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महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा: किसानों पर गहराया संकट, सरकार ने राहत पैकेज का किया ऐलान

महाराष्ट्र के किसानों के लिए इस साल का सूखा संकट अब सरकारी राहत के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने राज्य के 265 तालुकों में सूखा घोषित किया है. . .

खेतों में सूखती फसल, पानी और चारे की चिंता के बीच सरकार का बड़ा फैसला; राजस्व में छूट से लेकर बिजली बिल और कर्ज राहत तक कई उपाय

मुंबई: महाराष्ट्र के किसानों के लिए इस साल का सूखा संकट अब सरकारी राहत के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने राज्य के 265 तालुकों में सूखा घोषित किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बारिश की कमी और लंबे ड्राय स्पेल ने कई इलाकों में खरीफ फसलों को प्रभावित किया है और किसानों के सामने पानी, चारा और आजीविका की चिंता बढ़ गई है। मौजूदा स्थिति में राज्य के कृषि-निर्भर क्षेत्रों पर इसका खास असर देखा जा रहा है। सरकार ने सूखा प्रभावित इलाकों के लिए कई राहत उपायों की घोषणा की है। इनमें किसानों को राजस्व में छूट, फसल ऋण के पुनर्गठन, कर्ज वसूली पर रोक और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत जैसे कदम शामिल हैं।

सूखे की मार सिर्फ खेत तक नहीं, पूरे परिवार पर

सूखे का असर केवल फसल खराब होने तक सीमित नहीं रहता। जब खेत में पैदावार घटती है तो किसान परिवार की आमदनी प्रभावित होती है। इसके साथ पीने के पानी, पशुओं के चारे और रोजगार की समस्या भी बढ़ सकती है। महाराष्ट्र में इस वर्ष बारिश के असमान वितरण और लंबे अंतराल ने कई इलाकों में खेती को प्रभावित किया है। हाल की रिपोर्टों में भी राज्य के कई जिलों में बारिश की कमी और जल भंडार में गिरावट की स्थिति सामने आई है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सरकार ने किसानों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए कई उपाय घोषित किए हैं।

  • जमीन के राजस्व में छूट दी जाएगी।
  • फसल ऋण का पुनर्गठन किया जाएगा।
  • खेती से जुड़े कर्ज की वसूली पर रोक रहेगी।
  • कृषि पंपों के चालू बिजली बिल में राहत दी जाएगी।
  • 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों का बिजली बिल पहले से माफ है; अब अधिक क्षमता वाले पंपों को भी निर्धारित राहत देने की बात कही गई है।
  • सूखा घोषित गांवों में किसानों के कृषि पंपों का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।

बच्चों की पढ़ाई पर भी नहीं पड़ेगा संकट का असर

सरकार ने सूखे का असर किसान परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर कम करने के लिए स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क में छूट देने की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों पर शिक्षा से जुड़ा अतिरिक्त बोझ कम करना है।

रोजगार के साथ पानी और भोजन की व्यवस्था

सूखा प्रभावित इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए रोजगार गारंटी योजना के नियमों में ढील देकर अधिक से अधिक काम शुरू करने की बात कही गई है। इसके अलावा जरूरत वाले स्थानों पर पीने के पानी के टैंकर उपलब्ध कराए जाएंगे। खेती पर निर्भर किसानों और खेत मजदूरों के लिए अनाज की व्यवस्था तथा पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उपाय भी किए जाएंगे।

किसानों के साथ पशुधन की भी चिंता

सूखे के दौरान पानी और चारे की कमी से पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ती हैं। ऐसे में सरकार ने पशुओं के चारे की व्यवस्था करने और लोगों तथा मवेशियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही है। जल संरक्षण के काम भी बड़े पैमाने पर शुरू किए जाएंगे, ताकि तत्काल राहत के साथ भविष्य में पानी की समस्या को कम करने की दिशा में काम हो सके।

जिलाधिकारियों को तत्काल पंचनामा पूरा करने के निर्देश

सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को प्रभावित इलाकों में पंचनामा प्रक्रिया तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए हैं। फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज करने के लिए फोटो और जीपीएस लोकेशन का रिकॉर्ड तैयार करने को भी कहा गया है। ऐसे सर्वे से फसल नुकसान और प्रभावित किसानों की स्थिति का दस्तावेजी आकलन करने में मदद मिलेगी।

आखिर सूखा घोषित करने का आधार क्या होता है?

सूखे की घोषणा केवल बारिश कम होने के आधार पर नहीं होती। फसल नुकसान, वर्षा की कमी, मिट्टी की नमी, पानी की उपलब्धता, भूजल स्थिति, चारे की कमी और रोजगार के लिए पलायन जैसे कई संकेतकों को देखा जाता है। केंद्र के आपदा राहत मानकों के तहत भी सूखे के आकलन के लिए अलग-अलग मानदंड हैं। महाराष्ट्र में भी राज्य सरकार स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रभावित तालुकों का आकलन करती है।

अब सबसे बड़ी चुनौती राहत को खेत तक पहुंचाने की

265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने के बाद असली चुनौती राहत उपायों को तेजी से जमीन पर लागू करने की होगी। किसान परिवारों के लिए समय पर पानी, चारा, रोजगार, बिजली और आर्थिक सहायता उपलब्ध होना सबसे अहम होगा।बारिश की कमी से जूझ रहे खेतों में खड़ी फसल और परिवार की आजीविका दोनों दांव पर हैं। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती केवल सूखा घोषित करने की नहीं, बल्कि राहत को उस किसान तक पहुंचाने की है, जिसके खेत में इस समय पानी और पैदावार दोनों की कमी है।

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