइन अकाउंट एक्सेस, लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की गई। एजेंसी का उद्देश्य ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क का पता लगाने के साथ-साथ गिरोह के संचालकों और उसके लाभार्थियों की पहचान करना है।
तीन मामलों में करोड़ों की ठगी, पीड़ितों को महीनों बनाया ‘डिजिटल बंदी’
सीबीआई के अनुसार, जांच के दायरे में आए मामलों में ठगी की रकम करोड़ों रुपये में है। बिट्स पिलानी से जुड़े मामले में पीड़ित को कथित तौर पर करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। पुलिस अधिकारी बनकर आए साइबर अपराधियों ने उससे करीब 7.67 करोड़ रुपये की ठगी की। गुजरात के मामले में भी पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उससे करीब 19.24 करोड़ रुपये की रकम ठगी गई। वहीं, कर्नाटक में दर्ज मामले में पीड़ित को करीब एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 15.45 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी की गई।
छापेमारी में बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस जब्त
89 ठिकानों पर हुई तलाशी के दौरान सीबीआई ने बैंकिंग दस्तावेज, खातों से जुड़े रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही अन्य सामग्री जब्त की है। एजेंसी अब जब्त किए गए डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कर रही है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि साइबर अपराधियों ने राज्यों की सीमाओं के पार ठगी की रकम को किस तरह ट्रांसफर और छिपाने का नेटवर्क तैयार किया था।
ठगी की रकम घुमाने में भूमिका, तीन आरोपी गिरफ्तार
सीबीआई ने ऑपरेशन के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में इन आरोपियों की कथित भूमिका ठगी की रकम को बैंक खातों में लेने, अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और आगे भेजने से जुड़ी सामने आई है। हरियाणा के रहने वाले आकाश के बैंक खाते में कथित तौर पर ठगी की रकम में से 1.95 करोड़ रुपये आए थे। जांच के मुताबिक, उसने यह खाता खुद खोला था और उसी दिन रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी। सीबीआई के अनुसार, यह ठगी की रकम को आगे पहुंचाने में उसकी कथित सीधी भूमिका का संकेत देता है।
कोलकाता के कारोबारी खाते में पहुंचे 1.5 करोड़
कोलकाता के राजा करमाकर की फर्म के खाते में कथित तौर पर ठगी की रकम में से 1.5 करोड़ रुपये जमा हुए थे। एजेंसी इस रकम के लेन-देन की भी जांच कर रही है। वहीं, ज्योति रानी के खाते में भी ठगी की रकम का कुछ हिस्सा पहुंचा था। सीबीआई के अनुसार, उसने कथित तौर पर रकम का कुछ हिस्सा नकद निकाला, जबकि बाकी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
ऐसे होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर साइबर फ्रॉड
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का ऐसा तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, सरकारी अधिकारी या किसी अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसी का कर्मचारी बताकर लोगों को डराते हैं। इसके बाद पीड़ित को किसी कथित अपराध में फंसने या गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता है।
ठग वीडियो कॉल या फोन के जरिए पीड़ित पर लगातार दबाव बनाते हैं और उससे बैंक खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं। कई मामलों में पीड़ितों को लंबे समय तक ऑनलाइन संपर्क में रखकर मानसिक दबाव बनाया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद CBI का सख्त रुख
डिजिटल अरेस्ट से जुड़े बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीबीआई ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे अपराधों में शामिल लोगों और उन्हें मदद देने वाले बड़े नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एजेंसी के मुताबिक, ऑपरेशन चक्र-VI के तहत अभी कार्रवाई खत्म नहीं हुई है। जांचकर्ता नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
बड़े साइबर नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश
सीबीआई का कहना है कि जब्त किए गए बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच के आधार पर इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची और इस नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य लोग कौन हैं।सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड और संगठित साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।