कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सोमवार, 29 जून को बंगाल विधानसभा में यूसीसी बिल पेश किया जाने वाला है। राज्य के मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि आगामी सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया जाएगा। उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि यूसीसी लागू करने वाले राज्यों की सूची में अब पश्चिम बंगाल का नाम भी जुड़ जाएगा।
भाजपा विधायक शर्वरी मुखर्जी ने भी राज्य में यूसीसी की मांग का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने इसे बंगाल की मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए बेहद जरूरी बताया। शर्वरी मुखर्जी ने कहा: “पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) की सख्त जरूरत है। ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसी दोनों बड़ी समस्याओं से निपटने के लिए राज्य में इस कानून को लागू करना अत्यंत आवश्यक है। पिछले 15 वर्षों में राज्य में कई तरह की क्रूर घटनाएं सामने आई हैं और सीमावर्ती इलाकों के जनसांख्यिकीय ढांचे में भी काफी बदलाव आया है।”
गुजरात, उत्तराखंड और असम मॉडल पर काम करेगी सरकार
इससे पहले शुक्रवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया था कि गुजरात, उत्तराखंड और असम में अपनाए गए मॉडल के आधार पर ही पश्चिम बंगाल में भी समान नागरिक संहिता को लागू किया जाएगा। इसके क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया जा चुका है। गौरतलब है कि हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान एक रोड शो में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी वादा किया था कि 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल करने के बाद पार्टी राज्य में यूसीसी लागू करने के अपने संकल्प को पूरा करेगी।
अन्य राज्यों की स्थिति पर एक नज़र
देश के विभिन्न राज्यों में समान नागरिक संहिता को लेकर उठाए गए कदम इस प्रकार हैं:
| राज्य | यूसीसी की वर्तमान स्थिति |
| उत्तराखंड | फरवरी 2024 में यूसीसी बिल पास करने वाला देश का पहला राज्य बना। |
| गुजरात | मार्च 2026 में यूसीसी विधेयक को मंजूरी दी। |
| असम | मई 2026 में यूसीसी बिल पास कर कदम आगे बढ़ाए। |
| मध्य प्रदेश | मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आगामी मानसून सत्र में बिल पेश करने के संकेत दिए हैं। |
| महाराष्ट्र | हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में समीक्षा समिति गठित करने का प्रस्ताव है। |
सभी धर्मों के लिए एक समान कानून की तैयारी
सोमवार को राज्य सरकार विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) समेत कुल तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। वर्तमान में मुस्लिम और ईसाई समुदायों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े अलग-अलग पर्सनल लॉ (कानून) हैं। लेकिन यूसीसी लागू होने के बाद हिंदू, मुस्लिम, ईसाई समेत सभी धर्मों के लोग एक ही साझा कानून के दायरे में आ जाएंगे। राज्य के एक अन्य मंत्री दिलीप घोष ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि यह बिल विधानसभा में आसानी से पारित हो जाएगा। उन्होंने कहा, “यूसीसी बिल हर हाल में पास होगा। कई राज्यों में यह पहले ही पारित हो चुका है और अब बंगाल में भी इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। आगे की रणनीति क्या होगी और कब कौन सा कदम उठाया जाएगा, इसका फैसला सरकार करेगी।”