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रामपुर में अनोखा पंचायत फैसला: दो पत्नियों के बीच बांटा गया पति का समय, हफ्ते में 1 दिन रहेगी ‘आजादी’

रामपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। यहां एक पंचायत ने दो पत्नियों वाले एक व्यक्ति के घरेलू विवाद को सुलझाने के लिए ऐसा. . .

रामपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। यहां एक पंचायत ने दो पत्नियों वाले एक व्यक्ति के घरेलू विवाद को सुलझाने के लिए ऐसा फैसला सुनाया, जिसमें पति को दोनों पत्नियों के साथ बराबर समय बिताने का निर्देश दिया गया। पंचायत के फैसले के मुताबिक, पति सप्ताह में तीन दिन पहली पत्नी और तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ रहेगा, जबकि सातवां दिन वह अपनी इच्छा के अनुसार बिता सकेगा। इसके साथ ही पहली पत्नी के लिए आर्थिक जिम्मेदारी तय करते हुए हर महीने राशन और हर सप्ताह 500 रुपये खर्च देने की बात भी कही गई।

पति के खिलाफ पहली पत्नी ने खोला मोर्चा, पहुंची पुलिस चौकी

यह मामला रामपुर के दढ़ियाल क्षेत्र का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, युवक की पहली शादी करीब 14 साल पहले उत्तराखंड की रहने वाली महिला से हुई थी। दोनों की दो बेटियां हैं। करीब चार साल पहले युवक ने दूसरी शादी कर ली। बताया गया कि दूसरी शादी का कारण पहली पत्नी से बेटा न होना बताया गया था। हालांकि दूसरी पत्नी से भी उसे बेटियां ही हुईं, लेकिन इसके बावजूद युवक अधिकतर समय दूसरी पत्नी के साथ रहने लगा।पहली पत्नी ने आरोप लगाया कि उसे पति की ओर से पर्याप्त खर्च नहीं दिया जा रहा था और उसकी अनदेखी की जा रही थी। इसके बाद उसने पुलिस चौकी पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस जांच से पहले ही गांव में बैठ गई पंचायत

मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस जांच शुरू कर रही थी, लेकिन इसी बीच गांव के लोगों ने पंचायत बुला ली। घंटों चली पंचायत में दोनों पक्षों की बात सुनी गई और फिर विवाद खत्म करने के लिए फैसला सुनाया गया। पंचायत ने पति को दोनों पत्नियों के बीच समय बांटने का निर्देश दिया। फैसले के अनुसार, पति को सप्ताह के छह दिन दोनों पत्नियों के साथ बराबर-बराबर रहना होगा।

तीन दिन पहली पत्नी, तीन दिन दूसरी पत्नी; सातवां दिन पति की मर्जी

पंचायत के फैसले में कहा गया कि पति सप्ताह के तीन दिन पहली पत्नी के साथ और तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ रहेगा। सप्ताह का एक दिन उसे अपनी इच्छा के अनुसार बिताने की छूट दी गई है। इसके अलावा पहली पत्नी की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए पति को हर महीने घर का राशन उपलब्ध कराने और हर सप्ताह 500 रुपये खर्च देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

‘दोनों पक्षों की सहमति से हुआ समझौता’, पुलिस ने बताया मामला शांत

बताया जा रहा है कि पंचायत के फैसले को दोनों पक्षों ने स्वीकार कर लिया है। इसके बाद पहली पत्नी ने पुलिस में दी गई शिकायत को आगे नहीं बढ़ाया। स्थानीय पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों की सहमति से समझौता हो गया है और मामले का शांतिपूर्ण समाधान कर दिया गया है।

कानूनी सवालों के बीच पंचायत का फैसला बना चर्चा का विषय

इस मामले में पंचायत का फैसला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां स्थानीय स्तर पर इसे पारिवारिक विवाद सुलझाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं ऐसे मामलों में कानूनी अधिकारों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ग्रामीण इलाकों में कई पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए पंचायतों की भूमिका अभी भी प्रभावशाली बनी हुई है।

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