नई दिल्ली। अगर आप नियमित रूप से चिकन खाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिकों ने चिकन से जुड़े एक ऐसे बैक्टीरिया को लेकर चेतावनी दी है, जो गंभीर पेट संबंधी बीमारियों का कारण बन सकता है। हालिया रिसर्च में दावा किया गया है कि दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे पोल्ट्री फार्मों के कारण कैम्पिलोबैक्टर (Campylobacter) नामक बैक्टीरिया का खतरा लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि चिकन ठीक तरह से न पकाया जाए या कच्चे चिकन के संपर्क में लापरवाही बरती जाए, तो यह बैक्टीरिया इंसानों तक पहुंचकर गंभीर संक्रमण फैला सकता है।
रिसर्च में सामने आया बड़ा खतरा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया भर में पोल्ट्री उद्योग के तेजी से विस्तार के साथ मुर्गियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बड़े पैमाने पर होने वाले मुर्गी पालन के कारण कैम्पिलोबैक्टर बैक्टीरिया के पनपने और फैलने की संभावना भी बढ़ गई है। यह बैक्टीरिया दुनिया में डायरिया (दस्त) फैलाने वाले सबसे आम जीवाणुओं में गिना जाता है और हर साल लाखों लोगों को संक्रमित करता है।
अधपका चिकन बना सकता है बीमारी का शिकार
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चिकन पूरी तरह से पकाया नहीं गया हो या कच्चे चिकन में मौजूद बैक्टीरिया भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाएं, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा कच्चे चिकन को काटने के दौरान इस्तेमाल किए गए चाकू, कटिंग बोर्ड या अन्य रसोई उपकरणों से भी बैक्टीरिया दूसरे खाद्य पदार्थों तक पहुंच सकता है।
संक्रमण के बाद दिख सकते हैं ये खतरनाक लक्षण
कैम्पिलोबैक्टर बैक्टीरिया शरीर में पहुंचने के बाद कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं—
- तेज दस्त (डायरिया)
- पेट में तेज दर्द और ऐंठन
- मतली और उल्टी
- बुखार
- आंतों में संक्रमण
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ मामलों में यह संक्रमण लंबे समय तक रहने वाली आंत संबंधी बीमारी इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) का जोखिम भी बढ़ा सकता है। गंभीर संक्रमण होने पर अस्पताल में इलाज की आवश्यकता पड़ सकती है।
वैज्ञानिकों की नई चिंता—एंटीबायोटिक भी हो रही बेअसर
रिसर्च में एक और चिंताजनक तथ्य सामने आया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कैम्पिलोबैक्टर के कई स्ट्रेन अब एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक (Antibiotic Resistant) होते जा रहे हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में इस संक्रमण का इलाज पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है और सामान्य दवाएं उतनी प्रभावी नहीं रह सकतीं।
45 साल के अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने 1979 से 2024 के बीच 30 देशों से जुटाए गए लगभग 2,800 बैक्टीरियल जीनोम का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि वर्ष 1900 के बाद से मुर्गियों में कैम्पिलोबैक्टर के कुछ खतरनाक स्ट्रेन लगभग 100 गुना तक बढ़ चुके हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।
कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञ संक्रमण से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं—
- चिकन को हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।
- कच्चे और पके हुए चिकन को अलग-अलग रखें।
- कच्चे चिकन को छूने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।
- कटिंग बोर्ड, चाकू और रसोई के अन्य उपकरणों को उपयोग के बाद अच्छी तरह साफ करें।
- अधपका या कच्चा चिकन खाने से बचें।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चिकन पोषण का अच्छा स्रोत है, लेकिन सुरक्षित तरीके से पकाना और साफ-सफाई के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। सही तापमान पर पकाया गया चिकन सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है, जबकि अधपका या दूषित चिकन कैम्पिलोबैक्टर सहित अन्य खाद्य जनित संक्रमणों का जोखिम बढ़ा सकता है।