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रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका का शिकंजा : प्रतिबंध वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास, भारत पर 100% टैरिफ का प्रावधान

वॉशिंगटन। रूस पर दबाव बढ़ाने और यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के उद्देश्य से अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक अहम बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले. . .

वॉशिंगटन। रूस पर दबाव बढ़ाने और यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के उद्देश्य से अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक अहम बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार भी इसके दायरे में आ सकते हैं।सीनेट में बिल को 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी मिली। अब यह बिल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा। हालांकि, इसके तुरंत कानून बनने की संभावना नहीं है।

बिल का नाम बदलकर ‘लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट’ किया गया

सीनेट में पेश किए जाने से पहले बिल का नाम बदलकर ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ कर दिया गया। यह नाम पूर्व अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में रखा गया है। इस बिल को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने आगे बढ़ाया था। खबर के मुताबिक, ग्राहम के निधन के बाद उनके नाम पर बिल का नाम रखा गया।

भारत और चीन पर लग सकता है 100% तक टैरिफ

बिल का सबसे अहम प्रावधान उन देशों के खिलाफ है जो रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदते हैं। इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देशों के सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है। भारत और चीन रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। इस प्रावधान का उद्देश्य रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय को प्रभावित करना और मॉस्को पर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ाना है। बिल में रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों के रूप में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया का उल्लेख किया गया है।

रूस के खिलाफ और कड़े प्रतिबंधों का प्रस्ताव

बिल में केवल टैरिफ का प्रावधान ही नहीं है, बल्कि रूस के खिलाफ नए आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाने की भी बात कही गई है।प्रस्तावित कानून के तहत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और शीर्ष सैन्य अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा कुछ लोगों के लिए वीजा प्रतिबंध का भी प्रावधान है। रूस से जुड़े कुछ निर्यातों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान भी बिल में शामिल है।

ईरान पर भी शिकंजा कसने की तैयारी

यह प्रस्ताव केवल रूस तक सीमित नहीं है। बिल में ईरान के खिलाफ भी कई प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि इससे रूस और ईरान दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सकेगा।

सीनेट में दोनों पार्टियों का मिला समर्थन

बिल को डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों पार्टियों के सांसदों का व्यापक समर्थन मिला। कुल 86 सीनेटरों ने इसके पक्ष में वोट किया, जबकि 11 ने विरोध किया। रिपब्लिकन पार्टी से केंटकी के सीनेटर रैंड पॉल ने बिल के खिलाफ वोट किया। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी के 10 सीनेटरों ने भी इसका विरोध किया।

डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के अधिकारों पर जताई चिंता

बिल को समर्थन देने वाले डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने वोटिंग के बाद कहा कि लिंडसे ग्राहम को इस कदम पर गर्व होता। उन्होंने कहा कि कड़े प्रतिबंध और टैरिफ उन लोगों पर दबाव बढ़ाएंगे, जो यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध में मदद कर रहे हैं। हालांकि, कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों ने बिल के दूसरे पहलू को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह कानून राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ लगाने की व्यापक शक्तियां दे सकता है, जिसका इस्तेमाल उनके अनुसार मनमाने तरीके से किया जा सकता है।

अभी कानून नहीं बना है

सीनेट से मंजूरी मिलने के बावजूद यह बिल अभी अमेरिकी कानून नहीं बना है। अब इसे प्रतिनिधि सभा में पेश किया जाएगा।रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस की छुट्टियों के कारण इस पर हाउस में तत्काल मतदान की संभावना नहीं है। प्रतिनिधि सभा की बैठक 31 अगस्त से फिर शुरू होने की उम्मीद है और इसके बाद बिल पर आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बिल?

अगर यह बिल आगे चलकर कानून बनता है और इसके भारत से जुड़े प्रावधान लागू किए जाते हैं, तो रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा आयात करने के कारण भारत पर अमेरिकी व्यापारिक दबाव बढ़ सकता है।हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत पर वास्तव में 100% टैरिफ लागू होगा। इसके लिए पहले बिल को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद ही इसके वास्तविक प्रभाव और दायरे की तस्वीर साफ होगी।

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