नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शायद राजनीति से संन्यास लेने का विचार कर रहे हैं। बीते दिन उनके एक बयान से यह संकेत मिले हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे राज्यसभा के लिए कर्नाटक से निर्विरोध सांसद चुन लिए गए हैं। निर्वाचन अधिकारी से प्रमाण पत्र मिलने के बाद उन्होंने मीडिया से बात की और राज्यसभा के लिए निर्वाचित करने के लिए कांग्रेस सांसदों का आभार जताया। उन्होंने सोनिया गांधी के प्रति भी आभार व्यक्त किया और अपनी राजनीतिक पारी को लेकर बड़ा बयान दिया।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने आभार जताया
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि यह मेरा 13वां चुनाव है। कांग्रेस ने मुझे जनता की सेवा करने का अवसर दिया है। इसके लिए मैं सोनिया गांधी का आभारी हूं। मुझे अपनी पार्टी और अपने लोगों पर बहुत गर्व है। मैं उन सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को भी बधाई देता हूं, जिन्होंने मेरा समर्थन किया, विशेष रूप से मेरे विधायक कार्यकाल और संसदीय कार्यकाल में सहयोग किया। कर्नाटक की जनता, पार्टी सदस्यों और मीडिया का आभारी हूं, क्योंकि आप सभी ने मेरा साथ दिया, ताकि मैं सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले जन प्रतिनिधियों में से एक बन सकूं।
दूसरी बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित
बता दें कि कर्नाटक से कांग्रेस के 83 वर्षीय अनुभवी नेता खड़गे दूसरी बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। खड़गे वर्तमान में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं। अक्टूबर 2022 से वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अध्यक्ष हैं। फरवरी 2021 से राज्यसभा में विपक्ष के नेता के पद पर नियुक्त हैं। 2009 और 2014 तक वे कर्नाटक की गुलबर्गा सीट से लोकसभा सांसद रह चुके हैं। 1972 से 2009 तक लगातार वे 9 बार कर्नाटक से विधायक रहे और उनके नाम यह अजेय रिकॉर्ड दर्ज है।
मनमोहन सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके
बता दें कि मल्लिकार्जन खड़गे अपने राजनीतिक करियर में वे मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री, रेल मंत्री तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री भी रह चुके हैं। उनके बेटे प्रियांक खड़गे कर्नाटक की वर्तमान डीके शिवकुमार सरकार में मंत्री पद पर नियुक्त हैं। उनके दामाद राधाकृष्ण उनकी लोकसभा संसदीय सीट गुलबर्गा से सांसद हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं और इस धर्म में उनकी गहरी आस्था है। गुलबर्गा में ‘बुद्ध विहार’ का निर्माण करा रही संस्था सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के वे संस्थापक अध्यक्ष भी हैं।