कोलकाता। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद बुधवार को विधानसभा का पहला बजट सत्र राज्यपाल के अभिभाषण के साथ औपचारिक रूप से शुरू हुआ। सुबह 11 बजे राज्यपाल के संबोधन के जरिए सत्र की कार्यवाही का शुभारंभ हुआ। नई भाजपा सरकार के गठन के बाद यह पहला विधानसभा सत्र होने के कारण राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही स्तरों पर इसकी विशेष अहमियत मानी जा रही है।
पिछले कुछ दिनों से विधानसभा परिसर विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ था। विशेष रूप से विपक्षी दल की स्थिति, विपक्ष के नेता की भूमिका तथा तृणमूल कांग्रेस में कथित टूट-फूट जैसे विषयों को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहा। ऐसे में भाजपा सरकार के पहले बजट और उसकी नीतिगत प्राथमिकताओं पर सभी राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम लोगों की नजर टिकी हुई है।
सर्वदलीय बैठक में सत्र को सुचारु रूप से चलाने पर जोर
बजट सत्र को संसदीय परंपराओं और नियमों के अनुरूप शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से मंगलवार को विधानसभा में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। इसके साथ ही कार्य सलाहकार समिति (बिजनेस एडवाइजरी कमेटी-बीएसी) की विशेष बैठक भी हुई।
बैठक में विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने के लिए अपने सुझाव रखे। इस दौरान विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय, माकपा विधायक मुस्ताफिजुर रहमान राना तथा आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी भी उपस्थित रहे।
सरकार की नीतियों और बजट पर रहेगी विशेष नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बजट सत्र में नई सरकार अपनी आर्थिक और विकास संबंधी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेगी। राज्यपाल के अभिभाषण में सरकार की आगामी योजनाओं, विकास कार्यक्रमों और प्रशासनिक दृष्टिकोण की झलक मिलने की उम्मीद है। वहीं विपक्ष भी विभिन्न जनहित और राजनीतिक मुद्दों को सदन में उठाने की तैयारी में है।
सत्ता परिवर्तन के बाद आयोजित इस पहले बजट सत्र को राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में पेश होने वाले बजट और उस पर होने वाली बहस राज्य की भविष्य की नीतियों और राजनीतिक दिशा को तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।