नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के हजारों करोड़ रुपये के घोटाले में वांछित भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी जल्द ही भारतीय कानून के शिकंजे में आ सकता है। भारत और बेल्जियम के बीच हुई उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत में बेल्जियम सरकार ने चोकसी को भारत भेजने के मुद्दे पर सकारात्मक रुख दिखाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां उसे वापस लाने के लिए कूटनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं।
चोकसी की वापसी भारत की शीर्ष प्राथमिकता
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत ने स्पष्ट किया कि मेहुल चोकसी को देश वापस लाकर उस पर कानूनी कार्रवाई करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। बेल्जियम के सकारात्मक रुख से भारत की कोशिशों को नया बल मिला है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस सहमति के बावजूद प्रत्यर्पण तुरंत संभव नहीं होगा, क्योंकि इस प्रक्रिया को बेल्जियम की अदालतों और कानूनी औपचारिकताओं से होकर गुजरना होगा।
पीएनबी घोटाला और विदेश भागने की कहानी
मेहुल चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक के साथ 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है। जनवरी 2018 में यह महाघोटाला सार्वजनिक होने से ठीक पहले चोकसी देश छोड़कर फरार हो गया था। भारत से निकलने के बाद उसने कैरेबियाई देश एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता ले ली थी, ताकि वह भारतीय कानून से बच सके।
एंटीगुआ से डोमिनिका और बेल्जियम तक का कानूनी जाल
चोकसी का मामला कई देशों के कानूनों में उलझा हुआ रहा है:
- एंटीगुआ और डोमिनिका विवाद: साल 2021 में वह रहस्यमय तरीके से एंटीगुआ से गायब होकर पड़ोसी देश डोमिनिका पहुंच गया था, जहां उसकी गिरफ्तारी के बाद प्रत्यर्पण को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली थी।
- बेल्जियम में गतिविधियां: अप्रैल 2025 में बेल्जियम के एंटवर्प शहर में अधिकारियों ने चोकसी को उस समय हिरासत में लिया था, जब वह अपनी पत्नी प्रीति के साथ वहां रह रहा था। हालांकि, बाद में वह फिर एंटीगुआ लौट गया।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घेराबंदी: भारतीय जांच एजेंसियां उसकी बेनामी संपत्तियों को जब्त करने और उसे भारत की अदालतों में पेश करने के लिए इंटरपोल और कई देशों की सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
नीरव मोदी पर भी कड़ा शिकंजा
पीएनबी घोटाले का दूसरा मुख्य आरोपी और मेहुल चोकसी का भांजा नीरव मोदी भी विदेश में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहा है। वह लंदन की जेल में बंद है और भारत सरकार उसके भी अंतिम प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटिश अदालतों में मजबूती से पैरवी कर रही है। दोनों आरोपियों को स्वदेश लाना भारतीय जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी चुनौती बना हुआ है।