नई दिल्ली। नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड से मची तबाही के बीच अब पड़ोसी क्षेत्र तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। गुरुवार को तिब्बत में रिक्टर स्केल पर 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया। हालांकि, शुरुआती जानकारी के मुताबिक अभी तक भूकंप से किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना सामने नहीं आई है।
दोपहर 1:46 बजे हिली धरती
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, तिब्बत में भूकंप गुरुवार दोपहर करीब 1 बजकर 46 मिनट पर आया। भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 14 किलोमीटर नीचे बताया गया है।NCS के मुताबिक भूकंप का अक्षांश 31.479° उत्तर और देशांतर 80.370° पूर्व दर्ज किया गया। वहीं, जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) ने भी भूकंप की तीव्रता 5 बताई है, हालांकि उसने इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर बताई है।
नेपाल में महाआपदा के बीच भूकंप से बढ़ी चिंता
तिब्बत में भूकंप ऐसे समय आया है जब नेपाल अभी भी विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड से उबरने की कोशिश कर रहा है। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। आपदा के बाद सेना और पुलिस की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। कई इलाकों में लापता लोगों की तलाश की जा रही है और प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी है।
नेपाल में मृतकों का आंकड़ा 1,243 के पार
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से अब तक 1,243 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 5 हजार से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।
भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और पहाड़ी क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने से कई कस्बों, घाटियों और संपर्क मार्गों को भारी नुकसान पहुंचा है।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में भी रेस्क्यू ऑपरेशन
आपदा के बाद कई जगहों पर राहत और बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। भारतीय सेना की विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम भी एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने के अभियान में जुटी है। नेपाल और भारत की एजेंसियां प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
भारत ने भेजी राहत सामग्री की पांचवीं खेप
नेपाल की मुश्किल घड़ी में भारत की ओर से राहत एवं बचाव प्रयासों में मदद जारी है। भारत ने 11 विशेषज्ञों की टीम के साथ करीब 5.5 टन राहत सामग्री और दवाओं की पांचवीं खेप नेपाल भेजी है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संकट की इस घड़ी में भारत की सहायता के लिए धन्यवाद भी दिया है।
बाढ़ की वजहों पर उठे सवाल, क्लाइमेट चेंज का मुद्दा
नेपाल में आई इस भयावह बाढ़ के कारणों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। नेपाली संसद में प्रधानमंत्री बालेन शाह ने आपदा के पीछे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को एक महत्वपूर्ण कारण बताया। उन्होंने कहा कि भोटकोशी नदी में आया उफान सामान्य बारिश का नतीजा नहीं था। उनका कहना था कि हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के लिए जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरे लगातार बढ़ रहे हैं।
भूकंप और बाढ़ के बीच बढ़ी हिमालयी क्षेत्र की चिंता
तिब्बत में आए भूकंप और नेपाल में हुई भीषण बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक आपदाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है। फिलहाल तिब्बत में आए 5 तीव्रता के भूकंप से बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, जबकि नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। आने वाले समय में लापता लोगों की तलाश और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।